फाल्गुन में सावन का अहसास : कहीं ओले तो कहीं बौछारें, लौटी ठिठुरन

12 किमी की रफ्तार से चल रही सर्द हवा
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एक ही दिन में अधिकतम तापमान में ढाई डिग्री से ज्यादा की गिरावट, रात में 2 मिमी बारिश
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से उज्जैन सहित पूरे मालवा का मौसम बुधवार-गुरुवार को अचानक बदल गया। बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात हुई बारिश के कारण फाल्गुन के महीने ने सावन का अहसास कर दिया है।
यूं तो बुधवार सुबह ही आसमान में बादलों ने डेरा डाल रखा था लेकिन दिन चढ़ते-चढ़ते यह हवा हो गए थे। रात अचानक एक बार फिर बादलों ने आमद दी और शहर पर छा गए। रात से ही ठंडी हवा भी चलनी लगी और करीब 1 बजे से बारिश शुरू हो गई। इसका असर यह रहा कि उज्जैन शहर सहित अंचल के कई हिस्सों में तेज हवाओं के साथ झमाझम बारिश और ओलावृष्टि हुई।
बारिश ने वातावरण में ठंडक घोल दी है और तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई। गुरुवार को यह 2.7 डिग्री गिरकर 15.0 डिग्री पर आ गया। हालांकि बुधवार को अधिकतम तापमान 31.0 डिग्री ही रहा। हालांकि, सुबह से 12 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से सर्द हवा चलती रही।
ग्रामीण क्षेत्रों में ओलावृष्टि और फसलों को नुकसान
उज्जैन के ग्रामीण क्षेत्रों में मौसम का बड़ा असर देखा गया है। मध्यम और तेज बारिश के साथ ही बमोरी खजूरिया, बिसाखेड़ी, रुदाहेड़ा, आवला भूतिया, झीतरखेड़ी, दौलतपुर, घट्टिया, उन्हेल, पासलोद, खाचरौद में चने के आकार के ओले गिरने की सूचना है। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं और चने की खड़ी फसलों में नुकसान होने की आशंका जताई है। कुछ जगहों से तेज हवा के कारण गेहूं की फसल आड़ी होने की जानकारी भी है। इसका असर उत्पादन पर हो सकता है। इधर, भारतीय किसान संघ की महिदपुर इकाई के मंत्री मनोहरसिंह राजपूत ने ने बताया कि सरकार को आरबीसी के तहत तत्काल किसानों को मुआवजा देना चाहिए। घोंसला क्षेत्र के किसान राधेश्याम राठौर ने बताया कि लुहारवास, रलायता, सलामत कोयल और वीरमखेड़ी के किसानों को खासा नुकसान हुआ है।
धूल का गुबार और विजिबिलिटी में आई कमी
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार अरब सागर से आ रही नमी और राजस्थान के ऊपर बने चक्रवात के कारण यह बदलाव दिख रहा है। अगले 24 से 48 घंटों तक आसमान में बादल छाए रहेंगे। कुछ स्थानों पर हल्की बूंदाबांदी की स्थिति बनी रह सकती है।
गर्मी के बाद अचानक गिरा मावठा
महाशिवरात्रि के बाद से गर्मी का असर दिखाई दे रहा था, लेकिन मौसम की एकाएक पलटी से सब हतप्रभ हैं। बेमौसम बरसात का असर गेहूं के उत्पादन पर हो सकता है।









