अफसरों की बस यात्रा: सिंहस्थ में 1.5 किमी से ज्यादा नहीं चलना पड़ेगा

पांचवे दिन गऊघाट से त्रिवेणी तक मुआयना, 29 किलोमीटर लंबे नए घाटों के लिए 110 से ज्यादा एप्रोच पाइंट ढूंढें
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। घाटों के लिए एप्रोच रोड तलाशने निकली प्रशासनिक टीम ने बुधवार को मितव्यता बरती और अफसर अपने पर्सनल वाहन छोड़ मिनी बस से शुरुआती पाइंट पहुंचे। गऊघाट से लेकर त्रिवेणी पर शनि मंदिर के सामने तक नए एप्रोच रोड तलाशें। नदी के राइट बैंक में करीब 4.5 किमी का सफर तय करने में टीम को 2.30 घंटे लगे। इस दौरान कई जगहों पर ऊंचे-नीचे रास्तों से गुजरना पड़ा। 110 एंट्री पॉइंट मिलने के बाद प्रशासन यह मान रहा है कि सिंहस्थ में श्रद्धालुओं को स्नान के लिए घाटों तक पहुंचने के लिए 1.5 किमी से ज्यादा नहीं चलना होगा।
संभागायुक्त आशीषसिंह, कलेक्टर रौशनकुमार सिंह, निगमायुक्त अभिलाष मिश्रा, यूडीए सीईओ संदीप सोनी के साथ बुधवार को दौरे में सिंहस्थ ओएसडी गोपाल डाड भी शामिल हुए। जल संसाधन, पीडब्ल्यूडी अधिकारियों की टोली भी साथ थी। मंगलवार को चक्रतीर्थ से ही दौरे की शुरुआत हुई, चूंकि चक्रतीर्थ से गऊघाट तक पुराने घाट बने हुए हैं तो यहां टीम को कोई दिक्कत नहीं आई। टीम की मशक्कत गऊघाट पाले से शुरू हुई।
यहां से कच्चे, उबड़-खाबड़ रास्तों से चलते हुए टोली वेधशाला के पीछे, नावघाट, कच्चा शमशान, शांति पैलेस चौराहे के पीछे से आस्था गार्डन पहुंची। यहां नए घाटों का निर्माण तेजी से चल रहा है। आत्मलिंगेश्वर महादेव मंदिर के पास बांसों के घने झुरमुट, कंटीली बैरी और बबूल के कांटों के बीच से होते हुए टीम प्रशांति धाम घाट पर रुकी। स्टापडेम को क्रॉस कर टोली शनि मंदिर के सामने पहुंची और इसी के साथ पांच दिन से चल रहा घाटों का निरीक्षण भी पूरा हो गया।
5 दिन में 38 किमी चले: पांच दिन में टीम ने 29 किमी लंबे नए और 9 किमी लंबे पुराने घाटों की दूरी नापी। यानी एक दिन में 7.60 किमी की यात्रा अफसरों ने की।
110 से ज्यादा एंट्री पाइंट तलाशने से होगी आसानी
प्रशासनिक टीम ने पांच दिनी दौरे में करीब 110 से ज्यादा एंट्री और एग्जिट पाइंट की पहचान की है। एंट्री पॉइंट पर आने के बाद श्रद्धालुओं को घाट तक पहुंचने के लिए केवल 1 से 1.5 किमी तक ही चलना होगा। यह अब तक हुए सिंहस्थों में सबसे कम दूरी रहेगी।
110 से ज्यादा एंट्री एग्जिट पाइंट देखें हैं
टीम ने पांच दिन में 38 किमी पैदल चलकर 110 से ज्यादा एंट्री-एग्जिट पाइंट देखे हैं। एंट्री पाइंट से घाटों की अधिकतम दूरी 1 से 1.5 किलोमीटर है। ऐसे में इस बार श्रद्धालुओं को स्नान के लिए ज्यादा नहीं चलना होगा। सिंहस्थ में सबसे बड़ी चुनौती ही श्रद्धालुओं को सुविधाजनक स्नान कराने की है। ग्राउंड लेवल पर अच्छी खासी तैयारी हो गई है।
रौशनकुमारसिंह, कलेक्टर
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