प्रणित मोरे की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, वीडियो विवाद गरमाया

‘बिग बॉस 19’ फेम स्टैंड-अप कॉमेडियन प्रणित मोरे और उनका ‘370 रुपये की बिरयानी’ वाला विवाद फिर से सुर्खियों में हैं। कुछ महीने पहले गुरुग्राम में उनके स्टैंड-अप शो के दौरान एक दर्शक हिमांशु जांगड़ा ने डेट और 370 रुपये की बिरयानी से जुड़ी आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। जिसके बाद सोशल मीडिया पर खूब बवाल मचा। 35 साल के प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा, दोनों के खिलाफ कई FIR दर्ज हुईं। अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है, जहां प्रणित ने अलग-अलग राज्यों में दर्ज FIR को एक साथ जोड़ने की मांग की है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के साथ महाराष्ट्र और हरियाणा सरकार से जवाब मांगा है। यही नहीं, प्रणित ने फिर से अदालत में सफाई दी है।
प्रणित ने लगे हाथ अदालत में सफाई भी दी है। कहा कि विवादित वीडियो उनकी ‘पीआर टीम ने बिना सहमति’ के अपलोड की थी। ‘370 रुपये की बिरयानी’ का यह पूरा विवाद प्रणित मोरे के गुरुग्राम शो में हुआ था, जहां क्राउड वर्क के दौरान एक दर्शक की बेहूदा टिप्पणी खूब वायरल हो गई।
- हिमांशु जांगड़ा ने की टिप्पणी, प्रणित मोरे पर भी उठे सवाल
गुरुग्राम के स्टैंड-अप शो में क्राउडवर्क के दौरान यह पूरा विवाद शुरू हुआ। दर्शक हिमांशु जांगड़ा ने इसमें अपनी एक डेट का जिक्र करते हुए बताया कि उन्होंने एक महिला के लिए चिकन बिरयानी पर 370 रुपये खर्च किए थे। वह इसके बदले महिला से सेक्सुअल फेवर की इच्छा रख रहे थे। इस बयान पर विवाद हुआ और महिलाओं के प्रति ऐसी घटिया सोच पर सवाल उठे। विवाद सिर्फ हिमांशु जांगड़ा की टिप्पणी तक सीमित नहीं रहा। वायरल वीडियो में प्रणित मोरे को उस बातचीत पर हंसते हुए देखा गया, जिसके बाद उनकी भी आलोचना हुई। लोगों ने सवाल उठाया कि शो के होस्ट होने के नाते उन्हें ऐसी टिप्पणी पर आपत्ति जतानी चाहिए थी। इसके बाद मामला राष्ट्रीय महिला आयोग तक पहुंचा और बाद में महाराष्ट्र और हरियाणा में FIR भी दर्ज हुईं।
- सुप्रीम कोर्ट में क्या हुआ?
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने प्रणित मोरे की उस याचिका पर केंद्र, महाराष्ट्र और हरियाणा सरकार से जवाब मांगा, जिसमें उन्होंने अलग-अलग अधिकार क्षेत्रों में दर्ज दोनों FIR को एक साथ जोड़ने की मांग की है। चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने मामले की सुनवाई की। प्रणित के वकील ने कोर्ट में कहा कि दोनों FIR एक ही घटना और तथ्यों से जुड़ी हैं इसलिए उन्हें क्लब किया जाना चाहिए।
- ‘मैंने सभी मंचों पर माफी मांगी है’
सुनवाई के दौरान प्रणित मोरे की ओर से पेश वकील ने कोर्ट को बताया कि कॉमेडियन ने सभी मंचों पर माफी मांगी है जिसमें नेशनल कमीशन फॉर विमेन (NCW) भी शामिल है। प्रणित ने वकील ने कहा, ‘मैंने सभी मंचों पर माफी मांगी है, और मैं सिर्फ शो का होस्ट था। मैं स्थिति की गंभीरता को समझता हूं, लेकिन मैं बस यही चाहता हूं कि गुड़गांव वाली FIR को बॉम्बे वाली FIR के साथ जोड़ दिया जाए। मैं ट्रायल का सामना करने के लिए तैयार हूं।’ प्रणित की ओर से यह भी कहा गया कि विवादित वीडियो FIR दर्ज होने से पहले ही डिलीट कर दिया गया था। उनके वकील के मुताबिक उस समय प्रणित यात्रा कर रहे थे और उनकी PR टीम ने वीडियो पब्लिश करने से पहले उनकी मंजूरी नहीं ली थी।
- ‘मेरी PR टीम ने वीडियो पब्लिश करने से पहले मंजूरी नहीं ली’
कोर्ट में प्रणित मोरे की ओर से आगे कहा गया, ‘FIR दर्ज होने से पहले ही जैसे ही मुझे स्थिति की गंभीरता का पता चला मैंने वीडियो डिलीट कर दिया। उस समय मैं यात्रा कर रहा था, और मेरी PR टीम ने वीडियो पब्लिश करने से पहले मेरी मंजूरी नहीं ली थी।’ वकील ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रणित मामले में ट्रायल का सामना करने के लिए तैयार हैं और उनकी मांग सिर्फ अलग-अलग राज्यों में दर्ज FIR को एक साथ जोड़ने की है।
- हिमांशु जांगड़ा सोशल मीडिया से हटे, नौकरी से भी निकाले गए
विवाद बढ़ने के बाद हिमांशु जांगड़ा को अपनी टिप्पणी के लिए आलोचना का सामना करना पड़ा। इसके बाद उनकी कंपनी स्टारविक डिजाइन ने उन्हें नौकरी से निकाल दिया। कंपनी के फाउंडर विवेक विश्वकर्मा ने X पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में उनके खिलाफ की गई कार्रवाई की पुष्टि की थी। विवाद के बाद हिमांशु ने भी अपनी टिप्पणी के लिए माफी मांगी और अपना इंस्टाग्राम अकाउंट डीएक्टिवेट कर दिया। वहीं, प्रणित मोरे ने भी सोशल मीडिया पर माफी मांगी थी।
- ‘370 रुपये की बिरयानी’ विवाद में दर्ज हुईं FIR
मामला बढ़ने के बाद गुरुग्राम पुलिस ने प्रणित मोरे और हिमांशु जांगड़ा के खिलाफ FIR दर्ज की थी। इससे पहले महाराष्ट्र साइबर पुलिस ने भी इस मामले में प्रणित मोरे, हिमांशु जांगड़ा और अन्य के खिलाफ FIR दर्ज की थी। राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी मामले का संज्ञान लेते हुए कार्रवाई की मांग की थी। अब प्रणित मोरे की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र, महाराष्ट्र और हरियाणा सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट के सामने फिलहाल मुख्य मुद्दा अलग-अलग राज्यों में दर्ज FIR को क्लब करने की मांग है। मामले में आगे की कार्यवाही संबंधित पक्षों के जवाब के बाद होगी।









