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माघी पूर्णिमा पर शिप्रा में आस्था की डुबकी

डांडा रोपण के साथ आज से होली उत्सव का भी आगाज़

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। माघी पूर्णिमा पर रविवार को श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत नजारा देखने को मिला। मोक्षदायिनी शिप्रा नदी के रामघाट सहित अन्य घाटों पर तड़के से ही श्रद्धालुओं का पहुंचना शुरू हो गया था। कड़ाके की ठंड के बावजूद बड़ी संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने शिप्रा में आस्था की डुबकी लगाई और दान-पुण्य किया।

श्रीक्षेत्र पंडा समिति के सदस्य मोहन राजगुरु डंडेवाला ने बताया कि मां शिप्रा उत्तरवाहिनी है, मोक्ष प्रदान करती हैं। जो श्रद्धालु पूरे माघ मास के दौरान नियमित स्नान नहीं कर पाते, उन्हें माघी पूर्णिमा पर शिप्रा स्नान करने से पूरे महीने के जप-तप और स्नान के समान पुण्य प्राप्त होता है। उज्जैन में माघी पूर्णिमा का स्नान प्रयागराज के माघ स्नान के समान ही फलदायी माना गया है। रामघाट पर माघ स्नान के लिए आईं नरवर की कमला देवी ने बताया कि यह दिन दुर्लभ योग लेकर आता है। उन्होंने बताया आज स्नान दान का दिन है। शिप्रा में स्नान और दान करना मोक्ष प्रदान करता है।

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कई जगह गाड़ा जाएगा होली का डांडा
माघी पूर्णिमा का दिन उज्जैन में एक और विशेष उत्सव की दस्तक देता है। आज से शहर में होली उत्सव की विधिवत शुरुआत हो रही है। इस दिन को ‘डांडा रोपणी पूर्णिमा’  कहा जाता है। परंपरा के अनुसार आज प्रमुख चौराहों पर होली का डांडा गाड़ा जाता है। अगले एक महीने तक यहां पूजन किया जाएगा जिसका समापन फाल्गुन पूर्णिमा को होलिका दहन के साथ होगा।

अतिप्राचीन कंडा होली की तैयारियां शुरू
सिंहपुरी स्थित आताल-पाताल भैरव मंदिर परिसर में विश्व की सबसे प्राचीन मानी जाने वाली कंडा होली की तैयारियां भी आज से प्रारंभ हो गई हैं। कंडे की होली की परंपरा सदियों पुरानी है और उज्जैन की अनूठी सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है। यहाँ की होली में लकडिय़ों के स्थान पर केवल कंडों (उपलों) का उपयोग किया जाता है, जो स्वास्थ्य और पर्यावरण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

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