भागवत कथा के महारास में मनाया आनंद उत्सव

श्री बाबाधाम मंदिर में भक्त जमकर भजनों पर झूमे
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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैनसुख और दुख मन के हैं, जब हमारे मन में आनंद समा जाए, अच्छा समय मान लेते हैं, खुशी मिल जाती है। दुख का समाचार मिले तो आदमी कहता है मेरा समय ठीक नहीं है, मैं कहता हूं जब तक तुम्हारी सांस ठीक चले, ईश्वर की अति कृपा मान लो। कोरोना में हाथ, पांव, सब ठीक थे, ठीक नहीं थी तो सिर्फ श्वास, जब तक सांस है तब तक आस है। जीवन में दो चीजें नित्य हैं कर लो सो काम, भज लो सो राम। काम ऐसे करो कि राम तक पहुंचने में देरी ना हो। जीवन को बहुत आनंद से चलाओ, 84 लाख योनियों में भटक कर मिला है ये मानव शरीर।
यह उद्गार पंचायती अखाड़ा श्री निरंजनी के महामंडलेश्वर स्वामी प्रेमानंद महाराज ने बडऩगर रोड़ स्थित मोहनपुरा में श्री बाबाधाम मंदिर में आयोजित भागवत कथा के महारास में व्यक्त किए। महाराज आनंद उत्सव में भक्त जमकर भजनों पर झूमे। महामंडलेश्वर ने कहा कि जो सुख और दुख में एक जैसा हो जाता है, वह सतपुरूष हो जाता है। जीवन सतपुरूष जैसा होना चाहिये। माखन मिश्री मिले तो आनंद, सूखी रोटी मिले तो भी आनंद है।
रात को बिस्तर पर जाओ तो जरूर सोचना, आर्थिक लाभ नहीं मिला ठाकुर ने निरोग रख दिया, तकलीफ नहीं दी, ठाकुर की कृपा समझो। उनका सोचो जो बीमार है, जिन्हें भोजन नहीं मिल रहा, उन्हें देख लो, खुद को सुखी समझ लोगे। श्रावण मास में बाबा धाम मंदिर से प्रतिदिन भोजन वितरण हो रहा है, हर दिन बस द्वारा भोजन श्रद्धालुओं हेतु रवाना होता है, श्रावण मास में महाकाल दर्शन हेतु आने वाले श्रध्दालुओं को भोजन कराके हमें लगता है ये सब भोग भोलेनाथ को लग रहा है।









