Sunday, September 24, 2023
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फिलहाल इस वर्ष भी कोई उम्मीद नहीं चुनाव की…

पांच साल से नहीं हुए सहकारी संस्थाओं के चुनाव…

अक्षरविश्व न्यूज.उज्जैन सहकारी संस्थाओं के चुनाव पांच साल में कराने का नियम तो है पर प्रदेश में पांच साल से चुनाव नहीं हुए हैं। इस वर्ष भी चुनाव होने की कोई संभावना नहीं है, क्योंकि सरकार नई प्राथमिक सहकारी समितियां बनाने जा रही हैं। सहकारिता विभाग सहकारी बैंकों में सहकारिता के क्षेत्र से जुडे विधायक, सांसद या अन्य नेताओं को प्रशासक बनाने की तैयारी कर रहा है।

नई प्राथमिक सहकारी समितियां बनाने के लिए वर्तमान समितियों के क्षेत्रों में परिवर्तन हो रहा है। सदस्यों का भी समितियों के बीच विभाजन होगा। यह प्रक्रिया सितंबर तक पूरी होगी। अक्टूबर में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू हो जाएगी। इसे देखते हुए समितियों के संचालन के लिए प्रशासक पदस्थ करने की जो व्यवस्था बनी हुई है, वह यथावत रहेगी।

कमल नाथ सरकार ने भी नहीं कराए चुनाव

सहकारी अधिनियम 1960 के अनुसार प्रत्येक पांच वर्ष में समितियों के चुनाव होने चाहिए। यह प्रक्रिया कार्यकाल पूरा होने के छह माह पहले प्रारंभ हो जानी चाहिए ताकि समिति का कार्यकाल समाप्त होने के पूर्व निर्वाचन की प्रक्रिया पूरी हो जाए लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। वर्ष 2013 में समितियों के चुनाव हुए थे।

इनका कार्यकाल 2018 में पूरा हो गया था। जुलाई २०१८ से प्रक्रिया प्रारंभ जानी थी, लेकिन विधानसभा चुनाव को देखते हुए सरकार ने इसे टाल दिया। कमल नाथ के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी और किसान ऋण माफी योजना के कारण चुनाव नहीं कराए गए। जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में प्रशासक नियुक्त कर दिए गए।

इनका कहना

सहकारी संस्थाओं के चुनाव निर्धारित अवधि में होना चाहिए,लेकिन बीते १० साल में सरकार की सहकारी चुनाव कराने की मंशा नहीं रही। चुनाव के लिए प्रदर्शन कर ज्ञापन भी दिए गए है। हाई कोर्ट में याचिका भी दायर की है। चुनाव में सरकार की रुचि नहीं है।
योगेंद्रसिंह सिसौदिया,
प्रदेश महामंत्री मप्र सहकार भारती।

समितियों के क्षेत्र का नए सिरे से निर्धारण

समितियों के क्षेत्र का नए सिरे से निर्धारण हो रहा है। इसमें समिति के क्षेत्र में भी परिवर्तन होगा और सदस्य भी बंट जाएंगे। यह प्रक्रिया सितंबर तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, चुनाव के लिए सदस्यता सूची नए सिरे से बनानी होगी। अक्टूबर में विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होगी।

उस दौरान कोई और दूसरा चुनाव नहीं कराया जा सकता है। इन्हीं सब कारणों से इस वर्ष सहकारी समितियों के चुनाव संभावना नहीं है। यही कारण है कि सहकारिता विभाग सहकारी बैंकों में सहकारिता के क्षेत्र से जुडे विधायक, सांसद या अन्य नेताओं को प्रशासक बनाने की तैयारी कर रहा है।

अपात्र किसानों का मामला आने से चुनाव टल

मार्च 2020 में शिवराज सरकार बनी और कोरोना महामारी के कारण चुनाव नहीं हो पाए। स्थिति सामान्य होने पर चुनाव कराने को लेकर सहमति बनी, लेकिन अपात्र किसानों का मामला आ गया और फिर चुनाव टलते गए। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि अब चुनाव कराने की स्थिति नहीं है क्योंकि नई समितियों के गठन की प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है।

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