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‘मौत’ की डोर पर प्रतिबंध, दुकानदारों में नजर आया खौफ

पूछने पर बोले चाइना डोर रखकर मकान नहीं तुड़वाना

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कलेक्टर ने लगाया है दो माह का प्रतिबंध

अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। चाइना डोर से होने वाले जानलेवा हादसों को देखते हुए इस बार प्रशासन ने दो माह पहले ही ‘मौत’ की इस डोर के खरीदने और बेचने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया है। अब इसे जानलेवा मांझे को बेचने के साथ ही खरीदने वाले पर भी कार्रवाई की जाएगी। कलेक्टर का यह आदेश 25 नवंबर से आगामी दो माह तक जिलेभर में लागू होगा। आदेश जारी किए हुए अभी 24 घंटे भी नहीं बीते लेकिन बुधवार को दुकानदारों में इसका खौफ नजर आया। उन्होंने चाइना डोर नहीं होने की बात कही। साथ ही दुकानों पर बोर्ड भी लगा लिए कि जिस पर लिखा था कि यहां चाइना डोर नहीं बेची जाती।

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दरअसल, हर साल मकर संक्रांति से पहले से पतंगबाजी शुरू हो जाती है। पतंगबाज जमकर पतंगबाजी करते हैं। इसके लिए चाइना डोर का खूब इस्तेमाल होता है जिससे पशु-पक्षियों के साथ ही लोग भी हादसे का शिकार होते हैं। पूर्व में जीरो पाइंट ब्रिज पर एक्टिवा से जा रही एक युवती की चाइना डोर के कारण मौत भी हो चुकी है। लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस बार दो माह पहले ही कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने चाइना डोर के क्रय-विक्रय और उपयोग पर प्रतिबंध के आदेश जारी कर दिए हैं जो २५ नवंबर से प्रभावशील हो जाएगा।

यह है आदेश में

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कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के मुताबिक कोई भी व्यक्ति ना तो पतंगबाजी में चाइना (नायलोन) डोर का निर्माण करेगा, ना ही क्रय-विक्रय, उपयोग और स्टॉक कर सकेगा। मकर संक्रांति पर्व पर पतंगबाजी के लिए ऐसी डोर का क्रय-विक्रय एवं निर्माण किया जाए जिससे किसी भी व्यक्ति, पशु-पक्षी को किसी भी प्रकार की शारीरिक क्षति ना हो।

मकान नहीं तुड़वाना हमें

बुधवार सुबह अक्षर विश्व टीम ने तोपखाना में सामान्य लोगों की तरह पतंगबाजी के लिए चाइना डोर की मांग तो दुकानदार ने साफ इंकार कर दिया। उन्होंने इशारा करते हुए बोर्ड दिखाया जिस पर लिखा था यहां चाइना डोर नहीं बेची जाती। इसके बाद कहा कि हमें अपना मकान नहीं तुड़वाना। इसी तरह एक अन्य दुकानदार ने भी यह कहकर लौटा दिया कि चाइना डोर पर प्रतिबंध है, हम सामान्य डोर बेच रहे हैं।

प्रतिबंध के बावजूद चोरी-छिपे बिकती है

पतंगबाजी के लिए चायना डोर का उपयोग बहुतायत में होता है। आए दिन इस डोर से कोई न कोई जख्मी होता है। प्रशासन ने पूर्व में इसके खिलाफ प्रतिबंधात्मक आदेश भी जारी किए लेकिन फिर भी यह डोर बाजार में चोरी-छिपे बिकती रही। पुलिस ने इस पर कार्रवाई भी की, ड्रोन की मदद से छतों की निगरानी की लेकिन बावजूद इसके मौत की इस डोर से पतंगबाजी होती रही। हालांकि, हर बार की तरह इस बार भी कलेक्टर ने दो माह पहले आदेश तो जारी कर दिया है लेकिन यह कितना कारगर होगा, यह आने वाला समय बताएगा।

इसलिए खतरनाक है चाइनीज मांझा

चाइनीज मांझे को नायलोन का मांझा भी कहते हैं। यह डोर अन्य मांझों की तरह धागे से नहीं बनती। यह नायलॉन और एक मैटेलिक पाउडर को मिलाकर बनाया जाता है। यह प्लास्टिक जैसा लगता है। जब इसे खींचा जाता है तो यह टूटने के बजाय बढ़ जाता है। यह मांझा ब्लेड की तरह इतना पैना होता है कि शरीर के किसी भी हिस्से को काट सकता है।

जब चली गई थी युवती की जान

चाइन डोर कितनी घातक हो सकती है, यह फ्रीगंज स्थित जीरो पॉइंट पर हुई घटना से पता चला चलता है। १५ जनवरी २०२२ को नेहा आंजना नामक युवती एक्टिवा से अपनी सहेली के साथ जा रही थी। ब्रिज पार करते समय उसके गले में चायना डोर उलझ गई थी। जिससे उसका गला कट गया था। आसपास से गुजर रहे लोगों ने युवती को अस्पताल पहुंचाया था जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। वह महिदपुर तहसील के नारायणा गांव की रहने वाली थी और उज्जैन में मामा के घर पढ़ाई करने आई थी।

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