बसंत पंचमी कल: भस्मार्ती में अर्पित होंगे पीले फूल-केसरिया अभिषेक, हर्बल गुलाल से महकेगा गर्भगृह

उज्जैन। बसंत पंचमी का पर्व शुक्रवार को देशभर में मनाया जाएगा। उज्जैन में हर त्यौहार की तरह बसंत पंचमी भी सबसे पहले श्री महाकालेश्वर मंदिर में मनेगी। ऋतु परिवर्तन के इस महापर्व पर भगवान महाकाल का विशेष वासंती शृंगार होगा और मंदिर का कोना-कोना पीले रंगों से सजा नजर आएगा।
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उत्सव की शुरुआत शुक्रवार तड़के 4 बजे होने वाली भस्मार्ती से होगी। इस दौरान पुजारी भगवान महाकाल का केसरिया पंचामृत से अभिषेक करेंगे। अभिषेक के पश्चात बाबा को वसंत के विशेष पीले पुष्प अर्पित किए जाएंगे। केसरिया पीले पकवानों का भोग लगाया जाएगा और आरती होगी।
हर्बल गुलाल और वासंती पोशाक
पूरे दिन होने वाली पांचों आरतियों में परंपरा के अनुसार परिवर्तन दिखेगा। भगवान को विशेष वासंती पोशाक धारण कराई जाएगी। सहायक प्रशासक आशीष फलवाडिय़ा ने बताया कि संध्या आरती में भगवान को हर्बल गुलाल, वसंत के पीले फूल और केसरिया पेड़े का नैवेद्य अर्पित किया जाएगा।
वैष्णव मंदिरों में शुरू होंगे फाग महोत्सव
महाकाल मंदिर के साथ-साथ शहर के पुष्टिमार्गीय वैष्णव मंदिरों में भी वसंत पंचमी की धूम रहेगी। इसी दिन से मंदिरों में 40 दिवसीय फाग महोत्सव की शुरुआत होगी जिसमें होली तक प्रतिदिन विशेष उत्सव और भजनों का आयोजन किया जाएगा।
सांदीपनि आश्रम में पाटी पूजन से होगा विद्या आरंभ संस्कार
भ गवान श्रीकृष्ण की शिक्षा स्थली सांदीपनि आश्रम में शुक्रवार को बसंत पंचमी का पर्व विशेष धार्मिक अनुष्ठानों के साथ मनाया जाएगा। इसी दिन से नन्हे बच्चों की शिक्षा की शुरुआत करने की प्राचीन परंपरा का निर्वहन भी किया जाएगा।
मुख्य पुजारी के अनुसार वसंत पंचमी पर भगवान श्रीकृष्ण का केसरयुक्त जल से अभिषेक किया जाएगा। इसके पश्चात भगवान को विशेष पीले वस्त्र (पीतांबर) धारण कराए जाएंगे। सरसों के पीले फूल और वासंती गुलाल अर्पित कर केसरिया भात का महाभोग लगाया जाएगा।
सांदीपनि आश्रम वह पवित्र स्थान है जहाँ सांदीपनि ऋषि के सान्निध्य में भगवान श्रीकृष्ण ने 64 विद्याएं और 16 कलाएं सीखी थीं।
इसी मान्यता के चलते वसंत पंचमी पर यहाँ बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों को लेकर पहुंचते हैं। पहली बार शिक्षा ग्रहण करने वाले बच्चों का विधि-विधान से पाटी (स्लेट) पूजन कराकर विद्या आरंभ संस्कार संपन्न कराया जाएगा।









