Advertisement

शिप्रा के ऐसे हाल…. प्रदूषित पानी में असंख्य कीड़ों के बीच आचमन और स्नान, मछलियां भी तोड़ रही है दम

अफसर बोले…अभी कान्ह का दूषित पानी बहा रहे हैं

Advertisement

अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:शिप्रा नदी के रामघाट छोटी रपट से टच होकर भरे पानी में असंख्य कीड़े हैं। श्रद्धालु इसी पानी में स्नान, आचमन करने के बाद भगवान का अभिषेक भी कर रहे हैं। पीएचई अफसरों का कहना है कि कान्ह के दूषित पानी को बहा रहे हैं।

यह है रामघाट से छोटे पुल के पानी का हाल

Advertisement

अक्षरविश्व की टीम ने सुबह 9 बजे दत्त अखाड़ा घाट के पास स्थित छोटी रपट से पारदर्शी बाटल में शिप्रा नदी से पानी भरा। इस 200 एमएल की बाटल में मटमैला पानी भराया जिसमें असंख्य कीड़े तैर रहे थे। अक्षर विश्व के पास इस पानी का सेम्पल सुरक्षित है। इसी पानी में अनेक श्रद्धालु स्नान, आचमन, सूर्यदेव को अघ्र्य देकर लौटे में पानी भरने के बाद भगवान का अभिषेक भी कर रहे थे।

प्रदूषित पानी से मछलियों की मौत

Advertisement

रामघाट पर प्रदूषित पानी में श्रद्धालु स्नान, आचमन तो कर रहे है। नदी में मछलियों की जान पर भी बन आई है। गंदे पानी में ऑक्सीजन की कम से प्रतिदिन हजारों की संख्या में मछलियों की जान जा रही है।

नर्मदा का पानी गऊघाट पर स्टोर है

पीएचई कार्यपालन यंत्री एन.के. भास्कर को जब शिप्रा नदी के पानी की जानकारी दी तो उनका कहना था शिप्रा में कान्ह का दूषित पानी मिला है इस कारण दूषित पानी को छोटा पुल स्थित स्टापडेम के गेट खोलकर आगे बहा रहे हैं। नर्मदा के पानी को गऊघाट पर स्टोर किया गया है। नर्मदा का पानी शिप्रा में छोड़ दिया गया है,लेकिन इसे फिलहाल गऊघाट पर स्टोर कर कम मात्रा में शिप्रा में बढ़ाया जा रहा है। ऐसे गऊघाट से लेकर भूखी माता और नृसिंह घाट तक शिप्रा नदी के अलग-अलग हिस्सों का जमा पानी और गंदगी रामघाट तक पहुंच गया है। इसमें असंख्य कीड़े है और श्रद्धालु इसी पानी में स्नान करने के साथ आचमन कर रहे है। यह स्थिति शिप्रा नदी का प्रदूषित पानी पूरी तरह खाली नहीं करने के कारण बनी है। शिप्रा नदी के कई हिस्सों में पुराना प्रदूषित पानी संग्रहित है। दरअसल, गऊघाट स्थित शिप्रा प्लांट पर चैनल में लगे मोटर पंप से पानी का लेवल कम है। इस तकनीकी कमी के कारण पानी लिफ्ट नहीं हो पा रहा और वह रामघाट तक पहुंच नहीं सका है।

ऐसे पानी के आचमन से हो सकते बीमार….

शिप्रा नदी से बाटल में भरे पानी को जिला चिकित्सालय के डॉ. जितेन्द्र शर्मा को दिखाया गया। बाटल देखते ही डॉ. शर्मा का कहना था कि ऐसे पानी से स्नान करने पर व्यक्ति को चर्मरोग हो सकता है और यदि गलती से कोई स्वस्थ व्यक्ति इस पानी को पी ले या आचमन कर ले तो उसे गंभीर बीमारी भी हो सकती है।

Related Articles

📢 पूरी खबर पढ़ने के लिए

बेहतर अनुभव के लिए ऐप का उपयोग करें

ऐप में पढ़ें
ऐप खोलें
ब्राउज़र में जारी रखें