भैरवगढ़ पुलिस को पता नहीं, अक्षत मिल गया

रात 8 बजे मथुरा के बांके बिहारी मंदिर में था
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- पिता के साथ 12 लोगों की टीम ने अपने प्रयास से ढूंढ निकाला
- मैडम का फोन आने के बाद घर छोड़कर चल दिया था
- पिता ने कहा, बाबा महाकाल और कन्हैया की कृपा रहे बेटे पर
- परिवार में खुशियों का आलम, मां की मुराद हुई पूरी
अक्षरविश्व न्यूज|उज्जैन। हर तलबगार को मेहनत का सिला मिलता है, बुत तो क्या चीज है, ढूंढों तो प्रभु मिलता है। इन पंक्तियों को चरितार्थ कर दिया भैरवगढ़ के त्रिलोक चौधरी ने। भैरवगढ़ पुलिस तलाशने का आश्वासन देती रही और 14 दिसंबर से लापता हुआ अक्षत उसके पिता को मथुरा में मिल गया। पुलिस को अभी उसके मिल जाने की भी खबर नहीं है।
कालीदास मांटेसरी स्कूल तेलीवाड़ा की कक्षा 11वीं में पढ़ने वाला 16साल का अक्षत 14दिसंबर को शाम 5 बजे अचानक गायब हो गया। बहुतेरे प्रयास किए गए, लेकिन उसके बारे में कोई जानकारी नहीं मिली। दो दिन खूब तलाशा, 16 दिसंबर को भैरवगढ़ पुलिस को सूचना देकर मामला दर्ज कराया गया। पुलिस ने आश्वासन दिया। इधर अक्षत के पिता त्रिलोक चौधरी अपने स्तर पर तलाश में लगे रहे।
भोपाल में उतर गया था
दो दिन तक जब कहीं पता नहीं चला तब घर में कोहराम मच गया। त्रिलोक ने अपने करीब एक दर्जन दोस्तों की टीम बनाई और खुद ही खोजबीन में लग गए। अक्षत पहले तो उज्जैन में प्लेटफार्म नंबर 5 पर दिखाई दिया। वह इंदौर-बिलासपुर टे्रन में बैठ कर यात्रा करने लगा। इसके बाद वह भोपाल में उतर गया। बड़ी देर तक स्टेशन पर बैठा और सोचता रहा कि अब आगे कहां जाना है। उसके दिमाग में स्कूल की मैडम के वही स्वर गूंज रहे थे। वह भविष्य की उधेड़बुन में लगा रहा, इसी बीच दिल्ली जाने वाली ट्रेन आई और वह उसमें सवार हो गया।
मैडम के फोन ने विचलित कर दिया
त्रिलोक ने बताया कि स्कूल से फोन आया था। बच्चे आपस में उलझ गए। हम लोग गए, बातचीत हुई। मुद्दा का कोई बहुत बड़ा नहीं था। बच्चे हैं, बालपन है झगड़ लेते हैं। हम लोग घर आ गए। मैडम का फोन आया और कहा कि कल से सात दिन के लिए अक्षत को स्कूल न भेजें। उसे निकाल दिया गया है। यह बात अक्षत ने सुन ली। उसे चुभ गई। बस, इसी फोन ने उसे विचलित कर दिया ओर वह घर से निकल गया।
मथुरा रेलवे स्टेशन पर उतरा
अक्षत का अगला पड़ाव मथुरा था। रात उसने प्लेटफार्म पर ही बिताई और सुबह का इंतजार करने लगा। सुबह मथुरा भ्रमण पर निकल गया। कई मंदिरों में दर्शन किए। पैसे की जुगाड़ के लिए काम भी किया। किसी को यह अहसास नहीं होने दिया कि वह घर से भाग कर आया है। किसी ने उस पर शक भी नहीं किया। वह इत्मीनान से मथुरा में घूमता रहा।
इधर, पिता की टीम भी मथुरा में
त्रिलोक ने बताया कि हम लोगों ने हार नहीं मानी। उज्जैन से लेकर मथुरा तक का हमने भी सफर किया। हर स्टेशन पर जाकर सीसीटीवी फुटेज देखे। हर प्लेटफार्म पर खोजबीन की। अपने स्तर पर ही पता चला कि वह मथुरा में ही है। प्लेटफार्म से बाहर जाता हुआ दिखाई दिया था। बस इतनी जानकारी हमारे लिए काफी थी। हमारी टीम ने कल पूरे दिन मथुरा में तलाश की। रात आठ बजे वह बांके बिहारी मंदिर में मिल गया। वह भी आश्चर्यचकित था। उसे समझाया कि जरा सी बात पर इस तरह नाराज नहीं होते।
पुलिस की कहानी: अक्षरविश्व ने भैरवढ़ पुलिस से लापता अक्षत के बारे में जानकारी चाही। वहां से जवाब मिला कि अभी उसका कहीं पता नहीं चला है। बताया गया कि वह मथुरा से मिला है। पुलिस ने कहा कि मिला होगा, लेकिन हमें अभी कोई सूचना नहीं है।










