शवदाह स्थल पर भूरू की दादी का तीसरा कोई और ही कर गया, अब परेशान हो रहा है परिवार

चक्रतीर्थ से पंवासा में रहने वाली महिला का शनिवार को निधन हो गया था, परिवार के लोग तीसरा करने पहुंचे थे
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अक्षरविश्व न्यूज|उज्जैन। चक्रतीर्थ पर कुछ ऐसा भी हुआ। निधन किसी और का हुआ और तीसरा कर्म कोई दूसरा ही कर गया। अब वह परिवार अस्थि संचय और तीसरे कर्म के लिए इधर-उधर भटक रहा है। कहीं से उसे कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा है। यह भी पता नहीं चल रहा है कि तीसरा करने वाला परिवार कौन था?
इस मामले की शुरुआत होती है पंवासा से। यहां रहने वाले भूरू लोधी नामक युवक की दादी श्रीमती जानकी बाई का शनिवार को निधन हो जाता है। परिवार के लोग एकत्रित होते हैं। शवयात्रा निकलती है। चक्रतीर्थ पर अंतिम संस्कार किया जाता है। पंच लकड़ी के बाद शवयात्रा में शामिल होने वाले लोधी समाज के लोग और भूरू के मिलने वाले परिवार को ढांढस बंधाते हैं।
यह सब होने के बाद परिवार के लोग पंवासा आ जाते हैं और मृतक की आत्मिक शांति के लिए सामाजिक रूप से यत्न करते हैं। लोगों को बताया जाता है कि सोमवार को सुबह नौ बजे चक्रतीर्थ पर तीसरे की रस्म होगी। सभी लोग मिल कर रस्म पूरी करने के लिए चक्रतीर्थ पहुंचते हैं। वहां जाकर देखते हैं तो नजारा कुछ और ही होता है। जहां अंतिम संस्कार किया गया था उसके लिए एक परिवार और दावा कर रहा था।
चक्रतीर्थ पहुंच कर चौंक गए
भूरू और उसके परिवार के लोग तीसरे की रस्म पूरी करने के लिए बाजार गए, सामान खरीदा। सभी को जवाबदारी दे गई कि किसको क्या करना है। कारण यह है कि तीसरे की रस्म में बहुत सी क्रियाएं अपनाई जाती हैं। मटकी में चावल का पकाना। कंडे जला कर धूप की व्यवस्था करना। मृतक को जो पसंद हो वही खाद्य पदार्थ का संचय करना इत्यादि। सारी तैयारी करने के बाद जब शवदाह स्थल की ओर बढ़े तो सभी चौंक गए। वहां तीसरा कोई और ही कर गया था। स्थल पर पूजा-पाठ का सामान रखा था। अस्थियों का नामों-निशान नहीं था। सभी ने चर्चा की। सभी इसी बात पर एकमत थे कि इसी स्थान पर अंतिम संस्कार किया गया था। फिर यहां कौन आया? तीसरे की रस्म किसने की? बड़ी देर तक इसी मुद्दे पर बात होती रही। भूरू परेशान था। उसे दादी की अस्थियों की चिंता थी।
संतोषजनक जवाब नहीं मिला
परेशान भूरू अपने साथ आए लोगों को लेकर उस काउंटर पर गया जहां से अंतिम संस्कार के लिए कंडे लकड़ियां मिलती हैं और रसीद कटती है। सभी लोगों ने कहा कि उन्होंने उसी स्थान पर अंतिम संस्कार किया था जहां पूजा का सामान पड़ा है। काउंटर पर बैठे कर्मचारी ने असमर्थता जताई। उसका कहना था कि इस मामले में हम कुछ नहीं कर सकते। यह पता लगाना मुश्किल है कि उस स्थान पर तीसरे की रस्म किसने पूरी की। कर्मचारी ने अध्यक्ष अशोक प्रजापत का नंबर दिया।
एक विवाद और होते-होते बचा
जिस स्थान पर भूरू की दादी का अंतिम संस्कार हुआ उसका निपटारा अभी हुआ भी नहीं था कि एक और परिवार इसी स्थान को लेकर अपना दावा करने लगा। यह सोनी परिवार था। उसे भी गफलत हुई कि उनके परिजन का अंतिम संस्कार इसी स्थान पर हुआ। इसी बीच परिवार के लोगों ने अपनी याददाश्त पर जोर दिया और मामले का हल निकल आया। पता चला कि वह स्थान दूसरा था। इस तरह यह दूसरा मामला निपट गया।
नंबर नहीं होने से होती है गफलत
चक्रतीर्थ पर शवदाह के लिए जो स्थान बने हैं उनको लेकर हमेशा गफलत होती है। कारण यह है कि किसी पर नंबर नहीं हैं। शवयात्रा में आए लोगों का कहना था कि इन स्थानों पर यदि नंबर हों तो किसी प्रकार की गफलत पैदा नहीं होगी। कई स्थल तो टूट गए हैं, इन्हेें मरम्मत की जरूरत है।
यहां से निराशा ही हाथ लगी
भूरू ने अक्षर विश्व को बताया कि उसने अशोक प्रजापत के नंबर पर फोन लगाया। उस समय वे शायद किसी ओर मोबाइल से बात कर रहे थे। यह फोन उनके बेटे रवि ने उठाया। पूरी बात सुनने के बाद रवि ने कहा कि इसमें अध्यक्ष भी कुछ नहीं कर सकते। यह मामला पेचीदा है। भूरू का कहना था कि उसे दादी का तीसरा करना है। हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार तीसरा कर्म जरूरी होता है। अस्थी संचय करना है अब वह क्या करे? इतनी बातें होने के बाद भी उसे कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला।









