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गजल… कांच के घर है
हाथों में जिन- जिनके आज पत्थर है सोच ले सौ बार उनके कांच के घर है सांप का काटा तो…
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गजल… दुनियादारी से जुदा
कर ना पाये कुछ हम दुनियादारी से जुदा आसां कब था होना दुनिया सारी से जुदा पग पग पर समझौते…
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गजल… दुनियादारी से जुदा
कर ना पाये कुछ हम दुनियादारी से जुदा आसां कब था होना दुनिया सारी से जुदा पग पग पर समझौते…
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लघुकथा :मोल-भाव
‘आम कैसे दिए?’घर के बाहर बैठी आम वाली से मैंने पूछा पूछा। ’60 रुपये किलो।’उसने बताया। 60 रुपये देकर 1…
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लघुकथा :मोल-भाव
‘आम कैसे दिए?’घर के बाहर बैठी आम वाली से मैंने पूछा पूछा। ’60 रुपये किलो।’उसने बताया। 60 रुपये देकर 1…
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कविता :लॉकडाउन आभार तुम्हारा
लॉकडाउन, शुक्रिया तुम्हारा संवार दिया बचपन हमारा। कुछ नया सीखने की इच्छा क्षमता दिलाई तुमने सच कहती हूँ, बहुत कुछ…
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कविता :लॉकडाउन आभार तुम्हारा
लॉकडाउन, शुक्रिया तुम्हारा संवार दिया बचपन हमारा। कुछ नया सीखने की इच्छा क्षमता दिलाई तुमने सच कहती हूँ, बहुत कुछ…
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व्यंग्य :गाड़ी बुला रही है…
गाड़ी बुला रही है, सीटी बजा रही है गाने की ये पंक्तियां सुनकर ही मन इतना प्रफुल्लित हो जाता था…
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व्यंग्य :गाड़ी बुला रही है…
गाड़ी बुला रही है, सीटी बजा रही है गाने की ये पंक्तियां सुनकर ही मन इतना प्रफुल्लित हो जाता था…
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चर्चा:विदेशों में फहराया डॉ शर्मा ने हिंदी का परचम
समालोचक, निबंधकार और लोक संस्कृतिविद् डॉ. शैलेंद्रकुमार शर्मा का जन्म भारत के प्रमुख सांस्कृतिक नगर उज्जैन में हुआ। उन्होंने उच्च…