5 खूबियों वाले पेरेंट्स से बच्चे करते हैं बेशुमार प्यार रिश्ता बन जाता है अटूट

यूं तो हर बच्चा अपने माता-पिता से बेइंतहा प्यार करता है, लेकिन कई बार पेरेंट्स की कुछ आदतें ऐसी होती हैं, जो अनजाने में बच्चों का दिल तोड़ देती हैं। इसका असर पेरेंट्स और बच्चों के रिश्ते पर पड़ता है और धीरे-धीरे मनमुटाव बढऩे लगता है। समय के साथ ये दूरियां इतनी गहरी हो जाती हैं कि रिश्ता कमजोर पड़ जाता है। कई मामलों में तो यह दूरी ताउम्र बनी रहती है।
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बच्चे की पूरी बात सुनते-समझते हैं
पैरेंट्स की खूबियों की बात करें तो ऐसे माता-पिता कभी भी बच्चे की पूरी बात सुने बिना प्रतिक्रिया नहीं देते। वे पहले बच्चे की बात ध्यान से सुनते हैं, उसे समझते हैं और उसके बाद ही अपना रिएक्शन देते हैं। वे तुरंत कोई फैसला नहीं सुनाते। अक्सर देखा जाता है कि कई पैरेंट्स बिना पूरी बात जाने ही बच्चे को डांटना शुरू कर देते हैं और उसे कसूरवार ठहरा देते हैं। यह तरीका बच्चों के मन को गहरी ठेस पहुंचाता है।
पैरेंट्स बच्चें को समझते हैं
इसके उलट, जब माता-पिता बिना जज किए बच्चे की बात सुनते हैं, तो बच्चे को यह एहसास होता है कि उसके माता-पिता उसे समझते हैं और उसकी भावनाओं की कद्र करते हैं। यही समझ बच्चों और पैरेंट्स के रिश्ते को और मजबूत बनाती है।
बच्चे की मेहनत देखते हैं, नतीजा नहीं
ऐसे पैरेंट्स की एक खास खूबी यह भी होती है कि वे बच्चे की कोशिश और मेहनत की सराहना करते हैं, न कि उसकी असफलता में कमियां ढूंढते हैं। वे बच्चे के नतीजे के पीछे बच्चे की लगन और मेहनत को देखते हैं। ऐसे माता-पिता से बच्चे बेहद प्यार करते हैं। दरअसल, कई बार ऐसा होता है, जब कई माता-पिता सिर्फ रिजल्ट पर ध्यान देते हैं और बच्चे की मेहनत को नजरअंदाज कर देते हैं। इससे बच्चे के मन में यह भावना घर कर जाती है कि उसकी कोशिशों की कोई कीमत नहीं है।
फिजिकल हेल्थ के साथ मेंटल हेल्थ को भी समझते हैं
ऐसे पैरेंट्स बच्चों की फिजिकल हेल्थ के साथ-साथ उनकी मेंटल हेल्थ को भी उतनी ही अहमियत देते हैं। वे बच्चे के इमोशनल ब्रेकडाउन को समझने की कोशिश करते हैं। अगर बच्चा अच्छा महसूस नहीं कर रहा हो या उदास है, तो वे उसे चुप कराने के बजाय उसके फीलिंग्स के पीछे की वजह जानने की कोशिश करते हैं। पैरेंट्स की इस अप्रोच से बच्चे अपनी बात खुलकर रख पाते हैं और फिर यही प्यार और अपनापन धीरे-धीरे दोनों के बीच के रिश्ते को गहरा बनाता है, जो कि ताउम्र चलता है।
पैरेंट्स खुद पेश करते हैं रोल मॉडल
अंत में, सबसे अहम यह है कि बच्चों के सामने माता-पिता खुद एक रोल मॉडल के रूप में मौजूद होते हैं। बच्चे हमेशा अपने पैरेंट्स को देखकर ही सीखते हैं, इसलिए माता-पिता का व्यवहार और आदतें उनके लिए उदाहरण बन जाती हैं। पैरेंट्स यह दिखाते हैं कि कैसे शांत, ईमानदार और मेहनती बना जाता है। यही उदाहरण बच्चों के व्यवहार को आकार देता है और उन्हें बेहतर इंसान बनने की प्रेरणा देता है। साथ ही, खुद बच् चे भी उनकी क्वालिटी को पसंद करते हैं और उनके जैसा बनने की कोशिश करते हैं।









