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नर्मदा पाइप लाइन को गऊघाट जल यंत्रालय से जोडऩे पर होगा जलसंकट का समाधान….

अमृत 2.0 में योजना शामिल, नगर निगम की मद से काम शुरू कराने पर हो रहा विचार

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:शहर में हर वर्ष पेयजल संकट की समस्या सामने आ रही है। पीएचई के पास उपलब्ध पेयजल के स्त्रोत शहर के क्षेत्रफल और आबादी के मान से कम पडऩे लगे हैं। संकट के समय नर्मदा का पानी लेने का विकल्प है लेकिन कान्ह का दूषित पानी इसमें अड़ंगा डालता है। ऐसे में अब नगर निगम व पीएचई विभाग द्वारा नर्मदा की पाइप लाइन को सीधे गऊघाट जलयंत्रालय से जोडऩे की योजना बना चुके हैं। योजना अमृत 2.0 में शामिल है लेकिन इसमें राशि आवंटित नहीं हुई। नगर निगम आयुक्त का कहना है कि दूसरी मद से राशि लेकर काम शुरू कराया जावे।

 

इसलिये गऊघाट तक ले जा रहे नर्मदा का पानी…

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शासन द्वारा शिप्रा नदी में नर्मदा का पानी पहुंचाने के अनेक प्रयास किए गए जिसमें देवास में पाइप लाइन से सीधे शिप्रा नदी में पानी बहाया गया। दूसरा प्रयास पाइप लाइन का था। पाइप लाइन को हरियाखेड़ी तक लाकर नागफनी के माध्यम से शिप्रा नदी में पानी छोड़ा गया। यहां भी गड़बड़ हुई तो पाइप लाइन को हरियाखेड़ी से बढ़ाकर त्रिवेणी स्टॉपडेम के आगे लाकर पानी छोड़ा गया, लेकिन कान्ह के दूषित पानी को रोकने के ठोस उपाय नहीं हो पाये। कान्ह डायवर्शन योजना फैल होने के कारण हर बार कान्ह पर बना मिट्टी का स्टॉपडेम बह जाता है और दूषित पानी शिप्रा नदी में मिलकर साफ पानी को भी दूषित कर देता है। इसी कारण अब नगर निगम व पीएचई द्वारा त्रिवेणी से वन विभाग की रोपणी से होते हुए नदी किनारे गऊघाट जलयंत्रालय तक नर्मदा के पानी को पाइप लाइन से ले जाने की योजना पर काम किया जा रहा है।

यह हैं शहर में पेयजल के स्त्रोत

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शहर में पेयजल सप्लाय के लिये पीएचई के पास गंभीर डेम सबसे बड़ा स्त्रोत है जिसकी क्षमता 2250 एमसीएफटी पानी स्टोर करने की है। सन 1992 में बने इस डेम से पूरे शहर में जलप्रदाय होता है। इसके अलावा उण्डासा तालाब, साहेबखेड़ी तालाब और शिप्रा नदी से भी पेयजल सप्लाय के लिये पानी लिया जाता है। वर्तमान में उण्डासा तालाब सूखा है, शिप्रा नदी में कान्ह का दूषित पानी मिल चुका है इस कारण पेयजल उपयोग के लिये शिप्रा का पानी नहीं ले सकते। शेष रहे गंभीर और उण्डासा तालाब के पानी को पेयजल सप्लाय के उपयोग में ले रहे हैं। गर्मी में साहेबखेड़ी तालाब भी साथ छोड़ देगा तो पूरी निर्भरता गंभीर डेम पर रह जायेगी।

योजना पूरी होने पर यह होगा फायदा

गऊघाट जलयंत्रालय में 81 एमएलडी पानी फिल्टर करने की क्षमता है। पूरे शहर में प्रतिदिन 135 एमएलडी पेयजल सप्लाय के लिये पानी की आवश्यकता होती है। नर्मदा का पानी यहां लाकर पेयजल सप्लाय में उपयोग किया जाए तो एक दिन छोड़कर पूरे शहर में जलप्रदाय किया जा सकता है वहीं दूसरी ओर गंभीर का पानी भी विभाग के पास विपरीत परिस्थिति के लिये स्टोर में रहेगा। खास बात यह कि शिप्रा नदी में मिलने वाले कान्ह के दूषित पानी की समस्या का जलप्रदाय पर असर नहीं होगा।

इसलिये ले रहे दूसरी मद से रुपये

त्रिवेणी से गऊघाट जलयंत्रालय तक नर्मदा का पानी पाइप लाइन से ले जाने की योजना नगर निगम की अमृत 2.0 योजना में शामिल है लेकिन शासन द्वारा अभी इसके लिये लगने वाली लगभग 8 करोड़ से अधिक राशि आवंटित नहीं की है, जबकि शहर में आने वाले पेयजल संकट की स्थिति को मद्देनजर रखते हुए अब आयुक्त द्वारा पीएचई अफसरों को नगर निगम की किसी ओर मद से लेकर काम शुरू करने के निर्देश दिये गये हैं।

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