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वरिष्ठ जर्नलिस्ट सुरेश मेहरोत्रा के घर अचानक पहुंचे सीएम डॉ. मोहन यादव

कुशलक्षेम पूछी, उज्जैन में चल रहे निर्माण कार्यों की जानकारी दी

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। भोपाल में निवासरत वरिष्ठ पत्रकार डॉ. सुरेश मेहरोत्रा उस वक्त दंग रह गए, जब उनके निवास पर अचानक सीएम डॉ. मोहन यादव भेंट करने पहुंच गए। करीब 45 मिनट तक दोनों के बीच उज्जैन और प्रदेश को लेकर चर्चा हुई।

दरअसल 81 वर्षीय मेहरोत्रा स्वास्थ्य कारणों से अधिकांश समय अपने निवास पर व्यतीत करते हैं। निवास से संचालित ऑफिस से ही कार्य करते हैं। डॉ. मेहरोत्रा को गुरु मानने वाले डॉ यादव उनकी कुशलक्षेम जानने पहुंचे थे। पद, प्रोटोकॉल और व्यस्तता से ज्यादा रिश्तों और मानवीय मूल्यों को महत्व देने वाले सीएम डॉ. मोहन यादव के इस प्रसंग पर वरिष्ठ पत्रकार आलोक मेहता ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने एक्स पर सीएम के लिए लिखा कि आपने मध्यप्रदेश ही नहीं भारत में पत्रकारिता के लिए महत्वपूर्ण अध्याय जोडऩे वाले संपादक से मिलकर पुण्य का काम किया है। वर्तमान दौर में ऐसे ईमानदार और अपने काम के बल पर प्रभाव बनाने वाले संपादक मिलना मुश्किल है। उनका आशीर्वाद आपका भी सम्मान है। नमन। सीएम का यह कदम यह दर्शाता है कि सत्ता की ऊंचाई पर पहुंचकर भी विनम्रता नहीं छोडऩी चाहिए।

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मेहरोत्रा ने अक्षरविश्व को बताया कि सीएम करीब 45 मिनट उनकी फैमिली के साथ रहे। उनसे मेरा संपर्क शिक्षक होने के नाते रहा। वह माधव साइंस कॉलेज में पढ़ते थे और मैं माधव कॉलेज में पढ़ाता था। इस वजह से मिलना-जुलना लगा रहता था। उनकी सादगी कमाल की है। उन्होंने वैसा ही सम्मान दिया, जैसा पहले देते थे। उज्जैन के डेवलपमेंट पर खूब चर्चा हुई। सीएम ने बताया कि सिंहस्थ-2028 के पहले तक उज्जैन काफी बदल चुका होगा। इस दौरान होने वाले निर्माण कार्य उज्जैन को नया शहर बना देंगे।

उज्जैन के रहने वाले हैं डॉ. मेहरोत्रा

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डॉ मेहरोत्रा लोकप्रिय वेबसाइट व्हिसपर्स इन द कॉरिडोर के संस्थापक हैं। वह मूलत: उज्जैन के रहने वाले हैं और माधव कॉलेज में प्रोफेसर रह चुके हैं। देश के कई प्रतिष्ठित न्यूजपेपर में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाने वाले डॉ. मेहरोत्रा की ब्यूरोक्रेसी में दमदार पकड़ है। फिलहाल भोपाल में निवासरत डॉ. मेहरोत्रा के सूत्र गहरे और आंकलन एकदम सटीक होता है। गंभीर और दमदार लेखन के लिए उन्हें प्रशासनिक महकमे में पहचाना जाता है। जर्नलिस्ट के कल्याण के लिए भी वह सक्रिय हैं और हर साल पत्रकार कल्याण कोष में 5 लाख रुपए का योगदान देते हैं। खबरों के भागमभाग भरे दौर में जब विश्वनीयता का संकट खड़ा है, ऐसे दौर में उनकी खबरें भरोसे की पहचान बन चुकी हैं।

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