उज्जैन : राहगीरी में सीएम ने गदा लहराई, बैलगाड़ी पर हुए सवार

उज्जैन। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव रविवार को उज्जैन में राहगीरी उत्सव में शामिल हुए। कृषक कल्याण वर्ष में उन्होंने बैलगाड़ी से राहगीरी में एंट्री ली। उन्होंने गदा भी लहराई। करीब एक किलोमीटर तक वह पैदल चले और लोगों का अभिवादन किया। उन्होंने आम लोगों ने स्वास्थ्य, फिटनेस और सामाजिक गतिविधियों में बढ़-चढक़र हिस्सा लिया।
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राहगीरी में बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों के लिए कई तरह की गतिविधियां रखी गई थीं। इसमें पारंपरिक खेल, योग, नृत्य, संगीत और मनोरंजन के कार्यक्रम हुए। लोग अपने परिवार के साथ बड़ी संख्या में कोठी पैलेस रोड पहुंचे। करीब ७० हजार से अधिक लोगों ने कोहरे से भरी सुबह में राहगीरी का आनंद लिया। कोठी रोड पर राहगीरी के कारण मेला सा लगा रहा। लोग सुबह से ही यहां पहुंचने लगे थे। .
बैलगाड़ी पर सवार होकर आए सीएम ने बजाया शंख-गदा घुमाई
बच्चों के साथ बच्चे बने बड़ों ने जी लिया बचपन
उज्जैन। रविवार को राहगीरी में कोठी रोड शहरवासियों की चहलकदमी से गुलजार हो गया। सर्द सुबह में गर्म कपड़ों में लिपटे शहरवासी बच्चों के साथ बच्चे बनने के लिए राहगीरी में पहुंचे। उन्होंने ना सिर्फ खेलों का मजा लिया बल्कि डांस कर बचपन को फिर से जी लिया। बच्चों के साथ युवा भी बॉलीवुड गीतों और जुम्बा की धुनों पर जमकर थिरके। इधर, देशभक्ति गीत जब बजे तो क्राउड का जोश हाई हो गया, उन्होंने भी भारत माता की जय के नारे लगाए।
क्या बच्चे, क्या बड़े और क्या जवान सभी ने संडे को फन डे बना दिया। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी इसमें शामिल होकर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। उन्होंने न केवल जनता का उत्साह बढ़ाया बल्कि विभिन्न गतिविधियों से फिटनेस और अपनी संस्कृति से जुड़ाव का संदेश भी दिया। वे बैलगाड़ी पर सवार होकर कार्यक्रम में आए। पब्लिक भी सीएम को अपने बीच पाकर उत्साहित थी। सीएम ने शंख बजाया तो कुश्ती संघ के मंच से गदा भी घुमाई। उन्होंने लोगों को संदेश दिया कि 2028 का सिंहस्थ दुनिया को भारतीय संस्कृति का वैभव दिखाएगा। इस दौरान उन्होंने हाथ हिलाकर जनता का अभिवादन भी किया।
बैलगाड़ी की सवारी और एक पौधा मां के नाम
अपनी माटी से जुड़ाव दर्शाते हुए मुख्यमंत्री बैलगाड़ी पर सवार हुए। इस दौरान स्वच्छता और पर्यावरण का संदेश देते हुए उन्हें एक पौधा मां के नाम अभियान के तहत पौधा भेंट किया गया। कार्यक्रम के दौरान बीच सडक़ पर युवाओं ने गरबा किया, तो कहीं पारंपरिक खेलों और योग की धूम रही। एक युवक ग्रीन कपड़े पहने और मास्क लगाए पर्यावरण का संदेश देता नजर आया।
देसी खेल और व्यंजनों की जुगलबंदी
पुराने खेल- अंटी (कंचे), रस्सीकूद, बोरा दौड़ और सितोलिया जैसे खेलों ने बड़ों को बचपन की याद दिला दी।
सांस्कृतिक प्रदर्शन- गरबा, मालवी व हरियाणवी नृत्य के साथ मलखंभ और अखाड़ों के प्रदर्शन ने लोगों को रोमांचित किया। युवाओं ने सडक़ पर गरबा किया।
नि:शुल्क खान-पान- कृषि विभाग ने मोटे अनाज (मिलेट्स) से बने हलवा, लड्डू और खिचड़ी का वितरण किया। प्रेस क्लब की ओर से गरमा-गरम दूध-जलेबी का लुत्फ जनता ने उठाया। पोहा, ज्यूस और सूप के स्टॉल कई संस्थाओं ने लगाई थी।
योग-व्यायाम – आयुर्वेद कॉलेज की ओर से योग का प्रदर्शन किया गया। सम्राट विक्रमादित्य के विद्यार्थियों ने पौष्टिक खाद्य पदार्थों की स्टॉल लगाई। विभिन्न संस्थाओं ने नृत्य, संगीत के मंच सजाए थे। व्यायाम से जोडऩे के लिए नृत्य, लोक नृत्य और साइकिल अपनाने के लिए लोगों को जागरुक किया गया। छोटे बच्चों ने लाठी घूमाकर अपनी कला का प्रदर्शन किया।









