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यूपी की तर्ज पर नेमप्लेट फार्मूले को लेकर उज्जैन में शीतयुद्ध भड़का

नगर सरकार और निगम प्रशासन आमने सामने

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पेनल्टी की जाहिर सूचना आई सामने, आयुक्त अपने फैसले पर डटे

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भाजपा संगठन और आरएसएस के पास भी पहुंची निगम द्वारा प्रकाशित जाहिर सूचना

अक्षरविश्व प्रतिनिधि. उज्जैन यूपी की तर्ज पर महाकाल नगरी उज्जैन में होटलों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों पर संचालक और मालिक की नेमप्लेट लगाने के मामले को लेकर नगर सरकार और निगम प्रशासन में शीतयुद्ध गहरा गया है। महापौर मुकेश टटवाल ने कहा निगम प्रशासन द्वारा 5 हजार रुपए का जुर्माना करने के आदेश को निगम प्रशासन ने दो टूक ठुकरा दिया है। अब निगम प्रशासन द्वारा इस सिलसिले में जारी जाहिर सूचना सामने आई है। महापौर ने सवाल उठाया है कि यह आदेश तो निगम ने ही जारी किया था। इसका पालन होना है।

उत्तर प्रदेश से पहले एमपी में होटलों पर संचालकों और मालिकों के नाम लिखने का मामला दो साल पहले सुर्खियों में आ चुका है। मामले में तत्कालीन अपर आयुक्त ने अखबारों में बकायदा इश्तहार देकर इसकी सूचना सार्वजनिक की थी। अब यूपी में योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा होटलों और दुकानों पर संचालकों के नाम लिखना अनिवार्य करने के बाद उज्जैन में मामले ने नया मोड़ ले लिया है।

नगर निगम आयुक्त का कहना है कि निगम प्रशासन की ओर से इस मामले में कोई आदेश जारी नहीं किया। जबकि महापौर और एमआईसी सदस्य ठहराव प्रस्ताव सहित प्रकाशित उस विज्ञप्ति का हवाला दे रहे हैं, जिसमें जुर्माने का प्रावधान किया था। सूत्रों के अनुसार यह मामला राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और भाजपा में भी तूल पकड़ रहा है। जाहिर सूचना की प्रतियां आरएसएसएस पदाधिकारियों तक पहुंच गई है। भाजपा संगठन भी इसको लेकर मंथन कर रहा है, क्योंकि यह मामला अभी और नए मोड़ ले सकता है।

दो साल पहले यह दी थी जाहिर सूचना

    • 11 दिसंबर 2022 को निगम की ओर से एक जाहिर सूचना प्रकाशित की गई थी

    • इसमें एमआईसी के ठहराव प्रस्ताव क्रमांक 26 सितंबर 22 का हवाला दिया गया है।

    • तत्कालीन अपर आयुक्त के नाम से इसका प्रकाशन हुआ था।

    • इसमें कहा गया था कि सभी होटल, रेस्टोरेंट और लाज की नेमप्लेट हिंदी में होना अनिवार्य है।

    • नेमप्लेट ऐसी हो कि वह दूर से दिखाई दे और आसानी से पढ़ी जा सके।

    • ग्लोसाइन बोर्ड हो तो अक्षर लाल रंग के होना अनिवार्य किया था।

    • संस्थान के संस्थापक, संचालक का नाम और मोबाइल नंबर रजिस्ट्रेशन नंबर के साथ होना अनिवार्य करने का निर्देश था।

    • समयावधि में इसका पालन न होने और दिशा निर्देशों का उल्लंघन होने पर पहली बार 2 हजार और दूसरी बार 5 हजार रुपए का जुर्माना करने की सूचना दी गई थी। यह हुआ था ठहराव

    • 2 अप्रैल 22 को मुख्यमंत्री ने गुड़ी पड़वा पर रामघाट पर आयोजित विक्रमोत्सव में नेमप्लेट की घोषणा की थी।

    • इस मामले में निगम की ओर से 2 मई 22 को पत्र लिखा गया था।

    • एमआईसी ने 3 नवंबर 22 को महापौर मुकेश टटवाल की अध्यक्षता में ठहराव प्रस्ताव किया था।
सीएम की घोषणा पर निर्णय होटल, रेस्टोरेंट और लाज पर साइन बोर्ड पर नाम लिखे जाने की घोषणा तत्कालीन मुख्यमंत्री ने की थी। इसी के आधार पर हमने ठहराव पास किया था। तब वर्तमान आयुक्त पाठक अपर आयुक्त थे। उनके भी संज्ञान में यह निर्णय होना चाहिए। – मुकेश टटवाल, महापौर कोई आदेश नहीं निगम ने जुर्माने का कोई आदेश जारी नहीं किया है। इसका हम खंडन कर चुके हैं। – आशीष पाठक, निगम आयुक्त

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