अक्षरविश्व की खबर के बाद आयुक्त अमले के साथ पहुंचे शिप्रा का पानी देखने

अधीनस्थों से बोले- यह क्या हालत बना रखी है
अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:शिप्रा नदी के रामघाट से छोटे पुल तक सभी घाटों पर पानी इतना दूषित और कीड़े युक्त हो चुका है कि इसमें स्नान, आचमन से श्रद्धालुओं को बीमारियां हो सकती हैं। इस आशय का समाचार अक्षर विश्व द्वारा प्रमुखता से प्रकाशित करने के बाद निगम के अफसर सुबह नदी का पानी चेक करने नगर निगम कमिश्नर अपनी टीम के साथ यहां पहुंचे नदी से पारदर्शी बाटल में पानी भरा और देखा जिसमें कीड़े थे। उन्होंने अधीनस्थों को तुरंत पानी बदलने के निर्देश दिये।
शिप्रा नदी में कान्ह का दूषित पानी मिलना सबसे बड़ी समस्या है। इसका स्थायी समाधान अब तक अफसर निकाल नहीं पाये हैं। पीएचई और जल संसाधन विभाग के अफसर आये दिन नये-नये प्रयोग कर शिप्रा नदी में नर्मदा का साफ पानी स्टोर करने की बातें तो कहते हैं, लेकिन ऐसे भागीरथी प्रयास को जमीन पर उतरने में अफसरों के दावे उस समय खोखले नजर आते हैं।
जब जलीय जीव ऑक्सीजन के अभाव में दूषित पानी में दम तोड़ देते हैं और कीड़े युक्त पानी में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु स्नान, आचमन और पूजन करते नजर आते हैं। अक्षरविश्व की टीम ने दत्त अखाड़ा छोटी रपट से शिप्रा नदी में स्टोर पानी का पारदर्शी बाटल में सेम्पल लिया। इस बाटल में पानी के साथ असंख्य कीड़े बिलबिलाते दिखे। पानी की गुणवत्ता की सच्चाई को प्रमुखता से प्रकाशित किया जिसका परिणाम यह रहा कि शुक्रवार सुबह नगर निगम कमिश्नर आशीष पाठक अन्य अफसरों के साथ स्वयं पानी चेक करने रामघाट पहुंच गये।
बाटल और लौटे में पानी लेकर देखे कीड़े
जिस प्रकार गुरूवार को अक्षर विश्व की टीम ने रामघाट छोटी रपट के पास से शिप्रा नदी का पानी पारदर्शी बाटल में भरकर चैक किया था आज ठीक उसे प्रकार नगर निगम कमिश्नर आशीष पाठक ने उसी स्थान पर पहुंचकर पारदर्शी बाटल में पानी भरवाया और बाटल हाथ में लेकर पानी चैक किया जिसमें कीड़े दिखे। उन्होंने तत्काल स्वास्थ्य विभाग के उपायुक्त सहित अन्य अफसरों से दूषित पानी के बारे में सवाल जवाब किये और निर्देश दिये कि दूषित पानी को तत्काल आगे बहाकर नर्मदा का साफ पानी स्टोर किया जाये।
लापरवाह पर कार्रवाई का अधिकार नहीं
उपायुक्त संजेश गुप्ता, सहायक स्वास्थ्य अधिकारी कुलश्रेष्ठ, नदी के घाटों की सफाई व्यवस्था की जिम्मेदारी संभालने वाले भाटी सहित अन्य लोगों ने सुबह शिप्रा नदी के पानी की क्वालिटी चेक की। उपायुक्त गुप्ता को एक कर्मचारी ने लौटे में नदी का पानी भरकर दिया। पानी में तैरते असंख्य कीड़ों को देखकर उपायुक्त गुप्ता भी सकते में आ गये। उन्होंने नदी में नहा रहे सैकड़ों लोगों की ओर देखा और बोले मां शिप्रा माफ करना।
इतने दूषित पानी में श्रद्धालुओं को स्नान करना पड़ रहा है। उन्होंने यहीं से अफसरों को फोन पर दूषित पानी की जानकारी दी। इस दौरान घाट के पंडे भी यहां एकत्रित हो गये। पं. आनंद गुरू लौटावाला, पं. राजेश गुरू ने उपायुक्त को बताया कि पानी इतना दूषित है कि मछलियां मर रही हैं। ऐसे पानी में स्नान, आचमन लोगों की सेहत के लिये हानिकारक है। या तो पानी बदला जाये या फिर जो पानी स्टोर है उसे केमिकल से फिल्टर किया जाये। इसके जवाब में उपायुक्त गुप्ता ने कहा कि मेरे पास सीमित पॉवर हैं उसी के अनुसार काम कर सकते हैं। दूषित पानी को आगे बहाने और साफ पानी स्टोर करने की जिम्मेदारी पीएचई अफसरों की है।









