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युवा उत्सव के दूसरे दिन कला, सुर और संवाद का संगम

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के प्रांगण में आयोजित तीन दिवसीय राज्य स्तरीय युवा उत्सव अभ्युदय का दूसरा दिन शैक्षणिक, सांस्कृतिक और बौद्धिक गतिविधियों के नाम रहा। मध्य प्रदेश के 15 विश्वविद्यालयों से आए विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मक ऊर्जा और कलात्मक कौशल से माहौल को जीवंत कर दिया।

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शुक्रवार को रंगोली के रंगों में भारतीय आस्था के दर्शन हुए, तो रंगमंच पर सामाजिक विसंगतियों की मार्मिक गाथाएं जीवंत हो उठीं। कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज और कुलसचिव डॉ. अनिल शर्मा ने विभिन्न आयोजन स्थलों का निरीक्षण कर विद्यार्थियों का उत्साहवर्धन किया। संकायाध्यक्ष प्रो. एस.के. मिश्रा ने कहा कि इन प्रतियोगिताओं का उद्देश्य युवाओं को उनकी गौरवशाली विरासत से जोडऩा है। विक्रमादित्य शोध पीठ में आयोजित रंगोली प्रतियोगिता का विषय भारतीय ज्ञान परंपरा और संस्कृति रहा। महज ढाई घंटे में कलाकारों ने फर्श पर आस्था का संसार रच दिया।

राजा मानसिंह तोमर विश्वविद्यालय के प्रशांत कुशवाह ने बाबा महाकाल के भस्म आरती श्रृंगार को पोर्टेट शैली में उकेरा, तो छिंदवाड़ा की ऋषिका पाठक ने शिव के तांडव स्वरूप से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पल्लवी शर्मा (इंदौर) की माँ काली और बरकतउल्ला विश्वविद्यालय की नंदी आधारित रंगोली ने शक्ति और समर्पण का संदेश दिया। इस कलात्मक प्रदर्शन ने सिद्ध किया कि रंग केवल सजावट नहीं, बल्कि भावनाओं की अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम हैं।

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मुक्ताकाशी मंच पर गूंजी गजलों की नजाकत
एकल सुगम गायन प्रतियोगिता में शास्त्रीय अनुशासन और आधुनिक भावों का सुंदर समन्वय दिखा।
महाराजा छत्रसाल विवि की अर्जु खानम ने गजल मैं तो हवा हूँ से सबको चकित किया, वहीं इंदौर की मान माते ने मराठी नाट्य संगीत के माध्यम से महाराष्ट्र की रंगमंचीय परंपरा को प्रस्तुत किया।

रंगमंच पर सामाजिक क्रांति का शंखनाद

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स्वर्ण जयंती सभागार में आयोजित एकांकी नाटक प्रतियोगिता दिन का मुख्य आकर्षण रही। रानी दुर्गावती विवि के विद्यार्थियों ने वीरांगना नाटक के जरिए महाभारत को रानियों की पीड़ा के दृष्टिकोण से दिखाया। रीवा विवि के विद्यार्थियों ने महारथी के माध्यम से जातिवाद पर प्रहार किया। भ्रष्टाचार पर सैयां भए कोतवाल और पलायन पर बिदेसिया नाटक ने वैचारिक क्रांति का संदेश दिया।

मिमिक्री से आवाजों का जादू और कटाक्ष
शलाका दीर्घा में मिमिक्री और स्वांग प्रतियोगिता आयोजित हुई। मंदाकिनी शर्मा ने बीट-बॉक्सिंग से मंगलनाथ दर्शन का वृत्तांत सुनाया, वहीं रीवा के अजय कुमार पांडेय ने राजनेताओं के अंदाज में व्यवस्था पर चुटीला कटाक्ष किया। त्रिलोक सिंह के चाय की दुकान पर फिल्मी सितारे एक्ट ने दर्शकों को लोटपोट कर दिया।

युवा प्रतिभाओं ने बिखेरी वैचारिक चमक

रॉक एंड रोल की धुनों पर झूमा एसओईटी सभागार
स्वामी विवेकानंद अभियांत्रिकी संस्थान में पाश्चात्य समूह गान प्रतियोगिता ने धूम मचा दी। विद्यार्थियों ने केटी पेरी के प्रसिद्ध गीत रोर पर अपनी दमदार प्रस्तुति दी। एक दल ने किंग ऑफ रॉक एंड रोल एल्विस प्रेस्ले के गीतों का मेडले पेश किया, जिसमें गीत पर दर्शकों ने खूब तालियां बटोरीं।

सुर, ताल और समन्वय का उत्कृष्ट प्रदर्शन
प्रतियोगिता के दौरान 15 विश्वविद्यालयों के दलों ने भाग लिया। निर्णायकों ने सुरों की शुद्धता, उच्चारण, वाद्ययंत्रों के साथ तालमेल और मंच प्रस्तुति के आधार पर मूल्यांकन किया। पाश्चात्य संगीत की बारीकियों जैसे हारमनी और रिदम पर विद्यार्थियों की पकड़ काबिल-ए-तारीफ रही।

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