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यूरेथ्रेल स्ट्रक्चर की उत्तरबस्ती चिकित्सा पर रजामंदी

उज्जैन। एलोपैथिक पद्धति से यूरेथ्रेल स्ट्रक्चर का उपचार कराने के बाद परेशानी का सामना कर रहे मरीज आयुर्वेद की उत्तरबस्ती चिकित्सा से इस समस्या का निदान अब शहर में आसानी से पा सकेंगे। केंद्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद ने देश में पहली बार उज्जैन पंचकर्म सेंटर का प्रोजेक्ट इस चिकित्सा पद्धति से उपचार करने के लिए स्वीकृत किया है। आयुष मंत्रालय ने 18 महीने के प्रोजेक्ट के लिए 12.97 लाख की राशि भी स्वीकृत कर दी है। प्रोजेक्ट के लिए क्षेत्रीय आयुर्वेदीय विज्ञान अनुसंधान परिषद के अनुसंधान अधिकारी को सह अन्वेषक और सेंटर प्रमुख एसएन पांडे को मुख्य अन्वेषक नियुक्त किया गया है।

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दरअसल उम्र बढऩे के साथ ही यूरो संबंधी समस्याएं बढऩे लगती हैं। खासकर पुरुषों में। पुरुषों में प्रोस्टेट होना आम है और बढ़ती उम्र में यूरो मार्ग में बाधा होने से जलन, बुखार होना, संक्रमण होना जैसी समस्याएं आम हो जाती हैं। इन बीमारियों पर खर्च भी खूब होता है और एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति में ऑपरेशन ही विकल्प होता है। पर इसका सफलता प्रतिशत काफी कम होता है। यूरो मार्ग की भीतरी परतों की मोटाई बढऩे से बार-बार ऑपरेशन की स्थिति बनती है, आयुर्वेद में ऐसा नहीं होता।

क्या है उत्तर बस्ती चिकित्सा पद्धति
उज्जैन पंचकर्म सेंटर के डॉक्टर एसएन पांडे ने बताया कि सुश्रुत संहिता में उत्तर बस्ती चिकित्सा का विस्तृत उल्लेख है। इसके मुताबिक यूरो मार्ग में बार-बार होने वाली परेशानी में यह पद्धति बेहद कारगर है। इसमें विभिन्न जांचों के बाद यूरो मार्ग में अलग-अलग तरह के तेल तय प्रक्रिया से डाले जाते हैं। यह प्रोसेस 21 दिन तक होती है। 15 मिनट तक चलने वाली यह प्रक्रिया दर्दरहित रहती है और इससे यूरो मार्ग में आने वाले अवरोधक पूरी तरह समाप्त हो जाते हैं। चूंकि इस प्रोसेस को करने से पहले कुछ टेस्ट कराने होते हैं, जो महंगे होते हैं। इन टेस्ट में सोनोग्राफी, आरजीयूएमसीयू, यूरोफ्लोमेटरी, सीबीसी प्रमुख होते हैं। इन जांचों पर करीब 8 हजार रुपए का खर्चा आता है।

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प्रोजेक्ट से आम आदमी को यह होगा फायदा: प्रोजेक्ट स्वीकृत होने से उपचार से पहले होने वाले जांचें नि:शुल्क होंगी। उत्तरबस्ती उपचार लेने वाले पेशेंट का बड़ा खर्च बचेगा। डॉ. पांडे ने बताया कि मौजूदा समय में यूरो मार्ग में अवरोध होने पर दूरबीन, स्टेंट, बैलून, यूरोथ्राप्लास्टि और नली डालने के ऑपरेशन होते हैं। उत्तरबस्ती उपचार में इनमें से किसी की आवश्यकता नहीं होती।

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