महातैयारी… सिंहस्थ पर्व के दौरान शिप्रा में चलेंगे कू्रज और नावें, स्मार्ट सिटी ने २८ जनवरी तक मांगे प्रस्ताव

इच्छुक कंपनियां निर्धारित तिथि तक उज्जैन स्मार्ट सिटी कार्यालय में जमा कर सकती हैं कार्ययोजना
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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। भगवान महाकाल की नगरी उज्जैन में वर्ष 2028 में होने जा रहे सिंहस्थ महापर्व और उसमें 30 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की संभावना के चलते तैयारियां जोरों पर हैं। सडक़ों और पुलों का जाल बिछाने के साथ ही अब जल मार्ग से भी सफर करवाने की तैयारियां की जा रही हैं।

इसके तहत उज्जैन स्मार्ट सिटी लिमिटेड (यूएससीएल) ने शिप्रा नदी में त्रिवेणी घाट से कालियादेह महल तक अंतर्देशीय जल परिवहन (इनलैंड वॉटर-वे ट्रांसपोर्टेशन) सेवा पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल शुरू करने को लेकर इच्छुक एजेंसियों से प्रस्ताव मांगे हैं। इसमें कहा गया है कि चयनित निजी पार्टनर को नावों और क्रूज की डिजाइन, आपूर्ति, संचालन एवं रखरखाव की पूरी जिम्मेदारी संभालनी होगी। इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य सिंहस्थ में क्राउड मैनेजमेंट करना है। एक अनुमान के मुताबिक सिंहस्थ महापर्व में 30 करोड़ श्रद्धालु आएंगे। ऐसे में जल परिहवन शुरू होने से सडक़ों पर दबाव कम करने में मदद मिलेगी, साथ ही नया अनुभव भी मिलेगा।
15 किमी लंबे मार्ग पर संचालित होगी
जल परिवहन सेवा करीब 15किलोमीटर लंबे मार्ग पर संचालित होगी। नदी की कम गहराई को देखते हुए कम गहराई में चलने वाली (लो ड्राफ्ट) इलेक्ट्रिक या हाईब्रिड नावों का उपयोग करना होगा। इसके अलावा रिवर क्रूज सेवा पर्यावरण अनुकूल होगी ताकि नदिी के पारिस्थितिकी तंत्र और धार्मिक महत्व को नुकसान नहीं पहुंचे।
यह होंगी चुनौतियां
शिप्रा के एक हिस्से में वर्तमान में 7 स्टॉपडेम और कई पुराने ब्रिज हैं। कंपनियों को अपनी योजना इस तरह बनाना होगी कि नावें बिना किसी बाधा के सुरक्षित निकल सकें। स्मार्ट सिटी ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों और आपातकालीन बचाव प्रणालियों का सख्ती से पालन करना होगा। इच्छुक कंपनियां अपनी विस्तृत कार्ययोजना 28 जनवरी तक कार्यालय में जमा करा सकती हैं।
श्रद्धालुओं को मिलेगा नया अनुभव
वर्तमान में रामघाट पर शिप्रा में बोट चलती है जो श्रद्धालुओं को राणोजी की छत्री के सामने वाले हिस्से में घुमाती है लेकिन सिंहस्थ के दौरान नावें चलने से श्रद्धालुओं को नया अनुभव मिलेगा। श्रद्धालु त्रिवेणी संगम से केडी पैलेस तक जल मार्ग से यात्रा कर सकेंगे। इससे उज्जैन के पर्यटन को नई पहचान मिलेगी।









