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उपायुक्त भीमावद करेंगी जांच, भार्गव का तगड़ा कनेक्शन

नगर निगम का कार्यपालन यंत्री कांड

पांच महापौर के साथ काम किया, चार के खास

अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। मातहत महिला सब-इंजीनियर से अशालीन वार्तालाप कर एक बार फिर सुर्खियों में आए नगर निगम उज्जैन के प्रभारी कार्यपालन यंत्री पीयूष भार्गव के खिलाफ मिली शिकायत की जांच उपायुक्त कृतिका भीमावद करेंगी। एमआईसी की महिला सदस्यों ने भी इस मुद्दे पर गंभीर जांंच की बात कही है।

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प्रभारी कार्यपालन यंत्री पीयूष भार्गव के खिलाफ महिला सब-इंजीनियर ने गैर जरूरी वार्तालाप करने, फिजिकल रिलेशन के लिए दबाव बनाने और मीटिंग के बहाने रात में घर पर बुलाने के आरोप लगाए हैं। महापौर और नगरनिगम कमिश्रर ने इ इस संबंध में जांच के आदेश दिए हैं। डिप्टी कलेक्टर और उपायुक्त कृतिका भीमावद इस मसले की जांच करेंगी। पीयूष भार्गव हर महापौर के करीबी रहे। तत्कालीन महापौर मदनलाल ललावत, सोनी मैहर, रामेश्वर अखंड से भार्गव की खूब पटी। तत्कालीन महापौर मीना जौनवाल के पति विजय से भी भी भार्गव की नजदीकी रही।

एमआईसी की महिला मेंबर जांच पर सहमत

एमआईसी की महिला सदस्य जांच से सहमत हैं। दुर्गा-शक्तिसिंह चौधरी ने कहा कि कमिश्रर ने इस मामले में जांच के आदेश कर दिए है। इसमें सबकुछ साफ हो जाएगा। जांच के बाद हर हाल में एक्शन लिया जाएगा।

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कुछ ऐसी ही बात एमआईसी सदस्य सुगन वाघेला ने भी कही है। उनके मुताबिक जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। अगर शिकायत सही है तो भार्गव पर कार्रवाई होगी और यदि दूसरे पक्ष ने झूठी शिकायत की है तो उस पर भी कार्रवाई होगी।

जुआ खेलने से लेकर भ्रष्टाचार तक के कई गंभीर आरोप

वर्ष 2004 में त्रिवेणी क्षेत्र में स्वयं के प्लॉट पर जुआ खेलते हुए पकड़ाए। हालांकि बाद में बरी हो गए।

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2015 में निगम की एक महिला कर्मचारी के घर एक निगम कर्मचारी को भेजा, जहां कर्मचारी की गिरने से मृत्यु हो गई।

1994-1995 में लोकायुक्त का छापा भी पड़ चुका है।

जेएनएनयूआरएम के अंतर्गत 2 से 3 करोड़ रुपए के घपले के आरोप लगे। वरिष्ठ आईएएस अधिकारी व कार्यपालन यंत्री के फर्जी हस्ताक्षर करने का आरोप। सांसद एवं विधायक ने फर्जी हस्ताक्षर की हैंड राइटिंग एक्सपर्ट से जांच की मांग की लेकिन वह जांच रुक गई।

महाकाल मंदिर मेंं सिंहस्थ 2016 में लाइट पोल के नाम पर फर्जी भुगतान निकालने का आरोप।

सिंहस्थ 2016 के अंतर्गत करोड़ों रुपये का घोटाला किया। जिसमें पंचक्रोशी में शौचालय का 3 करोड़ का फर्जी भुगतान के आरोप हैं।

सिंहस्थ 2016 में एमआर-5 पर ट्रांसपोर्ट स्टेशन के कार्य में भ्रष्टाचार के आरोप लगे। ठेकेदार को एसडी/एनएस मनी नही लौटार्ई। जिसमें ठेकेदार द्वारा थाने में शिकायत की गई कि भार्गव द्वारा उनसे रुपयों की मांग की जा रही है।

2020 व 2021 में लक्ष्मी नगर, अशोक नगर में गार्डन की जमीन के ऊपर फर्जी नक्शा पास किया गया और जीरो पॉइंट ब्रिज के यहां अनुबंध वाली जगह का नक्शा पास किया।

वर्ष 2015 में हरसिद्धि पाल के यहां हॉकर्स झोन बनाना था, जबकि पार्टनर ठेकेदार से भवन निर्माण करवा लिया गया और बिना स्वीकृति के अत्यधिक राशि का भुगतान करवा लिया गया।

बीएसयूपी योजना के अंतर्गत 100 करोड़ रुपए के काम में पार्टनर ठेकेदार से काम करवाने के साथ 3 करोड़ रुपए का भुगतान एस्क्लेशन के नाम पर करने के भी आरोप हैं। उसके बाद तत्कालीन उपयंत्री ने रोक लगाई। बाद में इस मामले की नस्तियां भी गायब हो गई।

सबके खास बन जाने में भार्गव को महारत

प्रभारी कार्यपालन यंत्री पीयूष भार्गव की नौकरी के गणित को आज तक कोई भी नहीं समझ सका है। उज्जैन के मूल निवासी भार्गव के नगरीय निकाय की सेवा में रहते हुए 32 वर्षों में 5 बार ट्रांसफर हुए लेकिन उनका ठिकाना उज्जैन से बाहर ज्यादा दिन कभी भी नहीं रहा। उनके कारनामें बताते हैं कि सरकारी सिस्टम में उनकी पैठ कितनी गहरी है।

भ्रष्टाचार की कई शिकायतें उनके खिलाफ हुई, तीन बार उनका निलंबन भी हुआ परंतु हर बार वह बहाल हो गए।
आइए जानते हैं कब-कब हुआ पीयूष भार्गव का तबादला

1 1994 में भार्गव का पहली बार इंदौर ट्रांसफर हुआ। साल भर इंदौर में रहने के बाद वह उज्जैन नगर निगम आ गए।

2 2016 में भार्गव का ट्रांसफर मंदसौर किया गया लेकिन ट्रांसफर आदेश पर स्टे लेे लिया।

3 2018 में ग्वालियर ट्रांसफर हुआ लेकिन दोबारा स्टे लेकर आ गए। स्टे खारिज हुआ तो ग्वालियर जाकर ज्वाइनिंग दी लेकिन फिर उज्जैन तबादला करवा लिया।

4 ग्वालियर से उज्जैन आए पीयूष भार्गव का ट्रांसफर फिर से देवास किया लेकिन वह फिर उज्जैन आ गए।

5 2021 में भार्गव का बुरहानपुर ट्रांसफर हुआ परंतु उन्होंने विभागीय मुख्यालय से वह ट्रांसफर आदेश ही कैंसिल करवा दिया।
सिंहस्थ डामर कांड में

पहली बार हुआ निलंबन

1992 सिंहस्थ में डामर कांड के आरोप में सबसे पहली बार भार्गव को निलंबित किया गया। इस मामले में वह वर्ष 2005 से 2008 तक निलंबित रहे।

2011 में महाकाल मंदिर टनल निर्माण में टनल की डिजाइन परिवर्तन की। जिसके कारण एक महिला की मृत्यु हो गई थी। इस वजह से इन्हें निलंबित किया गया था। इस जांच का नतीजा आज तक नहीं आया।

2022 में तीन मामलों में निगम हित के विरुद्ध कार्य करने, प्रकरण में गंभीर लापरवाही करने और कूटरचना करने के मामले में निलंबित किया गया।

और अब पीयूष भार्गव का अतीत भी खंगाला जा रहा है

उपयंत्री पद से रिटायर होकर संविदा पर प्रभारी कार्यपालन यंत्री पर पद नियुक्त किए गए पीयूष भार्गव की मुश्किलें बढ़ गई हैं। एक महिला उपयंत्री का आडियो उजागर होने के बाद एमआईसी ने भी उनके कार्यकाल को बढ़ाने की फाइल रोक दी है। इधर महिला पार्षदों ने भी अपने स्वर मुखर कर दिए हैं।

अब भार्गव का वह इतिहास तलाशा जा रहा है जिसके हर पन्ने पर दाग है। लोकायुक्त पुलिस की वह कार्रवाई तलाशी जा रही है जिसने भार्गव को सुर्खियां दीं। सिंहस्थ 2016 के उन कांडों की फाइल खोजी जा रही है जिसमें भार्गव का नाम है। पिछले कई दिनों से भार्गव सिंहस्थ 2028 के निर्माण कार्यों को लेकर अधिकारियों की टीम के साथ देखे जा रहे थे।

सबकुछ ठीक था। इसी बीच एक आडियो ने तूफान ला दिया और भार्गव फिर 2016 की तरह सुर्खियों में आ गए। अब मामला महिला उपयंत्री से जुड़ा रंगीनमिजाजी का है। एमआईसी की बैठक में भार्गव के कार्यकाल को बढ़ाने की फाइल भी आई थी। मामला गंभीर होने के कारण एमआईसी ने हाथ खींच लिया और स्वीकृति पर मोहर लगाने के बजाय इसे पेंडिंग कर दिया। इधर कांग्रेस की पार्षद सांपना सांखला ने महिलाओं के साथ प्रदर्शन करते हुए महापौर को ज्ञापन सौंपा।

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