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Emotional Trauma होने पर नजर आते हैं ये संकेत

इमोशनल ट्रॉमा मन पर लगी एक गहरी चोट है, जो कोई बुरी दुर्घटना के कारण होती है। इसका मानसिक स्वास्थ्य पर इतना बुरा असर पड़ता है कि व्यक्ति अंदर तक सहम जाता है। कभी-कभी वह अपने इमोशंस को समझ ही नहीं पाता है। कभी-कभी ऐसा रिश्तों में भी देखने को मिलता है। दरअसल, जब कोई एक पार्टनर दूसरे के साथ बदतमीजी से पेश आता है, मार-पीट करता है या धोखा देता है। इस तरह के इमोशनल ट्रॉमा भी लोग अक्सर भूल नहीं पाते हैं। इस लेख में हम जानेंगे कि रिश्तों में इमोशनल ट्रॉमा होने पर व्यक्ति में किस तरह के लक्षण नजर आ सकते हैं।

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अकेलापन महसूस करना
इमोशनल ट्रॉमा होने पर व्यक्ति अक्सर अकेलापन और अपने पार्टनर डिटैचमेंट (अलगाव) महसूस करता है। यह स्थिति किसी भी रिश्ते के लिए सही नहीं होती है। हां, अगर कोई रिश्ते में होने के बावजूद अकेलापन महसूस करता है, तो यह उनके लिए सही नहीं है। ऐसे लोग अपने पार्टनर से न चाहते हुए भी दूर हो जाते हैं और दूरी में इमोशनल पेन का एहसास करते हैं।

विश्वास न कर पाना
जाहिर है जब कोई खराब रिश्ते में होता है या किसी से धोखा खाता है, तो ऐसे लोगों के लिए नए रिश्ते पर यकीन करना मुश्किल हो जाता है। इस तरह के लोग किसी अन्य व्यक्ति पर आसानी भरोसा नहीं करते हैं और किसी नए रिश्ते के बारे में सोचने भर से घबरा जाते हैं। असल में ऐसे लोगों को किसी करीबी का गहरा साथ चाहिए होता है, जो उन्हें इमोशनल ट्रॉमा से बाहर निकाल सके।

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डर और तनाव
जो भी व्यक्ति रिलेशनशिप में इमोशनल ट्रॉमा से गुजरता है, वह अक्सर डर और तनाव जैसी भावनाओं से घिरा रहता है। ऐसे लोग अपने पार्टनर के इर्द-गिर्द होने के एहसास भर से डर जाते हैं, जिससे उन्हें एंग्जाइटी होने लगती है। दरअसल, ऐसा उन लोगों के साथ अधिक होता है, जिनके पार्टनर मार-पीट करते हैं।

आत्मविश्वास की कमी
जब किसी के पर्सनल रिलेशनशिप अच्छे नहीं चलते हैं, तो इसका बुरा प्रभाव उनके जीवन पर भी पड़ता है। अगर इमोशनल ट्रॉमा की बात करें, तो यह व्यक्ति के इमोशंस को अंदर तक झकझोर देता है। उनका आत्मविश्वास तक डगमगा जाता है। ऐसे लोग नए रिश्ते में आने से डरते हैं और पुराना रिश्ता बुरे सपने की तरह हो जाता है।

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मूड खराब रहना
किसी भी तरह के रिश्ते में इमोशनल ट्रॉमा होना सही नहीं है। इससे व्यक्ति न चाहते हुए भी अक्सर चिड़चिड़ापन महसूस करता है। ऐसे लोग छोटी-छोटी बात पर गुस्सा हो जाते हैं, उदास हो जाते हैं और निराशावाद से घिर जाते हैं। हालांकि, ये लोग चाहते हैं कि वे खुश रहें, लेकिन इमोशनल ट्रॉमा के कारण उनका मूड स्थिर नहीं रहता है।

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