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सम्राट अशोक काल के बौद्ध स्तूप के पास अतिक्रमण, अनुयायी चिंतित

एएसआई के अधीन आता है वैश्य टेकरी स्तूप…

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विदेशों से भी दर्शन के लिए आते हैं श्रद्धालु

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सम्राट अशोक के काल में निर्मित की गई वैश्य टेकरी स्तूप के आसपास अतिक्रमण हो गया है। इससे बौद्ध अनुयायी चिंतित है।

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अवंती जनपद के समय सम्राट अशोक 2300 साल पहले उज्जैन आए थे और तब उन्होंने वैश्य टेकरी का निर्माण करवाया था। कानीपुरा रोड पर स्थित इस स्तूप की ऊंचाई 100 फीट और व्यास 350 फीट था, लेकिन समय के साथ-साथ आज इस स्थल की ऊंचाई और व्यास दोनों ही कम होते दिखते है। भारतीय पुरातत्व सर्वेंक्षण विभाग नई दिल्ली के अधीन आने वाले इस स्मारक पर एक वक्ता था जब कंबोडिया, चीन, जापान, रूस, श्रीलंका से बौद्ध अनुयायी इस स्तूप पर आकर साधना किया करते थे। इन ऐतिहासिक धरोहरों की पहचान कही गुम ना हो जाए इसलिए इनको संवारना बेहद जरूरी है। बौद्ध समाज के अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष का कहना है कि स्तूप की ऊंचाई और व्यास कम होने का कारण आसपास हो रही खेती और अतिक्रमण है। इस पर किसी का भी ध्यान नहीं है। स्तूप को बचाने के लिए ध्यान देने की जरूरत है, अन्यथा यह खत्म हो जाएगा।

7 करोड़ की लागत से बुद्ध प्रतिमा होगी स्थापित
भारतीय बौद्ध महासभा के अध्यक्ष मनोज नागदेव और उपाध्यक्ष संतोष लोखंडे ने बताया कि सीएम ने आश्वस्त किया कि स्तूप को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करेंगे। 7 करोड़ रुपए की लागत से बुद्ध की विशाल प्रतिमा स्थापित की जाएगी। इसका प्रस्ताव भी पास हो चुका है और डिजाइन भी तैयार है।

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किसानों पर अतिक्रमण का आरोप

बुद्ध समाज के अध्यक्ष और उपाध्यक्ष ने विशाल बौद्ध स्तूपों के संरक्षण को लेकर गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने बताया कि पहले जो छोटे-छोटे टीले नुमा स्तूप मौजूद थे, उन्हें किसानों द्वारा खत्म कर दिया गया है। अब केवल दो मुख्य स्तूप बचे हैं, लेकिन उन पर भी अतिक्रमण कर खेती की जा रही है।

उन्होंने प्रशासन की अनदेखी पर नाराजगी जताई और कहा कि शासन-प्रशासन की ओर से इस ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा के लिए कोई प्रयास नहीं हो रहा। अतिक्रमण और विकास की कमी के कारण अब देश-विदेश से आने वाले बौद्ध अनुयायियों की संख्या भी घट गई है, जिससे इस क्षेत्र की पहचान धीरे-धीरे विलुप्त होती जा रही है। फिर भी, हर वर्ष फरवरी महीने के पहले रविवार को बुद्ध समाज वैश्य टेकरी पर एक विशेष आयोजन करता है, जिसमें समाज के सभी सदस्य एकत्रित होकर इस ऐतिहासिक स्थल को संजोने का प्रयास करते हैं।

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