सीजन में पहली बार मां शिप्रा बड़े पुल को छूने के करीब….

एक ही रात में 3.5 इंच बारिश, रामघाट पर राणोजी की छत्री तक पहुंचीं मां शिप्रा
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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। इस सीजन मेें पहली बादल रातभर जमकर बरसे जिससे एक ही रात में 85 मिमी यानी 3.5 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। बारिश के चलते शहर के निचले इलाकों में पानी भर गया और नाले-नालियां उफान पर आ गए। इधर, इस सीजन में पहली बार शिप्रा भी बड़े पुल को छूने को बेकरार है। दोपहर 12 बजे तक जलस्तर बड़े पुल ने महज 2.5 फीट नीचे था। इसकी जानकारी जैसे ही शहरवासियों को लगी तो वह भी नजारा देखने के लिए बड़े पुल पर पहुंचने लगे। हालांकि, सुरक्षा के लिहाज से यहां पुलिसकर्मियों को तैनात किया है।

दरअसल, इस बार मानसून उम्मीद के मुताबिक नहीं बरसा लेकिन अगस्त के आखिरी दिनों और सितंबर की शुरुआत में बादल जमकर बरस रहे हैं। बुधवार को दिनभर रुक-रुककर बारिश होती रही। देर रात 12 बजे से धुआंधार बारिश का दौर शुरू हुआ जो सुबह 6 बजे तक रुक-रुककर जारी रहा। शासकीय जीवाजी वेधशाला से प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक इस दौरान 85 मिमी यानी 3.5 इंच बारिश हुई। अब तक बारिश का कुल आंकड़ा 683 मिमी यानी करीब 28 इंच तक पहुंच गया है। वेधशाला के अधीक्षक डॉ. आरपी गुप्त ने बताया कि बंगाल की खाड़ी में स्ट्रांग सिस्टम बना है जो धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है। इसी के चलते तेज बारिश हुई। आने वाले दिनों में बारिश का दौर जारी रहेगा।
3 साल बाद अंगारेश्वर महादेव जलमग्न…
प्रसिद्ध अंगारेश्वर महादेव मंदिर तीन साल बाद जलमग्न हुआ। इससे गुरुवार को मंदिर पर होने वाली भात पूजाएं नहीं हो सकीं। मंदिर के पुजारी पंडित मनीष उपाध्याय और रोहित उपाध्याय ने बताया पिछले साल मंदिर के फर्श तक पानी आया था, लेकिन शिवलिंग जलमग्न नहीं हो सके थे। साल 2022 में शिप्रा में आई बाढ़ के कारण मंदिर पूरी तरह से जलमग्न हो गया था। तब मंदिर का केवल शिखर ही दिखाई दे रहा था।
अंगारेश्वर मंदिर 84 महादेव मंदिरों के क्रम में 43वें क्रम का है और यहां भात पूजन का महत्व ज्यादा है। मान्यता है कि भात पूजा करने से मंगल ग्रह से होने वाली पीड़ा का निवारण होता है। ये भातपूजा मंगलवार को कराने नका महत्व है, किंतु अन्य दिनों में भी श्रद्धालु भीड़ से बचने के लिए भात पूजा कराने देशभर से आते हैं। गुरुवार को भी कई श्रद्धालु पूजा कराने आए किंतु सुबह करीब 10 बजे मंदिर जलमग्न हो गया। सुबह से ही मंदिर में पानी आने का सिलसिला शुरू हो गया था। शिप्रा नदी द्वारा अंगारेश्वर के अभिषेक का दृश्य देख भक्त भावविभोर हो उठे। कई लोग इस दृश्य को निहारने भी पहुंचे।
पंडे-पुजारियों ने सामान समेटा
शिप्रा का जलस्तर बढऩे के साथ ही पंडे-पुजारियों ने सामान समेटना शुरू कर दिया था। इस दौरान कुछ सामान पानी में डूब भी गया जिसे पंडे-पुजारी सुरक्षित जगह ले गए। इसके अलावा तैराक दल ने अपनी नाव को राणोजी की छत्री से बांधकर सुरक्षित किया।
गंभीर डेम के तीन गेट खुले
लगातार बारिश और आवक के चलते गंभीर डेम के तीन गेट खोले गए हैं। डेम प्रभारी प्रवीण कुमार वर्मा ने बताया कि दो गेट 3 मीटर और एक गेट को 2 मीटर तक खोला गया है। सबसे पहले रात 12 बजे गेट नंबर 3 को खोला गया। इसके बाद देर रात 2.30 बजे गेट नंबर 2 और सुबह 7 बजे गेट नंबर 4 खोला गया। फिलहाल गेट खोलकर डेम का जलस्तर मेंटेन किया जा रहा है।
औसत बारिश से 8 इंच दूर
इस बार अच्छी बारिश अगस्त के आखिरी हफ्ते में हुई थी, जबकि सितंबर की शुरुआत भी अच्छी ही रही है। औसत बारिश का कोटा 36 इंच का है। अब तक करीब 28 इंच बारिश हो चुकी है और कोटा पूरा करने के लिए अभी 8 इंच बारिश की और जरूरत है जबकि माह के 25 दिन शेष हैं। अभी जिस प्रकार से सिस्टम बना हुआ है, उम्मीद है कि सितंबर माह में औसत बारिश का आंकड़ा पा हो जाएगा।









