भावी वकीलों ने चराई भैंस, बोले- हमें पढ़ाने के लिए टीचर नहीं इसलिए काला अक्षर भैंस बराबर

शिक्षक मांगने के लिए अनोखा प्रदर्शन, हाथों में तख्तियां थामे विवि से निकले, 650 स्टूडेंट्स को पढ़ा रहे दो शिक्षक
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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। सोमवार दोपहर उस समय लोग भौंचक्के रह गए जब भावी वकील सड़क पर भैंस चराते नजर आए। काला कोट पहने और हाथों में तख्तियां थामे वकालात के इन स्टूडेंट्स का कहना था कि हमें पढ़ाने के लिए टीचर ही नहीं है इसलिए हमारे लिए हर काला अक्षर भैंस बराबर है। रैली जहां से भी गुजरी लोग अचरज से उन्हें देखते रहे।
दरअसल, सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय के विधि विभाग के स्टूडेंट्स ने शिक्षकों की कमी के विरोध में यह अनूठा प्रदर्शन किया। इसकी शुरुआत विवि के प्रशासनिक भवन से हुई। सबसे पहले परिसर में ही भैंस को घास चरवाई गई। इसके बाद करीब बीए एलएलबी फस्र्ट ईयर से लेकर थर्ड ईयर के 60 लॉ स्टूडेंट्स हाथों में तख्तियां लेकर और काल अक्षर भैंस बराबर के नारे लगाते हुए देवास रोड से निकले। आगे-आगे भैंस और पीछे-पीछे स्टूडेंट्स।
इस दौरान जिसने भी यह दृश्य देखा भौंचक रहा गया। रैली अलग-अलग मार्गों से होकर टॉवर पहुंची, यहां भी जमकर नारेबाजी की गई। इसके बाद शहीद पार्क, पुलिस कंट्रोल रूम से देवास रोड होते हुए पुन: विश्वविद्यालय पहुंची। स्टूडेंट्स का कहना था यदि पढ़ाने के लिए शिक्षक नहीं हैं तो वे भैंस चराने का काम करेंगे। उन्होंने विधि विभाग के ताले भी नहीं खुलने दिए। लगभग 650 से अधिक लॉ स्टूडेंट्स पिछले डेढ़ वर्ष से शिक्षकों की कमी की समस्या से जूझ रहे हैं।
प्रदर्शन के लिए मांगकर लाए भैंस
प्रदर्शन के लिए छात्र प्रतीकात्मक रूप से अपने साथ भैंस लेकर पहुंचे थे। इसके लिए वे शालिग्राम तोमर होस्टल के पीछे स्थित विक्रम नगर में रहने वाले एक शख्स से भैंस मांगकर लाए थे। प्रदर्शन खत्म होने के बाद स्टूडेंट्स ने भैंस उसके मालिक को लौटा दी।
लिखकर दें 10 दिन में समस्या हल करेंगे
रैली के वापस पहुंचने पर लॉ स्टूडेंट्स ने कुलगुरु प्रो. अर्पण भारद्वाज को ज्ञापन सौंपा। समस्या का शीघ्र निराकरण करने की बात कही। इस प्रो. भारद्वाज ने १० दिन का समय मांगा तो स्टूडेंट्स ने कहा कि आप पहले भी ऐसा कह चुके हैं लेकिन कुछ नहीं हुआ। इस बार स्टाम्प पर लिखकर दें कि १० दिन में समस्या दूर कर देंगे लेकिन उन्होंने ऐसा करने से इंकार कर दिया। स्टूडेंट्स ने सुप्रीम कोर्ट और मप्र के चीफ जस्टिस और मुख्यमंत्री को भी ज्ञापन प्रेषित किया है।
वीसी बहरे हो गए हैं…
प्रदर्शन का हिस्सा रहे बीएएलएलबी थर्ड ईयर के छात्र सत्यम यादव ने बताया कि दो दिन पहले भी लेटर और ज्ञापन दिया था लेकिन वीसी साहब बहरे हो गए हैं इसलिए यह प्रदर्शन किया। बीए एलएलबी और लॉ की कक्षाएं केवल दो शिक्षकों के भरोसे चल रही हैं, जबकि स्टूडेंट्स की संख्या 650 से ज्यादा है। नियम अनुसार यहां करीब 10 शिक्षकों की जरूरत है। हमसे कहा जा रहा है कि दूसरे कॉलेज से शिक्षकों को बुलवाकर कोर्स कम्पलीट करवा देंगे लेकिन हमें अपने टीचर्स चाहिए।
इसलिए अटका मामला
सम्राट विक्रमादित्य विश्वविद्यालय ने सितंबर माह में अतिथि विद्वानों की भर्ती का विज्ञापन जारी किया था जिसके मुताबिक सितंबर में ही नियुक्तियां हो जाना चाहिए थीं लेकिन कतिपय लोगों ने लोकायुक्त ने शिकायत कर दी। ऐसे में लोकायुक्त ने विश्वविद्यालय से उसका पक्ष मांगा था और फिलहाल नियुक्ति नहीं करने के निर्देश दिए थे। इस वजह से मामला अटका हुआ है।
इनका कहना
लॉ के विद्यार्थियों के लिए दो शिक्षक नियमित हैं। इसके अलावा एक शोधार्थी है जो नियमित रूप से पढ़ाता है एवं अगस्त से एक अन्य शिक्षक भी पढ़ा रहे हैं, इस तरह वर्तमान में चार शिक्षक पढ़ा रहे हैं। अन्य विषयों के लिए भी फैकल्टी है। अन्य विभागों में भी इसी तरह के हालात हैं। विद्यार्थी इस बात को नहीं समझ रहे। वहीं, नियुक्ति के विषय में लोकायुक्त को जवाब भेज दिया है और उस पर प्रतिक्रिया भी मांगी है।
– प्रो. अर्पण भारद्वाज, कुलगुरु, सम्राट विक्रमादित्य विवि









