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गंभीर डेम में पिछले साल की तुलना में कम पानी

शहर के मुख्य जल स्त्रोत में केवल 700 एमसीएफटी पानी शेष, जलप्रदाय व्यवस्था से महापौर नाराज

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नगर निगम आयुक्त को पत्र भेजा, लेकिन जवाब नहीं दिया

 

अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:गर्मी के तेवर अभी पूरी तरह तेज नहीं हुए हैं और शहर की प्यास बुझाने वाले गंभीर डेम में 700 एमसीएफटी पानी ही बचा है। इस हिसाब से डेम 100 दिन भी लोगों की प्यास बुझा नहीं सकेगा, क्योंकि डेड स्टोरेज का पानी उपयोग नहीं किया जा सकेगा। इस स्थिति को लेकर महापौर मुकेश टटवाल भी नाराज हैं। उन्होंने निगम प्रशासन को आचार संहिता में वे क्या कर सकते हैं, इसको लेकर पत्र लिखा लेकिन उसे तवज्जों ही नहीं दी गई।

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जल प्रदाय को लेकर महापौर परिषद और निगम प्रशासन में टकराव की स्थिति बनी हुई है। इस टकराव में आम लोगों को पेयजल संकट का सामना करना पड़ सकता है। गंभीर डेम में वर्तमान में मंगलवार की स्थिति में केवल 715 एमसीएफटी पानी ही बचा है। 100 एमसीएफटी पानी डेड स्टोरेज के रूप में ऐसा रहता है, जिसका उपयोग पीने के लिए नहीं किया जाता। इस हिसाब से अब केवल 615 एमसीएफटी पानी ही शेष है।

इससे केवल 100 दिन ही शहर में पेयजल।प्रदाय किया जा सकेगा। वर्तमान में रोज करीब 6 एमसीएफटी पानी की खपत हो रही, जो गर्मी बढऩे के साथ ज्यादा होने की संभावना है। पिछले साल डेम में आज के दिन (9 अप्रैल) की स्थिति में 759 एमसीएफटी पानी था। इस कारण ज्यादा दिक्कत नहीं आई। शहर के अवैध नल कनेक्शन काटने को लेकर भी निगम प्रशासन सख्त कार्रवाई नहीं कर पा रहा।

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महापौर को जवाब ही नहीं

सूत्रों के अनुसार महापौर टटवाल ने निगम आयुक्त को पत्र लिखकर जानकारी मांगी थी कि लोकसभा चुनाव आचार संहिता के दौरान वे जलप्रदाय व्यवस्था आदि जरूरी कामों के लिए क्या कर सकते हैं, लेकिन अधिकारियों ने इसे कोई तवज्जो न देते हुए कोई जवाब ही नहीं दिया।

नगर निगम प्रशासन और एमआईसी में इसलिए टकराव

जलप्रदाय को लेकर निगम प्रशासन और एमआईसी में टकराव की स्थिति कई दिनों से बनी हुई है। इसकी शुरुआत उज्जैन उत्तर में सुबह और दक्षिण में शाम को जलप्रदाय करने का निर्णय कलेक्टर और निगमायुक्त ने किया लेकिन महापौर और जलकार्य समिति प्रभारी से राय मशविरा ही नहीं किया गया। बाद में दक्षिण क्षेत्र में जलप्रदाय का समय सुबह 5.30 की जगह सुबह सात बजे करने का निर्णय भी बिना एमआईसी से विचार किए लिया गया।

हां, यह सही है कि लोकसभा चुनाव आचार संहिता के दौरान जलप्रदाय व्यवस्था जैसे जरूरी कामों के लिए निगम आयुक्त को पत्र भेजा है। अभी इसका उत्तर नहीं मिला है। गर्मी में पेयजल प्रदाय करना चुनौती तो बनता जा रहा।-मुकेश टटवाल, महापौर

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