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85 ट्रकों की लिस्ट देकर कहा इन्हें फ्री में छोडऩा पड़ेगा

उज्जैन-इंदौर रोड के टोल पर मारपीट, सुपरवाइजर पहुंचा पुलिस के पास

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन/इंदौर उज्जैन-इंदौर रोड पर बारोली टोल नाके पर मारपीट हुई है। पुलिस के पास पहुंचे टोल सुपरवाइजर ने मामले की शिकायत के साथ आरोप लगाया कि मारपीट करने वालों ने कुछ देर बाद 85 ट्रकों की एक लिस्ट टोल सुपरवाइजर को देकर धमकी दी कि इन्हें फ्री में छोडऩा पड़ेगा, नहीं तो ठीक नहीं होगा। मामले की शिकायत कलेक्टर और पुलिस से की गई है। घटना तीन दिन पुरानी है पर सीसीटीवी मंगलवार को सामने आए।

दरअसल बारोली टोल नाका अब तक एमपीआरडीसी (मप्र रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) के पास था। लेकिन मुफ्तखोरी के चलते कॉरपोरेशन को नुकसान हो रहा था। इसलिए 1 मार्च 2024 को कॉरपोरेशन ने यह नाका मुंबई की निजी कंपनी को सौंप दिया। कंपनी की सख्ती के बाद से यहां विवाद की स्थितियां बन रही है।

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टोल कंपनी के सुपरवाइजर दीपक दीघे ने अपनी शिकायत में बताया कि 4 मई शनिवार को दशरथ राजौरिया, अन्नू बारौली और रवि ने मारपीट की। वह टोल पर बैठा था तभी गाड़ी नंबर एमपी-09-डीएफ7574 वहां पहुंची। कार पर फास्टैग नहीं लगा था। टोल कांउटर पर बैठी महिला कर्मचारी ने गाड़ी में बैठे दशरथ राजौरिया से नगद पैसे मांगे। इस पर राजौरिया बिफर गया और कहा कि गाड़ी फ्री में निकलेगी। इस पर महिला कर्मचारी ने सुपरवाइजर दीपक दीघे से बात करने को कहा।

85 कर्मिशयल वाहनों की लिस्ट सौपी

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राजौरिया के साथ आए रवि और अन्नू बारौली ने दीघे से गाड़ी फ्री में छोडऩे को कहा। दीपक के मना करने पर उसकी कॉलर पकड़कर मारपीट की। कुछ देर बाद धमकियां देकर टोल से चले गए। इनके जाने के बाद दीपक ने टोल कंपनी मैनेजर को पूरा घटनाक्रम बताया। इस बीच बदमाशों ने कार और कमर्शियल वाहनों की एक लिस्ट टोल मैनेजर और सुपरवाइजर को दी। कहा कि इस लिस्ट में जो भी गाडिय़ां हैं उन्हें फ्री में छोड़ा जाए। नहीं तो कंपनी से टोल छुड़वा देंगे। इसके बाद दीपक ने बाणगंगा थाने जाकर तीनों आरोपियों के खिलाफ शिकायत आवेदन दिया है। पुलिस बाणगंगा के अनुसार मामले की जांच की जा रही है।

एमपीआरडीसी को नुकसान हुआ तो कंपनी को सौंपा टोल

बारोली नाके पर अब तक एमपीआरडीसी टोल वसूलती थी। लेकिन फ्री में वाहनों की आवाजाही अधिक होने से यहां सरकार को नुकसान हो रहा था। इस वजह से 1 मार्च 2024 से टोल वसूली की जिम्मेदारी मुंबई की एसएस मल्टीनेशनल कंपनी को सौंपा गया है। इसके बाद से टोल के आसपास के ग्रामीण इलाकों के वाहनों को छोड़कर अन्य सभी वाहनों से सख्ती से टोल वसूली की जा रही है।

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