गुप्त नवरात्रि कल से, सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी मंदिरों में घटस्थापना

देवी मंदिरों में होगी विशेष पूजा-अर्चना, साधना का विशेष महत्व
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। माघ मास की गुप्त नवरात्र कल 19 जनवरी से प्रारंभ होगी। सर्वार्थ सिद्धि योग के दुर्लभ महासंयोग में इस बार नवरात्र पूरे 9 दिन के रहेंगे, जिसमें तंत्र-मंत्र और यंत्र की सिद्धि के लिए साधक विशेष अनुष्ठान करेंगे। उज्जैन के शक्तिपीठ माता हरसिद्धि सहित शहर के देवी मंदिरों में माता विशेष अनुष्ठान होंगे।

इस बार की गुप्त नवरात्र आध्यात्मिक दृष्टि से बेहद खास है। नवरात्र के 9 दिनों में दो सर्वार्थसिद्धि योग और चार रवि योग का संयोग बन रहा है। सूर्य के उत्तरायण होने के कारण यह कालखंड साधना और मांगलिक कार्यों के लिए श्रेष्ठ माना जाता है। ज्योतिषाचार्य पं. वीके शुक्ला के अनुसार, 19 जनवरी सोमवार को प्रतिपदा तिथि पर उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, वज्र योग और मकर राशि के चंद्रमा की साक्षी रहेगी। मध्याह्न काल में अभिजीत मुहूर्त के साथ सर्वार्थसिद्धि योग का संयोग बन रहा है। इस योग में की गई साधना शीघ्र फलदायी होती है और मनोरथ पूर्ण करती है।
तांत्रिक महत्व
यह नवरात्रि तंत्र साधकों के लिए विशेष मानी जाती है, जो अपनी साधना को गुप्त रखते हैं और इस दौरान विशेष अनुष्ठान करते हैं। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के दस महाविद्या रूपों की गुप्त रूप से पूजा की जाती है, जो मनोकामना पूर्ति और मोक्ष के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
गुप्त नवरात्रि में ही बसंत पंचमी और नर्मदा जयंती
माघ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी के बीच पर्वों की विशेष कड़ी रहेगी। गुप्ता नवरात्रि के बीच ही बसंती पंचमी और नर्मदा जयंती मनेगी। इसके अतिरिक्त गौरी तृतीया, तिल कुंद चतुर्थी और भीष्म अष्टमी जैसे पर्व भी इसी दौरान मनाए जाएंगे।
बसंत पंचमी पर इस बार नहीं गूंजेगी शहनाई, अबूझ मुहूर्त पर ब्रेक
हर साल बसंत पंचमी को देश भर में विवाह, गृह प्रवेश और मुंडन जैसे कार्यों के लिए सबसे शुभ दिन माना जाता है। लेकिन इस वर्ष 23 जनवरी को आने वाली बसंत पंचमी पर कोई भी मांगलिक कार्य नहीं हो सकेगा। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, इस बार शुक्र तारा के अस्त होने के कारण विवाह के मुहूर्त नहीं बन रहे हैं। धर्मशास्त्रों में शुक्र और गुरु (बृहस्पति) तारों का उदय होना विवाह जैसे संस्कारों के लिए अनिवार्य है। यदि इनमें से कोई भी तारा अस्त हो, तो शुभ कार्य वर्जित माने जाते हैं।










