Thursday, June 30, 2022
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कांग्रेस को बड़ा झटका, Hardik Patel ने छोड़ा पार्टी का साथ

गुजरात कांग्रेस में सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। लंबे समय से कांग्रेस पार्टी में अंदरुनी कलह के शिकार हो रहे कांग्रसे नेता हार्दिक पटेल ने आज पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा देने का ऐलान कर दिया है।

हार्दिक पटेल ने खुद ट्वीट कर यहा जानकारी दी है। हार्दिक पटेल ने ट्वीट कर कहा है कि आज मैं हिम्मत करके कांग्रेस पार्टी के पद और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूं। मुझे विश्वास है कि मेरे इस निर्णय का स्वागत मेरा हर साथी और गुजरात की जनता करेगी। मैं मानता हूं कि मेरे इस कदम के बाद मैं भविष्य में गुजरात के लिए सच में सकारात्मक रूप से कार्य कर पाऊँगा।हार्दिक पटेल गुजरात कांग्रेस में अपनी अवहेलना के नाराज थे और इस बारे में खुलकर कई बार बोल भी चुके थे।

कांग्रेस आलाकमान तक भी उन्होंने आवाज पहुंचाने के कोशिश की थी। इसके बावजूद उन्हें गुजरात कांग्रेस की कई अहम बैठकों में बुलाया नहीं जाता था। कांग्रेस के उदयपुर खेमे से दूरी बनाए रखने वाले गुजरात कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल ने पार्टी पर दबाव बनाना शुरू कर दिया था।

हार्दिक की मांग थी कि अगर पाटीदार नेता नरेश पटेल कांग्रेस में शामिल होते हैं तो उनकी नाराजगी दूर हो जाएगी, लेकिन नरेश पटेल के पार्टी में शामिल होने की शर्त पर कांग्रेस में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।सूत्रों के मुताबिक पूर्व केंद्रीय मंत्री भरतसिंह सोलंकी का धड़ा खोदलधाम के मुख्य ट्रस्टी नरेश पटेल के संपर्क में थे और उन्हें कांग्रेस में लाने की पूरी कोशिश कर रहे थे, लेकिन कांग्रेस में अहम पद को लेकर बातचीत सफल नहीं हो पाई थी।

हार्दिक पटेल औ नरेश पटेल का सियासी समीकरण……दरअलल बीते विधानसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री शंकरसिंह वाघेला ने कांग्रेस के सामने उन्हें मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार या चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाने की शर्त रखी थी, लेकिन

कांग्रेस राजी नहीं हुई और अंततः वाघेला ने कांग्रेस छोड़ दी। ऐसे में इन दोनों पदों पर नरेश पटेल की भी नजर थी। हार्दिक पटेल ऐसे में खुद को चुनाव प्रचार समिति का अध्यक्ष बनाकर नरेश पटेल को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाकर पाटीदार वोट बैंक के बीच अपनी पैठ मजबूत करना चाहते थे, लेकिन कांग्रेस इस पर राजी नहीं है।

ऐसा माना जाता है कि गुजरात में कांग्रेस का पारंपरिक वोट बैंक ओबीसी, आदिवासी है, इसलिए पाटीदार वोट बैंक को लुभाने के लिए कांग्रेस पार्टी ऐसा जोखिम लेने के लिए तैयार नहीं थी।

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