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68 घंटे बाद सफलता… गड्ढे में फंसी कार में मिला कांस्टेबल आरती का शव, पिछली सीट पर थी बॉडी

स्थानीय दो गोताखोर भाइयों ने 10 मिनट का समय मांगा और बता दिया यहां है कार घटनास्थल से 70 मीटर दूर 10 फीट गहराई में मिली, 130 जवान लगे थे सर्चिंग में

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। करीब 68 घंटे की मेहनत के बाद आखिरकार मंगलवार शाम पुलिस को घटनास्थल से 70 मीटर दूर 8 से 10 फीट गहराई में गड्ढे में फंसी कांस्टेबल आरती पाल की कार मिल गई। आरती पाल का शव कार के पिछली सीट पर मिला है। संभवत: क्रेन से कार को निकालने के दौरान शव इधर-उधर हो गया। जैसे ही कार को बाहर निकाला गया, वहां खड़ी सीएसपी पुष्पा प्रजापति सहित अन्य महिला पुलिसकर्मियों की भावनाओं का ज्वार फट गया और सभी की आंखों में आंसू छलक गए। बेटी के शव मिलने की सूचना आरती के पिता अशोक पाल को दी गई जिसके बाद लडख़ड़ाते कदमों के साथ वो भी मौके पर पहुंच गए। उनके सामने सारी कार्रवाई की गई। इस दौरान वे बार-बार बेसुध हो रहे थे। इसके बाद रात में ही पुलिस ने पीएम करवाकर शव को फ्रीजर में रखवा दिया। बुधवार सुबह आरती का अंतिम संस्कार किया जाएगा।

दरअसल, एनडीआरएफ, एसडीईआरएफ, गोताखोर और डीप ड्राइवर लगातार कांस्टेबल आरती पाल और कार की तलाश कर रहे थे लेकिन मंगलवार शाम 4.30 बजे तक उन्हें सफलता नहीं मिल सकी थी तभी भीड़ के बीच से दो हीरो सामने आए जिन्होंने 10 मिनट में बता दिया कि कार कहां है। हेलावाड़ी में रहने वाले और पेशे से मकान डिस्मेंटल का काम करने वाले मो. इरफान उर्फ जुम्मा और उनके भाई अकबर ने पुलिस से कार ढूंढने के लिए सिर्फ 10 मिनट का समय मांगा। अनुमति मिलते ही तैराक दोनों भाई नाव में बैठकर उसी जगह पहुंचे जहां कार गिरी थी। यहां से करीब 70 मीटर दूर उन्होंने बता दिया कि कार 8 से 10 फीट नीचे गड्ढे में फंसी है। इसके बाद शाम 4.45 बजे कार का पता चल गया जिसके बाद शाम 5.30 बजे क्रेन की मदद से उसे बाहर निकाला गया।

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आगे का कांच फूटा था, बॉडी पिछली सीट पर थी
जब क्रेन की सहायता से कार को बाहर निकाला गया तब कार का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त था और कांच भी फूटा हुआ था, जबकि कांस्टेबल आरती पाल की बॉडी पिछली सीट पर थी। संभवत: कार को बाहर निकालने के दौरान बॉडी वहां आ गई। कार के ड्राइवर सीट के आगे और पीछे के कांच खुले हुए थे।

साथी की लाश देख नहीं रुके आंसू

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सर्चिंग अभियान के दौरान सीएसपी पुष्पा प्रजापति सहित अन्य महिला पुलिसकर्मी भी मौजूद थीं। जैसे ही कार के साथ आरक्षक आरती पाल की बॉडी मिली तो वह भी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख सकीं और बिलखकर रोने लगी। इस दौरान लगातार उनकी आंखों से आंसू छलकते रहे।

एसपी ने हाथ मिलाया, धन्यवाद दिया

कार और आरती पाल का शव मिलने के एसपी ने 68 घंटों से सर्चिंग में जुटी एनडीआरएफ, एसडीईआरएफ, गोताखोरों और डीप डाइवर्स से हाथ मिलाया और उनकी काम के प्रति उनके जज्बे की प्रशंसा करते हुए हर एक उस शख्स को धन्यवाद दिया जो इस मुहिम का हिस्सा बना था। एनडीआरएफ के 25, एसडीईआरएफ के 15 टीम मेंबर, मां शिप्रा तैराक दल के 22, महिदपुर के 8 गोताखोर सहित कुल 130 जवान दो शिफ्ट में सर्चिंग में जुटे हुए थे।

पूरे मामले पर एक नजर

हादसा शनिवार रात करीब 9 बजे हुआ था। सफेद होंडा अमेज कार में सवार उन्हेल टीआई अशोक शर्मा, एसआई मदनलाल निनामा और महिला कांस्टेबल आरती पाल एक नाबालिग के अपहरण मामले की तफ्तीश कर उन्हेल लौट रहे थे। उनकी कार जूना सोमवारिया होते हुए बडऩगर रोड स्थित बड़े पुल के ऊपर से गुजर रही थी तभी अनियंत्रित होकर नदी में सुनहरी घाट की ओर जा गिरी। जिस वक्त कार गिरी उस समय शिप्रा उफान पर थी और पानी छोटी रपट से करीब 6 फीट ऊपर बह रहा था। चूंकि, बारिश के चलते पुल पर महाकाल थाने का बल तैनात था जिसने कार गिरने की सूचना कंट्रोल रूम को दी।

इसके बाद एसपी प्रदीप शर्मा और प्रशासन की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और कार की तलाश शुरू करवाई। देर रात 1 बजे तक टीमें सर्चिंग करती रही लेकिन कुछ पता नहीं चला। इसके बाद सर्चिंग रोक दी गई। रविवार को फिर से तलाशी अभियान चलाया गया जिसके बाद सुबह करीब 9 बजे घटनास्थल से 4 किमी दूर भैरवगढ़ पुल के नीचे से उन्हेल टीआई अशोक शर्मा का शव मिला। इसके बाद सोमवार दोपहर एसआई मदनलाल निनामा का शव भी भैरवगढ़ पुल के नीचे उसी जगह से मिला जहां टीआई की बॉडी मिली थी। इसके बाद महिला आरक्षक आरती पाल और कार की तलाश की जा रही थी जो मंगलवार शाम को मिल गई।

क्या बोले हीरो

हमें बचपन से तैराकी का शौक है। कार को तलाशने के लिए १० मिनट का वक्त मांगा था और अपने अनुभव का इस्तेमाल करते हुए बता दिया कि कार कहां है। अब तक इस तरह से कई शव हम निकाल चुके हैं।
मो. इरफान उर्फ जुम्मा

तीन दिन से अभियान चल रहा था। इसमें दिक्कत यह थी कि पानी का बहाव काफी ज्यादा था। इसकी वजह से गोताखोर स्टेबल नहीं हो पा रहे थे। मंगलवार को बहाव कम हुआ जिसके बाद घटनास्थल से 25 से 30 मीटर दूर गोताखोर को उतारा गया जिसने कन्फर्म किया कि यहां गाड़ी है। इसके बाद रीचैक किया गया। कार में बॉडी कन्फर्म होने पर उसे बाहर निकाला गया।
दयाराम मीणा, इंचार्ज, एनडीआरएफ

टकटकी लगाकर देखते रहे बेबस पिता: जैसे ही कार के मिलने की सूचना आरती के पिता अशोक पाल को मिली तो वे मौके पर पहुंच गए। बेटी का शव देख नम आंखों से वह टकटकी लगाए देखते रहे।

अब यह थ्योरी जो जन्म देती है सवालों को

  1. टीआई और एसआई के शव मिलने के बाद पुलिस का तर्क था कि कार आरती पाल ड्राइव कर रही होगी और जिसने सीट बेल्ट लगाया होगा जिससे बॉडी कार में फंसी रह गई। हालांकि, बॉडी कार में ही थी लेकिन सीट बेल्ट नहीं लगा था और जब कार को बाहर निकाला गया तो बॉडी पिछली हिस्से में थी।

2. संभावना यह भी है कि उन्हेल टीआई अशोक शर्मा या एसआई मदनलाल निनामा कार दोनों में से कोई एक कार ड्राइव कर रहा हो और दोनों ही आगे बैठे हों। नदी में कार गिरने के बाद आगे का कांच फूटने से उन्होंने निकलने की कोशिश की और पानी के बहाव के बहकर भैरवगढ़ पुल तक पहुंच गए।

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