सायबर अपराध में ई-एफआईआर पर साइन जरूरी, नहीं तो निरस्त होगी

एक माह के अंदर शिकायतकर्ता को जाना होगा थाने
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!
अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। बढ़ते सायबर अपराधों को देखते हुए अब ई-एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। अब ई-एफआईआर तो दर्ज होगी लेकिन उस पर साइन (हस्ताक्षर) करने के लिए शिकायतकर्ता को 30 दिन के अंदर संबंधित थाने जाना जरूरी होगा।
यदि शिकायतकर्ता आवेदन पर तय समयसीमा में साइन नहीं रकता तो ई-एफआईआर स्वत: ही निरस्त कर दी जाएगी। डीजीपी कैलाश मकवाणा ने इस संबंध में सभी जिलों के एसपी और अन्य पुलिस इकाइयों को निर्देश जारी किए हैं। यह कार्रवाई एक लाख रुपए या उससे अधिक राशि से जुड़े वित्तीय सायबर फ्रॉड के मामलों में लागू होगी। राष्ट्रीय सायबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल या हेल्पलाइन 1930 के माध्यम से सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम) के जरिए राज्य सायबर पुलिस थाने में ई-एफआईआर दर्ज करने की व्यवस्था है।
जांच के बाद रिपोर्ट ट्रांसफर
इस तरह की शिकायतें मिलने पर प्राथमिक जांच के बाद उन्हें संबंधित जिले को भेजा जाएगा। इसके बाद शिकायतकर्ता को ई-एफआईआर पर साइन करने के लिए थाने बुलाया जाएगा। यदि वह थाने नहीं पहुंचता है तो 30 दिनों में ई-एफआईआर स्वत: निरस्त हो जाएगी।
शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर होंगे जरूरी
निर्देशों में यह भी कहा है कि ई-एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच के तहत बैंक खातों को फ्रीज करना, सीडीआर (कॉल डिटेल रिकॉर्ड), एसडीआर (सब्सक्राइबर डिटेल रिकॉर्ड) प्राप्त करना और सीसीटीवी फुटेज एकत्र करना जैसी कार्रवाई की जाएगी। यह प्रक्रियाएं शिकायतकर्ता के हस्ताक्षर के बिना भी की जा सकेंगी।। बता दें कि इससे पहले दो लाख या उससे अधिक राशि के सायबर फ्रॉड मामलों को ही राज्य सायबर पुलिस थाने में दर्ज करने का प्रावधान था जिसे अब निरस्त किया है।









