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संपत्ति की नई गाइडलाइन लागू हुई तो 66 हजार रुपए तक बढ़ जाएगा रजिस्ट्री मूल्य, विभाग ने की तैयारी

जिला पंजीयक ने कई इलाकों में मिड टर्म में गाइडलाइन बढ़ाने के लिए बुलाए हैं सुझाव-आपत्ति

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अक्षरविश्व न्यूज:उज्जैन। जिला मूल्यांकन समिति के अनुसार अगर मिड टर्म में चुनिंदा क्षेत्रों की संपत्ति की गाइडलाइन में इजाफा किया जाता है तो आम आदमी पर एक हजार वर्गफीट के प्लॉट पर 66 हजार रुपए तक रजिस्ट्री का भार बढ़ जाएगा। जिला मूल्यांकन समिति ने 22 अक्टूबर को ही शहर के कुछ क्षेत्रों की गाइडलाइन में मिड टर्म में इजाफा करने के लिए आपत्ति और सुझाव मांगे हैं। शुक्रवार को आपत्ति और सुझाव देने की अंतिम तारीख है।

समिति ने एमआर-5 की गिरिराज रतन, राज रॉयल, आनंद विहार, इंदौर रोड की शिखर रिजेंसी, त्रिवेणीविहार. केसरबाग,उपवन देवास रोड की पदमावती एवेन्यू, क्षिप्रा विहार कॉलोनी तथा ग्रामीण क्षेत्रों के नीमनवासा, चंदेसरा, गोयला खुर्द, ढेंडिया, गंगेड़ी, पालखंदा और दताना में संपत्ति गाइडलाइन बढ़ाने का खाका तैयार कर लिया है।

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आम आदमी पर क्या होगा असर

मान लीजिए एक व्यक्ति त्रिवेणी बिहार में 1 हजार वर्गफीट का प्लॉट खरीदता है तो मौजूदा दौर में उसकी कीमत 17.56 लाख रुपए है। इस पर अभी 2.20 लाख रुपए रजिस्ट्री शुल्क लगता है। गाइडलाइन 10 फीसदी बढऩे पर यह राशि बढ़कर 2.42 लाख और 30 प्रतिशत बढऩे पर 2.86 लाख रुपए हो जाएगी। यानी आम आदमी को 22 हजार से लेकर 66 हजार रुपए अधिक का भुगतान करना होगा।

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क्या कहते हैं विशेषज्ञ

अभिभाषक सुदर्शन लड्ढा कहते हैं कि शासन कभी भी मार्केट वेल्यू तक गाइडलाइन वेल्यू को नहीं पहुंचा पाएगा, किंतु शासन अधिक राजस्व हासिल करने के लिए सोने का अंडा देने वाली मुर्गी को एक ही बार में समाप्त करना चाहता है। शासन-प्रशासन को चाहिए कि वह आम आदमी को स्टांप ड्यूटी में राहत दे, ताकि अधिक संख्या में संपत्ति क्रय-विक्रय होगा और टर्नओवर बढऩे से प्रशासन को अधिक राजस्व हासिल होगा। मध्यप्रदेश में अभी भी कई राज्यों की तुलना में स्टांप ड्यूटी बहुत अधिक है, इसे कम करने की आवश्यकता है। इससे आमआदमी को राहत मिलेगी और वह अवैध सौदों के बजाय वैध खरीदी पर जोर देगा।

गाइडलाइन बढ़ाने की जरूरत क्यों

दरअसल शासन स्तर से राजस्व बढ़ाने का दबाव है। चूंकि शहर का विकास सीमित है , ऐसे में अफसरों पर टारगेट पूरा करने का दबाव है। जिसे पूरा करने के लिए वह नए क्षेत्र खोजने के बजाय पुराने ही इलाकों की गाइडलाइन में इजाफा कर रहे हैं। इससे अधिक राजस्व तो शासन को मिल जाएगा लेकिन आम आदमी की कमर टूट जाएगी और उसका घर बनाने का सपना टूट सकता है।

किस क्षेत्र में अभी क्या है गाइड लाइन, बढऩे के बाद

गिरिराज रतन  576 –  634 से 748
राज रॉयल   640 – 715 से 845
त्रिवेणी विहार 1756 – 1931 से 2283
क्षिप्रा विहार  1932 – 2125 से 2511

(राशि रुपए प्रतिवर्ग फीट में है।)

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