मजदूर बदलते गए, नहीं बदली सराय…
शहर में दो जगह काम की तलाश में रोज पहुंचते हैं, आज भी लगी थी भीड़
अंतरराष्ट्रीय मजदूर दिवस आज
अक्षरविश्व प्रतिनिधि .उज्जैन।आपको किसी काम के लिए श्रमिक की तलाश है,तो इधर-उधर भटकने की आवश्यकता नहीं। शहर में दो स्थान ऐसे हैं,जहां काम की तलाश में सुबह से ही मजदूरों की भीड़ लग जाती है। इस जगह आने-जाने वाले मजदूर बदलते रहते है,लेकिन सराय वही है। छत्रीचौक स्थित सराय वर्षों पुरानी है।
यहां सालों से काम के लिये आ रहे मजदूरों ने कहा कि उन्हें भी नहीं पता यह कब शुरू हुई थी। छत्रीचौक के अलावा फ्रीगंज में भी रोजाना सराय पर काम की तलाश में मजदूर पहुंचते हैं।
1 मई सोमवार को मजदूर दिवस पर अक्षरविश्व की टीम छत्रीचौक स्थित सराय पहुंची। यहां काम मिलने का इंतजार कर रहे पेशे से पेंटर मोहन टॉकीज क्षेत्र के निवासी रफीक ने बताया कि करीब 10 साल पहले उसने काम की तलाश में यहां आना शुरू किया था। उस दौरान उसे 200 रुपये रोज के मान से दिहाड़ी मिलती थी। हालांकि यह बढ़कर 500 रुपये प्रतिदिन हो गयी है।
नियमित काम नहीं मिलने से औसत आय में अधिक फर्क नहीं पड़ा। इससे घर चलाने में दिक्कत आती है। गड्ढे खोदने के काम की तलाश में आये छोटी मायापुरी निवासी रामचंद्र ने बताया कि करीब 30 साल पहले छत्रीचौक सराय से इन्होंने काम शुरू किया था। तब रोजाना 10-12 रुपये मजदूरी मिला करती थी। अब यह 350 रुपये तक हो गयी है।
आय कम है और महंगाई अधिक होने से गुजर बसर करना कठिन हो गया है। जूना सोमवारिया निवासी कालू ङ्क्षसह ने बताया कि 25 साल पहले उसने मजदूरी शुरू की थी। उस दौरान 10 रुपये अधिकतम मजदूरी मिला करती थी। तब भी गुजर बसर हो जाता था। मजदूरी बढ़कर 500 रुपये तक हो गयी है। बावजूद इसके महंगाई के अनुपात में यह बहुत कम है। ऐसे में मजदूरी बढऩे के बाद भी घर चलाना मुश्किल हो रहा है।