53वें सीजेआई बने जस्टिस सूर्यकांत

पूर्व सीजेआई गवई से गले मिले, बड़े भाइयों के पैर छुए
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14 महीने का होगा कार्यकाल
नईदिल्ली, एजेंसी। जस्टिस सूर्यकांत ने सोमवार को देश के 53 वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में शपथ ली। राष्ट्रपति भवन में हुए समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उन्हें पद की शपथ दिलाई। इसके बाद उन्होंने वहां मौजूद बड़े भाई के पैर छुए। इस कार्यक्रम में उनके परिवार के लोग शामिल हुए।
मोदी समेत अन्य से मुलाकात की
सीजेआई सूर्यकांत ने पीएम मोदी समेत अन्य लोगों से मुलाकात की। इस समारोह में शामिल होने के लिए ब्राजील समेत सात देशों के मुख्य न्यायाधीश और सुप्रीम कोर्ट के जज भी राष्ट्रपति भवन पहुंचे। भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में पहली बार किसी सीजेआई के शपथ ग्रहण में इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय न्यायिक प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी रही। समारोह में भूटान, केन्या, मलेशिया, मॉरिशस, नेपाल और श्रीलंका के मुख्य न्यायाधीश और उनके परिवार के सदस्य भी पहुंचे। सूर्यकांत का कार्यकाल 14 महीने का होगा।
10वीं के बाद पहली बार शहर देखा था
जस्टिस सूर्यकांत के पिता मदनमोहन शास्त्री संस्कृत के शिक्षक और प्रसिद्ध साहित्यकार थे। मां शशि देवी गृहिणी थीं। बड़े भाई ऋषिकांत सेवानिवृत्त शिक्षक हैं, दूसरे भाई शिवकांत डॉक्टर और तीसरे देवकांत आईटीआई से रिटायर्ड हैं। बहन कमला देवी सबसे बड़ी हैं। जस्टिस सूर्यकांत सबसे छोटे हैं। बड़े भाई ऋषिकांत ने बताया, सूर्यकांत ने 10वीं तक पढ़ाई गांव पेटवाड़ में की। इसके बाद पहली बार शहर देखा था।
‘स्वतंत्र न्यायपालिका के लिए कोलेजियम जरूरी’
सीजेआई गवई ने आखिरी दिन रखी बात
नईदिल्ली, एजेंसी। देश के 52वें मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) बीआर गवई ने अपने कार्यकाल के आखिरी दिन रविवार को सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट में जज की नियुक्ति के लिए कोलेजियम प्रणाली का बचाव किया। कहा कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता और इसके प्रति लोगों के भरोसे को कायम रखने के लिए कोलेजियम प्रणाली जरूरी है।
गवई ने अपने आवास पर मीडिया से कहा, हमेशा से न्यायपालिका की आजादी की बात की जाती रही है, इसलिए यदि आप चाहते हैं कि लोगों का न्यायपालिका पर पूरा भरोसा बना रहे, तो इसकी आजादी को बरकरार रखना होगा। गवई ने कहा कि बेशक, हम लोगों की राय को भी ध्यान में रखते हैं। उन्होंने कहा कि जजों की नियुक्ति में इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) की रिपोर्ट्स, विधि एवं न्याय मंत्रालय की रिपोर्ट को भी ध्यान में रखा जाता है।
संपन्न लोगों को छोडऩा चाहिए आरक्षण का लाभ गवई ने अनुसूचित समुदाय के अमीर लोगों को आरक्षण के लाभ से बाहर करने को क्रीमी लेयर की अवधारणा के अपने विचारों का बचाव किया। उन्होंने सवाल किया यदि गांव के जमीनहीन मजदूर के बच्चे को किसी किसी मुख्य सचिव के बेटे या किसी आईएएस-आईपीएस के बेटे से मुकाबला करना पड़े तो क्या यह बराबरी के मंच होगा।









