920 करोड़ रुपए की लागत से पूरी होगी कान्ह डायवर्शन क्लोज डक्ट परियोजना

दो भाग में होगा निर्माण, 55 प्रतिशत एक और 84 दूसरा ठेकेदार करेगा
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अक्षरविश्व न्यूज|उज्जैन। शिप्रा नदी में कान्ह का दूषित पानी मिलने का भुगतान शहरवासियों को करना पड़ता है। शिप्रा में स्टोर होने वाला बारिश का पानी कान्ह का पानी मिलने से दूषित हो जाता है। नतीजा यह कि पीएचई द्वारा इस पानी का उपयोग न तो पेयजल प्रदाय कि लिए किया जाता है और न ही पर्व त्यौहारों पर श्रद्धालु इस पानी से स्नान कर पाते हैं। शासन द्वारा अब 920 करोड़ रुपए की लागत से कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना पर काम शुरू किया है जिसे सिंहस्थ महापर्व के पहले पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
कान्ह डायवर्शन योजना फेल
सिंहस्थ महापर्व 2016 के पूर्व शासन ने शिप्रा नदी में कान्ह का दूषित पानी मिलने से रोकने के लिए कान्ह डायवर्शन योजना बनाई और इसे पूरा करने के लिए 100 करोड़ रुपए खर्च किए थे। सिंहस्थ महापर्व के पूर्व योजना का 80 प्रतिशत काम हुआ और पर्व समाप्त होने के बाद अफसरों ने इसे पूर्ण करने के लिए कोई काम नहीं किया। नतीजा यह निकला कि निनौरा स्टापडेम से कान्ह के पानी को डायवर्ट कर कालियादेह महल के आगे निकालने के लिए डाली गई पाइप लाइन चौक हो गई। अब कान्ह का दूषित पानी डायवर्शन की पाइप लाइन से नहीं बहाया जाता और यह योजना पूरी तरह फेल हो गई।
यह होगा योजना का फायदा
प्रदेश सरकार द्वारा वर्ष 2028 में आयोजित होने वाले सिंहस्थ महापर्व के दृष्टिगत शहर में अनेक विकास कार्य कराए जा रहे हैं। इसी के अंतर्गत सिंहस्थ में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को शिप्रा नदी के साफ और स्वच्छ पानी में स्नान कराना सरकार की प्राथमिकता में है। यही कारण है कि कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना को सिंहस्थ महापर्व के पहले पूरा करने का टारगेट रखा गया है। यदि समय सीमा में योजना पूरी होती है तो शिप्रा नदी में मिलने वाले कान्ह के दूषित पानी से शहरवासियों को हमेशा के लिए छुटकारा मिलेगा।
नहीं लाना पड़ेगा नर्मदा का पानी
कान्ह का दूषित पानी शिप्रा नदी में मिलने की समस्या वर्षों पुरानी है। नर्मदा का पानी पाइप लाइन के माध्यम से उज्जैन तक लाने के बाद पीएचई और जल संसाधन विभाग को त्रिवेणी स्थित कान्ह नदी पर मिट्टी का स्टापडेम बनाकर नर्मदा का पानी पर्व, त्यौहार के दौरान शिप्रा नदी में मिलाना पड़ता था। नर्मदा का पानी उज्जैन तक लाने के लिए शासन को लाखों रुपए का खर्च वहन करना पड़ता था। कान्ह डायवर्सन डक्ट परियोजना पूरी होने के बाद शिप्रा नदी में साफ पानी मिलाने के लिए नर्मदा के पानी की आवश्यकता नहीं होगी।
30 किलोमीटर लंबी होगी डक्ट परियोजना
शासन द्वारा कान्ह के दूषित पानी को शिप्रा नदी में मिलने से रोकने के लिए दुबारा योजना बनाई गई है। जल संसाधन विभाग के अंतर्गत आने वाली इस योजना को कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना नाम दिया गया है। अफसर बताते हैं कि परियोजना के अंतर्गत डक्ट की कुल लंबाई 30.15 किलोमीटर होगी। कट और कवर हिस्से की लंबाई 18.15 किलोमीटर रहेगी। सुरंग वाले हिस्से की लंबाई 12 किलोमीटर रहेगी।
40 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज क्षमता
कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट परियोजना की खासियत यह है कि इसके माध्यम से 40 क्यूसेक पानी को एक समय में बहाया जा सकता है। इसमें सुरंग हिस्से में शाफ्ट भी रखे गए हैं जिनकी संख्या 4 रहेगी। खास बात यह कि योजना को पूर्ण करने की जिम्मेदारी ठेकेदार मेसर्स वेन्सर, उज्जैन परियोजना को 55 प्रतिशत व मेसर्स रिवरवोल्ट हाइड्रो परियोजना को 45 प्रतिशत काम सौंपा गया है।










