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कान्ह का गंदा पानी मिल रहा शिप्रा नदी में, स्टॉपडेम खोलकर बहा रहे

उज्जैन। त्रिवेणी से सिद्धनाथ तक शिप्रा नदी में कान्ह का दूषित पानी स्टोर हो चुका है, स्थिति यह है कि कान्ह का पानी लगातार शिप्रा में आ रहा है। इसको आगे बहाने के लिए पीएचई को त्रिवेणी से रामघाट तक 5 स्टॉपडेम के गेट खोलना पड़े हैं। गऊघाट जलयंत्रालय पर शिप्रा से पानी लेना भी बंद कर दिया गया है।

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त्रिवेणी पर शिप्रा नदी में मिलने वाली कान्ह नदी पर बना मिट्टी का स्टापडेम पिछले माह टूट गया था जिस कारण कान्ह का दूषित पानी लगातार शिप्रा नदी में मिलने लगा। स्थिति यह हो गई कि त्रिवेणी से लेकर चक्रतीर्थ स्टॉपडेम तक नदी में कान्ह का दूषित पानी स्टोर होने लगा। अब पीएचई द्वारा इस पानी को त्रिवेणी, गऊघाट, भूखीमाता, चक्रतीर्थ सहित कुल 5 स्टॉपडेम के गेट खोलकर आगे बहाया जा रहा है।

 

वहीं दूसरी ओर गऊघाट जलयंत्रालय पर शिप्रा नदी से पेयजल के लिये पानी लेना भी बंद कर दिया गया है। वहीं दक्षिण क्षेत्र में पेयजल सप्लाय की समस्या सामने आने के बाद सप्लाय का समय सुबह से बदलकर शाम का करना पड़ा है। पीएचई अफसरों ने बताया कि गऊघाट जलयंत्रालय से पानी पूरे दबाव से नहीं मिलने की स्थिति में दक्षिण क्षेत्र की ऊंचाई वाले क्षेत्र की टंकियां पूरी क्षमता से नहीं भर रही थीं इस कारण समय बदलकर जलप्रदाय करने का निर्णय लिया गया है।

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दूषित पानी बहाकर फिर लाएंगे नर्मदा का पानी

जनवरी माह में मकर संक्रांति पर्व स्नान के लिये पीएचई द्वारा पाइप लाइन के माध्यम से शिप्रा नदी में नर्मदा का पानी स्टोर किया गया था वहीं कान्ह के दूषित पानी को शिप्रा में मिलने से रोकने के लिये मिट्टी का स्टापडेम बनाया गया, लेकिन मिट्टी का स्टापडेम फिर टूट गया जिससे नर्मदा का पानी दूषित होने से उसे बहाना पड़ रहा है। अब नदी से दूषित पानी बहाकर फिर से नर्मदा का पानी नदी में स्टोर करने की योजना है।

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