Advertisement

बंदी को सौंपी चाबी, भीतर सीढ़ी रखवाई

जेल महानिदेशक को दौरे में खाचरौद जेल में मिली कई सारी खामियां, जेलर सहित तीन निलंबित

Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!

Advertisement

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन/खाचरौद। जेल का मैन्यूअल साफ है किसी भी जेल में किसी भी तरह की सीढ़ी भीतर नहीं रखी जा सकती है, यहां प्रहरी ने बिना जेलर की जानकारी में लाए, पुताई करने वाली सीढ़ी जेल के ही वार्ड में रखवा दी। यहीं नहीं, उसने जेल के बंदी को ही इस वार्ड की चाबी भी सौंप दी, कहां- जाओ पुताई का सामान तुम खुद ही वार्ड के भीतर रख आओ। सीढ़ी मिल गई, चाबी मिल गई फिर कौन होगा जो भागने की नहीं सोचेगा। खाचरौद जेल में यहीं हुआ।

शुक्रवार को डीजी(महानिदेशक) जेल वरुण कपूर ने खाचरौद जेल का निरीक्षण किया। वे करीब 3 घंटे तक यहां रुके। पूरे स्टॉफ से बात की, सीसीटीवी फुटेज चैक किए और जाते-जाते तीन कर्मचारी और जेलर को निलंबित करने के आदेश जारी कर गए। खाचरौद जेल के प्रभारी जेलर नवीन निनामा, प्रहरी राकेश कटारे और नीमच में पदस्थ जेलर मनोज चौरसिया को निलंबित किया गया है। डीजी जेल ने मीडियाकर्मियों को बताया कि अब तक की जांच में इस पूरे घटनाक्रम में जेल स्टाफ की स्पष्ट लापरवाही सामने आई है। जेल से फरार हुए बंदियों की धरपकड़ के लिए डीजी ने एडिशनल एसपी, खाचरौद एसडीओपी और खाचरौद टीआई तीनों की ही अलग बैठक भी ली।

Advertisement

पांच माह में दूसरी बड़ी घटना

खाचरौद में 1 अगस्त को लोकायुक्त की टीम ने प्रभारी जेलर रहे सुरेंद्र सिंह राणावत को 15 हजार रूपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथो दबोचा था। ट्रेप के बाद राणावत निलंबित हुए तो उनके स्थान पर उज्जैन से उप अधीक्षक नवीन निनामा को प्रभारी जेलर बनाकर खाचरौद भेजा गया। 20 दिसंबर को ही जेल मुख्यालय से खाचरौद में बतौर जेलर मनोज चौरसिया की नियुक्ति के आदेश जारी हुए थे। चौरसिया फिलहाल नीमच में पदस्थ है। आदेश के बावजूद भी वे ज्वाइनिंग देने खाचरौद नहीं पहुंचे लिहाजा डीजी वरुण कपूर ने उन्हें भी निलंबित कर दिया।

Advertisement

डेढ़ घंटे बाद पता चला बंदी भाग गए हैं..

खाचरौद जेल में अपहरण, हत्या और दुष्कर्म के आरोप में बंद विचाराधीन आरोपी नारायण पिता भेरुलाल जाट निवासी चंदवासला, गोपाल पिता बापूलाल निवासी मालाखेडी और गोविंद पिता आशाराम निवासी जवाहर मार्ग नागदा तीनों ही एक ही बैरक में बंद थे। इस जेल में इन तीनों सहित कुल 74 बंदी थे।

जेल में इनसे पुताई का काम करवाया जा रहा था, शाम को काम समाप्त होने के बाद जब सभी बंदियों को बैरक में ले जाया जा रहा था तब प्रहरी राकेश कटारा ने इन्हें ही नजदीक स्थित महिला वार्ड की चाबी सौंप दी। पुताई में प्रयुक्त हुए डिब्बे वार्ड में रखने के लिए चाबी भी दे दी। इस वार्ड में पुताई में प्रयुक्त बांस की सीढ़ी पहले से रखी थी।

5.30 बजे बंदी चाबी और सीढ़ी मिलने पर तीनों ही बंदी जेल की मुख्य दीवार पर चढ़े, दूसरी तरफ 20 फीट की उंचाई थी। कूदने में जान जाने का खतरा नहीं था।

शाम 7 बजे जब बैरक में बंदियों की गिनती हुई तब पता चला कि तीन बंदी कम हैं। इसके बाद इन्हें तलाशने की भागदौड़ शुरू हुई और पुलिस को सूचना दी गई।

Related Articles

Write a review