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खाचरौद जेल ब्रेक : दस दिन बाद भी नहीं मिला सुराग

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। खाचरौद उपजेल से फिल्मी अंदाज में दीवार फांदकर फरार हुए तीन कैदियों का १० दिन बाद भी सुराग हाथ नहीं लगा है। जेल विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों पर निलंबन की गाज गिराने से जहां विभाग में हड़कंप है, वहीं जांच की कछुआ गति से अब तक बंदियों का पता नहीं चला है। पुलिस अब तक केवल बैंक खातों और मोबाइल लोकेशन के भरोसे हाथ-पैर मार रही है।

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एक समय था जब सलाखों के पीछे से अपराधी भागते थे तो सिस्टम हिल जाता था लेकिन खाचरौद उपजेल में 25 दिसंबर को जो हुआ, वह सुरक्षा चूक के साथ सिस्टम कमजोर होने का संकेत है। फरार तीन कैदी संंगीन अपराधों के मुजरिम हैं, इनमें से एक पर दुष्कर्म, दूसरे पर दुष्कर्म, अपहरण और तीसरे पर हत्या का संगीन आरोप है। जेल से भागकर यह कहां गए,इसका पता अब तक नहीं चला है।

सीढ़ी लगाकर फरार हुए थे अपराधी: कैदियों के भागने की तैयारी व स्टाइल किसी थ्रिलर फिल्म जैसी थी। पुताई के लिए रखी एक साधारण सीढ़ी की मदद से कैदी नारायण जाट, गोविंद और गोपाल जेल की दीवार फांद गए थे।

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जेल प्रशासन सख्त, उठ रहे सवाल

मामले की गंभीरता को देखते हुए जेल डीजी वरुण कपूर ने तत्काल कार्रवाई करते हुए अटैच जेलर नवीन निनामा, सहायक जेल अधीक्षक मनोज चौरसिया और गेट प्रहरी रितेश कटारा को निलंबित कर दिया है। सूत्रों की मानें तो पुलिस को सूचना मिली थी कि फरार कैदी रात तक आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में ही देखे गए थे, लेकिन इन्हें पकड़ा नहीं जा सका। पुलिस अब मंदसौर, नीमच और राजस्थान में दबिश देने का दावा कर रही है, लेकिन नतीजा शून्य है।

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पुलिस की जांच तकनीकी सोर्स पर टिकी

पुलिस सूत्र बताते हैं कि वे बैंक खातों के ट्रांजेक्शन देख रहे हैं और मोबाइल टावर लोकेशन ट्रेस कर रहे हैं। लेकिन कड़वी सच्चाई यह है कि फरार कैदी कोई हाई-फाई साइबर एक्सपर्ट क्रिमिनल नहीं, बल्कि दिहाड़ी मजदूर हैं। हैरत की बात है कि जो पुलिस शातिर ठगों को खोज निकालने का दावा करती है, वह उन कैदियों का सुराग नहीं लगा पा रही है जो भागने वाली रात तक आसपास के गांवों में ही देखे गए थे।

न्यू ईयर का जश्न या जांच में सुस्ती?
चर्चा है कि पुलिस का ध्यान नए साल के लॉ एंड ऑर्डर और जश्न पर ज्यादा था। वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश का हवाला देकर 31 दिसंबर तक जांच की रफ्तार को मानो पॉज बटन पर डाल दिया गया था। अब जबकि नया साल शुरू हुए तीन दिन बीत चुके हैं। हालांकि पुलिस टीमें अब भी मंदसौर और नीमच में दबिश देने की बात कह रही हैं, लेकिन सफलता का खाता अब भी खाली है।

कौन है फरार बदमाश

नारायण पिता भेरुलाल जाट निवासी गांव चंदवासला थाना भाटपचलाना-दुष्कर्म के प्रकरण में बंद

गोपाल पिता बापूलाल निवासी मालाखेड़ी- अपहरण व दुष्कर्म के प्रकरण में बंद

गोविंद पिता आशाराम-नागदा जवाहर मार्ग निवासी हत्या के मामले में बंद

सभी आरोपी श्रमिक हैं और गुजरात, राजस्थान व नागदा में रहकर मजदूरी करते हैं।

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