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गंदे पानी के बीच चक्रतीर्थ पर अंतिम संस्कार

ये कैसा आदर्श मुक्तिधाम : सुंदर तो बनाया लेकिन गंदगी नहीं रोक सके

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ऊपरी हिस्से को बना रहे सुंदर, नीचे शवदाह स्थल की अनदेखी

 

अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। नगर निगम चक्रतीर्थ को आदर्श मुक्तिधाम को रूप में विकसित करने का दावा कर रही है। करोड़ों रुपए खर्च कर इसे सुंदर और विकसित करना बताया जा रहा है। दूसरी ओर हालात यह हैं कि गंदे पानी और बदबूदार माहौल के बीच खड़े होकर लोग ‘अपनों’ का अंतिम संस्कार कर रहे हैं।

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शहर का सबसे पुराना श्मशान चक्रतीर्थ मूल रूप से नीचे शिप्रा किनारे है। बारिश के दौरान अंतिम संस्कार के ओटले पानी में डूब जाने के कारण चक्रतीर्थ पर ऊपर का क्षेत्र विकसित किया गया। अब स्थिति यह है कि नगर निगम सिर्फ ऊपर के हिस्से को खूबसूरत और सर्वसुविधायुक्त बनाने में जुटा। शिप्रा किनारे स्थित ओटलों की न तो मरम्मत हो रही है और न ही आसपास सफाई का ध्यान रखा जा रहा है, जबकि सबसे ज्यादा अंतिम संस्कार नीचे के ओटलों पर ही होते हैं।

डंपरों के गुजरने से ड्रेनेज लाइन फूटी

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श्मशान घाट के आगे वाल्मीकि घाट पर निर्माण कार्य रहा है। वहां के लिए निर्माण सामग्री लेकर भारी वाहन, ट्रैक्टर, डंपर आदि श्मशान घाट से होकर ही गुजर रहे हैं। इन वाहनों से गिरने वाली निर्माण सामग्री के कारण न सिर्फ श्मशान घाट पर जगह-जगह गंदगी हो रही है बल्कि जगह-जगह ड्रेनेज की लाइन फूट गई हैं और इसमें से बह रहा गंदा पानी पूरे क्षेत्र को गंदा किए हुए हैं। माहौल बदबूदार बना हुआ है। हालात यह हैं कि इसी गंदगी के बीच लोग परिजनों का अंतिम संस्कार कर रहे हैं।

नगर निगम का दावा : 1 करोड़ के काम किए, आदर्श मुक्तिधाम बनाया

नगर निगम का दावा है कि चक्रतीर्थ को आदर्श मुक्तिधाम बनाया है। डेढ़ साल में 1 करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्य किए हैं। जिससे यहां की सूरत बदल गई है।

स्पेशल टेंसाइल डोम- परिसर में 76 लाख की लागत से 80 मीटर लंबा आधुनिक टेंसाइल फैब्रिक शेड लगाया गया है जो परिजनों को धूप और बारिश से बचाएगा।

ओटलों का कायाकल्प- 25 लाख खर्च कर पुराने जर्जर पतरे हटाए गए हैं। 18 शवदाह ओटलों की मरम्मत कर वहां नए शेड लगाए गए हैं।

बैठक व्यवस्था- बैठने के लिए परिसर में 50 से ज्यादा नई बेंच और कुर्सियां लगाई गई हैं। साथ ही शोकसभा हॉल का नवीनीकरण किया गया है।

सौंदर्यीकरण- पूरे परिसर की रंगाई और पुताई, नए टॉयलेट निर्माण और सफाई व्यवस्था को बेहतर किया गया है।

पीएनजी शवदाह- मुक्तिधाम में पिछले दो साल से बंद पड़ी इलेक्ट्रिक भट्टियों की समस्या को दूर करते हुए 4 नए पीएनजी (गैस) आधारित शवदाह शुरू किए गए हैं। निगम द्वारा यह सेवा मात्र 1 रुपए के प्रतीकात्मक शुल्क पर उपलब्ध कराई जा रही है। यह सभी काम नगर निगम ने चक्रतीर्थ के ऊपरी हिस्से में करवाए हैं। नीचे शिप्रा तट के अंतिम संस्कार स्थल पर कोई काम नहीं हुआ।

नीचे घाट पर विकास के लिए टेंडर जारी चक्रतीर्थ पर घाट किनारे की प्लानिंग हो चुकी है। यहां नए ओटले बनाने, सभामंडप को बड़ा करने, सीढिय़ों की संख्या कम करने, लकड़ी-कंडे ले जाने के लिए आसान मार्ग बनाने, अतिक्रमण हटाने आदि के काम होना है। इसके लिए कुछ के टेंडर निकाले भी जा चुके हैं। जल्दी काम होगा। जल्द ही चक्रतीर्थ में देश का अपनी तरह का पहला 60 फीट ऊंचा सुदर्शन चक्र स्थापित होगा। इसके लिए डिजाइन फाइनल हो चुका है। यह स्टैच्यू इतना विशाल होगा कि इसे शिप्रा नदी के बड़े पुल, दत्त अखाड़ा और बडऩगर रोड से भी स्पष्ट देखा जा सकेगा
– मुकेश टटवाल, महापौर

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