रजत पालने में झूलेंगे प्रभु, जन्मवाचन होगा

पर्युषण पर्व के चौथे दिन पाट पर विराजित अमितगुणा श्रीजी को कल्प सूत्र दिया फिर हुई ग्रंथ की पूजा
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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। जैन धर्म के आगम ग्रंथों में सर्वाधिक महत्वपूर्ण कल्पसूत्र ग्रंथ का वाचन केवल पर्युषण पर्व में ही होता है। मंगलवार को पर्व के चौथे दिन खाराकुआं स्थित श्री सिद्धचक्र केसरियानाथ तीर्थ पेढ़ी मंदिर पर पर सुबह 9 बजे मातृहृदया साध्वी अमितगुणा श्रीजी को कल्प सूत्र भेंट किया फिर इसकी मति, श्रुत, अवधि, मनपर्याय व केवलज्ञान पांच पूजा की गई। पर्व अंतर्गत आठ व्याख्यान के माध्यम से इसका वाचन होता है। जिसमें 24 तीर्थंकर के भवों का वर्णन तथा साधु-साध्वी एवं श्रावक श्राविका के कर्तव्य व जीवनचर्या के बारे में समाजजनों को जानकारी दी जाती है। मंगलवार को कल्प सूत्र के दो व्याख्यान संपन्न हुए।
पेढ़ी ट्रस्ट सचिव नरेंद्र जैन दलाल एवं मीडिया प्रभारी डॉ. राहुल कटारिया के अनुसार मंगलवार को जैन धर्म के महा मंगलकारी आठ मंगल चिन्हों की अनुकृति के भी दर्शन कराए गए। बुधवार को साध्वी मंडल की निश्रा में जन्मवाचन उत्साह के साथ मनेगा। दोपहर में जयसिंहपुरा जैन मंदिर एवं घी मंडी स्थित कांच के जैन मंदिर में जन्मवाचन समारोह मनाया जाएगा। प्रभु रजत पालने में झूलेंगे। प्रवचन के दौरान पेढ़ी ट्रस्ट जयंतीलाल जैन तेलवाला, पारस हरणिया, संजय पावेचा, अशोक हरणिया, अशोक भंडारी, प्रमोद जैन उन्हेलवाला, सुदीप धींग, संजय जैन खलीवाला, धर्मेंद्र जैन, अभय जैन भय्या, संजय संघवी, संजय कंवर, अमित भंसाली सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
ग्रंथ को आठ बार सुनने वाले मोक्ष पथ पर बढ़ते हैं
समाज के अशोक भंडारी ने बताया कि सिर्फ पर्युषण पर्व में ही कल्पसूत्र एवं अतिम संवत्सरी दिवस पर वारसा सूत्र का वाचन होता है। जो सिर्फ साधु-साध्वी ही वाचन कर सकते हैं। मान्यता है कि आठ बार विधिपूर्वक इसे श्रवण करने वाला व्यक्ति सात जन्म के पश्चात् मोक्ष पथ पर अग्रसर हो सकता है। इसलिए बहुत बड़ी संख्या में संपूर्ण जैन समाजजन इन ग्रंथों का श्रवण करते हैं। इधर महापर्व के आठ दिन सभी नित्य प्रभु पूजन, व्याख्यान, प्रतिक्रमण, आरती एवं तपस्या में लीन रहते है। सभी समाजजन हरी सब्जी का उपयोग भी नहीं करते हैं।