Thursday, February 2, 2023
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महाकाल लोक : वाटर कूलर्स में आने लगा पानी, सूचना बोर्ड भी लगाए जा रहे

दीपावली अवकाश समाप्त होने के बाद अब भीड़ का दबाव भी हुआ कम…

खबर का असर…उज्जैन।श्री महाकाल लोक में लगाए गए वाटर कूलर्स में पानी आने लगा है। वहीं सूचना बोर्ड भी लगा जा रहे हैं। जो वाटर कूलर्स टूट गए थे उनका भी संधारण कर दिया गया है। इधर महाकाल लोक में अवकाश समाप्त होने के बाद अब धीरे-धीरे भीड़ का दबाव कम होने लगा हैं।

दीपावली के बाद से ही श्री महाकाल लोक देखने के लिए भीड़ उमड़ रही थी। दर्शनार्थियों की संख्या बढ़कर दो लाख से अधिक हो गई थी। इससे महाकाल लोक की व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ा था और खामियांं भी उजागर होने लगी थी। वाटर कूलर्स में कुछ ही देर में पानी खत्म हो रहा था।

लोगों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ रहा था। भीड़ अधिक होने पर लोगों ने वाटर कूलर्स के ढक्कन ही उखाड़ दिए थे। अक्षर विश्व ने इन अव्यवस्थाओं पर समाचार प्रकाशित किया। इसके बाद समिति ने भी सुध ली। क्षतिग्रस्त कूलर्स की मरम्मत कर दी गई है।

नए बोर्ड बनकर आए, जगह-जगह पर लगा रहे

मंदिर समिति द्वारा नए सूचना बोर्ड बनवाए गए हैं। इन्हें महाकाल लोक में लगवाया जा रहा है। इससे यहां आने वालों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना नहीं पड़ेगा। वहीं महाकाल लोक से होकर ही मंदिर में मानसरोवर द्वार से प्रवेश दिया जा रहा है। इसका बोर्ड भी बनवाया गया है जिसे लगाया गया हैं। समिति द्वारा चार-पांंच स्थानों पर वाटर कूलर्स के लिए स्थान निर्धारित किया गया है।

सोशल मीडिया पर कमेंट्स…

सोशल मीडिया पर भी श्री महाकाल लोक की व्यवस्थाओं को लेकर सवाल उठते रहते हैं। इसमें बताया गया है कि यहां के मैनेजमेंट को बुजुर्गों और दिव्यांगों का ध्यान रखना चाहिए। उन्हें ही ई-रिक्शा की सुविधा दी जाना चाहिए।

ई-रिक्शा में पात्र दर्शनार्थियों के अनुमति पत्र की अनिवार्यता करनी चाहिए। ताकि अन्य कोई वाहनों पर सवार नहीं हो सकें।

ई-कार्ट, रिक्शा की सुविधा से वंचित बुजुर्ग और दिव्यांग

श्री महाकाल लोक को देखने के लिए ई-कार्ट की सुविधा भी निशुल्क मंदिर समिति द्वारा उपलब्ध करवाई गई हैं। ये सिर्फ बुजुर्गों, दिव्यांगों, गर्भवती महिलाओं के लिए हैं।

लेकिन इसका लाभ इन लोगों को मिल ही नहीं पा रहा हैं। इसमें सबसे ज्यादा युवक-युवतियां बैठे नजर आते हैं। इन्हें रोकने वाला कोई नहीं है और चालक भी अपने लाभ की खातिर कुछ नहीं करते। दिव्यांग और बुजुर्ग इस विशाल क्षेत्र में पैदल ही घूमते दिखाई देते हैं।

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