गुजरात और तमिलनाडु के बाद एमपी बनेगा टैक्सटाइल हब

कपड़ा उत्पादकों की सबसे बड़ी संस्था मेटेक्सिल को पसंद आई मोहन सरकार की टैक्सटाइल पॉलिसी, विक्रम उद्योगपुरी में टटोली संभावनाएं
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1954 में स्थापित इस संस्था के भारत में 5 हजार सदस्य
विनोदसिंह सोमवंशी:उज्जैन। गुजरात, तमिलनाडु के बाद मध्यप्रदेश देश का तीसरा टैक्सटाइल हब बनने जा रहा है। कपड़ा उत्पादकों की सबसे बड़ी संस्था मेटेक्सिल को मोहन सरकार की टैक्सटाइल पॉलिसी पसंद आ गई है।
कई मामलों में यह नीति गुजरात सरकार से भी आगे है। एमपी की लोकेशन, सस्ता श्रम और कच्चे माल की भरपूर उपलब्धता को देखते हुए मेटेक्सिल यहां बड़े पैमाने पर उद्योग लगाने पर सहमत हो गई है। संस्था सदस्यों ने विक्रम उद्योगपुरी का मुआयना भी किया। ईडी राजेश राठौर ने उन्हें विक्रम उद्योगपुरी में उपलब्ध प्लॉट और सुविधाओं की जानकारी दी।
मेनमेड एंड टेक्नीकल टैक्सटाइल्स एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (मेटेक्सिल) टैक्सटाइल इंडस्ट्रीज की देश की सबसे बड़ी और पुरानी संस्था है। 1954 में स्थापित इस संस्था के भारत में 5 हजार सदस्य हैं और यह हर साल 10 बिलियन डॉलर यानी 84 हजार करोड़ रुपए का कारोबार करते हंै। 2030 तक संस्था अपने सदस्यों का बिजनेस 30 बिलियन डॉलर तक पहुंचाना चाहती है और इसके लिए वह नए क्षेत्र तलाश रही है। उसकी यह खोज मध्यप्रदेश में पूरी हो गई है। मोहन सरकार ने इंदौर में टैक्सटाइल सेमिनार में मेटेक्सिल के पदाधिकारियों को टैक्सटाइल पॉलिसी बताई थी।
क्यों रास आ रहा प्रदेश
1.लोकेशन- मध्यप्रदेश देश के बीचोंबीच है। यहां रेल, सडक़ का मजबूत नेटवर्क है।
2.सस्ता श्रम- मध्यप्रदेश में श्रमिक आसानी से मिल जाते हैं और इनकी मजदूरी भी अन्य राज्यों की तुलना में काफी कम है।
3. कच्चा माल- टैक्सटाइल इंडस्ट्रीज के लिए पॉलिस्टर और विस्को की आवश्यकता है। ग्रेसिम इंडस्ट्रीज रोजाना 450 टन विस्को का निर्माण करती है। पॉलिस्टर भी आसपास के राज्यों से आसानी से आ सकता है।
4.सस्ती बिजली- मप्र सरकार टैक्सटाइल उद्योग के लिए ४.५० रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली दे रही है, जबकि गुजरात में यह दर 8.50 रुपए है।
5.सस्ती जमीन- मप्र सरकार सस्ती दर पर उद्योगों को जमीन मुहैया करा रही है।
6. सब्सिडी- मप्र सरकार भवन निर्माण, एक्सपोर्ट पर सब्सिडी दे रही है। वह कई तरह के इंसेंटिव भी दे रही है।
7.पारदर्शिता- मप्र में जमीन आवंटन से लेकर सब्सिडी तक में पारदर्शिता है।
विक्रम के विद्यार्थियों से मिले पदाधिकारी विक्रम विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने भी कुलगुरु अपर्ण भारद्वाज के साथ मेटेक्सिल पदाधिकारियों से चर्चा की और उन्हें श्री महाकालेश्वर मंदिर के निर्माल्य से तैयार सामग्री दिखाई।
उद्योगपति बोले- एमपी टैक्सटाइल इंडस्ट्रीज के लिए बेहतर जगह
मध्यप्रदेश इस वक्त टैक्सटाइल इंडस्ट्रीज के लिए बहुत अच्छी जगह है। यहां प्रधानमंत्री मित्र पार्क है और सरकार की अभूतपूर्व पॉलिसी है। अच्छे ईको सिस्टम को देखते हुए मेटेक्सिल सदस्य यहां निवेश करने के इच्छुक हैं। -संजीव सरन, पूर्व अध्यक्ष, मेटेक्सिल
हमने विक्रम उद्योगपुरी का मुआयना किया। है। मध्यप्रदेश टैक्सटाइल का अच्छा हब बन सकता है। यहां की पॉलिसी दूसरे स्टेटों से ज्यादा अच्छी और फायदेमंद है। हम अपने सदस्यों के साथ बात करेंगे और मध्यप्रदेश में उद्योग लगाएंगे। -रौनक रूघानी,पूर्व अध्यक्ष, मेटेक्सिल
मप्र में बिजली दर काफी कम है। सरकार इंसेंटिव भी अच्छा दे रही है। यहां निवेश करने पर 200 फीसदी फायदा है। एक्सपोर्ट के हिसाब से भी लोकेशन अच्छी है। मैं कह सकता हूं कि अब इंडस्ट्रीज में गुजरात के बाद मध्यप्रदेश का नंबर आएगा। -दिनेश मोदी, टैक्सटाइल कारोबारी, गुजरात
एमएसएमई के लिए एमपी में बेहतर पॉलिसी है। पॉजीटिव माहौल है। गुजरात में इंडस्ट्रीज डेवलप हो चुकी है। मध्यप्रदेश में अच्छी संभावना है। यहां इंसेंटिव गुजरात से ज्यादा है। पॉवर कॉस्ट काफी कम है। टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज में पावर और लेबर सबसे महत्वपूर्ण पार्ट हंै। -धीरूभाई शाह, शॉलेन ग्रुप, सूरत
मेटेक्सिल के पदाधिकारियों ने विक्रम उद्योगपुरी का मुआयना किया है। उन्हें प्रोजेक्ट की जानकारी दी है। उन्हें जगह पसंद आई है।-राजेश राठौर, ईडी, एमपीआईडीसी, उज्जैन










