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शिवरात्रि के लिए शिप्रा में छोड़ा नर्मदा का पानी

साधु-संत के आंदोलन के बाद जागा जिला प्रशासन…

पीएचई अफसर बोले- कलेक्टरेट, एनवीडीए और जल संसाधन विभाग की कार्रवाई

अक्षरविश्व न्यूज|उज्जैन। मकर संक्रांति पर्व हो या अन्य कोई त्यौहार। नगर निगम आयुक्त और पीएचई अफसरों की अनदेखी और लापरवाही के चलते श्रद्धालुओं को शिप्रा नदी में शामिल कान्ह के दूषित पानी में ही स्नान करना पड़ रहा था। त्रिवेणी के बाद नदी में मिल रहे नालों से नदी का पानी स्नान व आचमन योग्य भी नहीं बचा। साधु-संतों ने पिछले दिनों नदी के कीचड़ में उतरकर प्रशासन को चेतावनी दी। उसके बाद अब शिप्रा नदी में नर्मदा का साफ पानी मिलाने का काम शुरू हुआ है।

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कान्ह के दूषित पानी को शिप्रा नदी में मिलने से रोकने के लिए जल संसाधन विभाग के पास कोई ठोस योजना नहीं है। जब तक कान्ह डक्ट योजना पूरी नहीं होती दूषित पानी इसी तरह शिप्रा नदी में मिलता रहेगा। त्रिवेणी पर मिट्टी का स्टॉपडेम विभाग ने बनाया और बीच में पाइप डाल दिए जिससे कान्ह का दूषित पानी एक साथ न मिलकर धीमी गति से शिप्रा नदी में मिलता रहे।

लगातार शिप्रा नदी में कान्ह का दूषित पानी मिलने से हालात यह हो गए कि त्रिवेणी से लेकर सिद्धनाथ घाट तक दूषित, केमिकल युक्त बदबूदार पानी शिप्रा नदी में स्टोर हो गया। बची कसर नालों ने पूरी कर दी। शिप्रा नदी में आधा दर्जन से अधिक नाले भी कान्ह के दूषित पानी की तरह मिल रहे हैं। पिछले दिनों साधु-संतों ने शिप्रा नदी में उतरकर प्रशासन को चेतावनी दी। दूषित पानी को तत्काल बहाने, साफ पानी स्टोर करने की मांग की और चेताया कि यदि प्रशासन नदी में स्वच्छ पानी स्टोर नहीं करता है तो आंदोलन किया जाएगा।

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कान्ह के पानी को रोकने की कोशिश, नदी में बहा रहे नर्मदा का पानी

पीएचई से मिली जानकारी के मुताबिक कलेक्टर ने एनवीडीए को नर्मदा का पानी पाइप लाइन से उज्जैन पहुंचाने के लिए पत्र लिखा था। वर्तमान में गउघाट आउटलेट से नर्मदा का पानी सीधे शिप्रा नदी में छोड़ा जा रहा है। जबकि कान्ह के दूषित पानी को त्रिवेणी स्टॉपडेम पर रोकने की बात अफसर कह रहे हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि जिन पीएचई अफसरों के पास शिप्रा नदी में साफ पानी स्टोर करने की जिम्मेदारी है उनका यह पहला अनुभव है।

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ईई पर कलेक्टर की गाज गिरी

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के ईई एनके भास्कर को सीएम हेल्पलाइन में शिकायतों के निराकरण में लापरवाही बरतने पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। विभाग में इस बात की चर्चा रही कि भास्कर को बेशक सीएम हेल्पलाइन के मामले में नोटिस दिया हो, लेकिन यह पूरा मामला शिप्रा के जल से जुड़ा हुआ है। अब देखना है कि कलेक्टर इस मामले में क्या निर्णय लेते हैं?

ईई भास्कर फटकार के बाद अवकाश पर

साधु-संतों की फटकार को प्रशासन ने हाथों-हाथ लिया। कलेक्टर नीरज कुमार सिंह ने नगर निगम आयुक्त, पीएचई ईई एनके भास्कर को तलब किया। शिप्रा नदी के पानी की स्थिति की जानकारी ली। जब कलेक्टर सिंह को सच्चाई पता चली तो उन्होंने ईई भास्कर को फटकार लगाई। स्थिति यह बनी कि भास्कर छुट्टी पर चले गए। अब शहर का प्रभार उपयंत्री शिवम दुबे के पास है।


नगर निगम, पीएचई द्वारा कलेक्टर को नर्मदा का पानी शिप्रा नदी में लाने के लिए कोई पत्र नहीं लिखा गया। कलेक्टर स्तर पर ही एनवीडीए से संपर्क का नर्मदा का पानी मंगाया गया है जो गउघाट आउटलेट पर पहुंच रहा है। इस पानी को हम सीधे शिप्रा नदी में मिला रहे हैं। साफ पानी को रामघाट तक स्टोर किया जाएगा। कान्ह का दूषित पानी शिप्रा में मिल रहा है या नहीं इसकी जानकारी और जवाबदारी जल संसाधन विभाग की है। एनवीडीए, जल संसाधन विभाग और कलेक्टर कार्यालय के समन्वय से ही शिप्रा नदी में नर्मदा का पानी आ रहा है। नगर निगम, पीएचई की इसमें कोई भूमिका नहीं है।-शिवम दुबे, उपयंत्री पीएचई

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