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आखिर 9 रुपए में 250 एमएल दूध कैसे मिलता है जिला अस्पताल के मरीजों को?

नेशनल क्वालिटी एश्योरेंस टीम ने निरीक्षण के दूसरे दिन किया सवाल…..

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सरकार के 2013 के रेट 11 साल बाद भी चल रहे शासकीय भोजनशाला में

अक्षरविश्व न्यूज|उज्जैन। सरकारी अस्पताल का राज्य शासन द्वारा क्वालिटी एश्योरेंस कराया जा रहा है। इसके लिए दो सदस्यीय टीम मंगलवार से चरक अस्पताल का निरीक्षण कर रही है। टीम द्वारा यहां मरीजों को शासन की तरफ से मिलने वाली सुविधाओं, उपचार, जांच सहित सभी आवश्यकताओं का आंकलन किया जा रहा है। पहले दिन का निरीक्षण रात 8 बजे तक चला। बुधवार सुबह टीम के दोनों अफसरों ने अलग-अलग विभागों में पहुंचकर शासन द्वारा निर्धारित पाइंट्स पर जांच की।

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डॉ. माधव हसानी ने अपने निरीक्षण की शुरूआत चरक अस्पताल की शासकीय भोजनशाला से की। उन्होंने गेट पर लगा डाइट चार्ट देखा। चार्ट में मरीजों को दिए जाने वाले नाश्ता, भोजन, चाय, दूध आदि की संख्या, रेट लिखे थे। इसके बाद उन्होंने किचन, स्टोर रूम, टायलेट आदि का भी बारीकि से निरीक्षण किया। इस दौरान डायटिशियन के.एस. परमार ने भोजनशाला की व्यवस्थाओं के संबंध में डॉ. हसानी को जानकारी दी।

स्टाफ को ट्रेनिंग, मरीजों के लिए पीने का पानी जरूरी : डॉ. मंडवारिया

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क्वालिटी एश्योरेंस टीम के दूसरे सदस्य डॉ. सौरभ मंडवारिया चरक अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में निरीक्षण कर रहे थे। उन्होंने यहां मौजूद स्टाफ से मरीजों को भर्ती करने, यहां से वार्ड में शिफ्ट करने की प्रक्रिया के बारे में जानकारी प्राप्त की। अक्षर विश्व से चर्चा में डॉ. मंडवारिया ने कहा कि मंगलवार को आईसीयू, पीआईसीयू, ऑपरेशन थिएटर सहित अन्य वार्डों और विभागों का निरीक्षण किया है। जिला चिकित्सालय अभी चरक अस्पताल में शिफ्ट हुआ है। स्टाफ को ट्रेनिंग की आवश्यकता है।

लिफ्ट की समस्या भी सामने आई है। उन्हें जब मरीजों को पीने के पानी की समस्या के बारे में बताया गया तो डॉ. मंडवारिया का कहना था कि हम अपनी रिपोर्ट में इसे मेंशन करेंगे। यह रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी। हालांकि वर्तमान में समस्या के समाधान के लिए सिविल सर्जन को निर्देशित करने की बात भी उन्होंने कही।

ऐसे चला सवाल-जवाब का दौ

डॉ. हसानी ने पूछा कि 9 रुपए में 250 एमएल दूध मरीजों को किस तरह उपलब्ध करा रहे हैं।

डायटिशियन परमार ने उन्हें बताया कि अवकाश के दिन, मरीजों की संख्या कम ज्यादा होने की स्थिति में बचत करके काम चला लेते हैं।

इस रेट का निर्धारण किसने किया है

शासन द्वारा वर्ष 2013 में प्रकाशित राजपत्र में भोजन, चाय, दूध, नाश्ते के उपयोग में आने वाली सामग्री की रेट लिस्ट प्रकाशित हुई है।

रेट बढ़ने पर शासन को पत्र लिखा है

परमार का कहना था कि खाद्य सामग्री के रेट बढ़ने पर शासन को कोई पत्र नहीं लिखा गया है। पूर्व सिविल सर्जन डॉ. वर्मा को इससे कई बार अवगत कराया गया था।

प्रसुताओं व मरीजों की डाइट कैसे मेंटेन करते हैं

शासन द्वारा निर्धारित गाइड लाइन के अनुसार गर्भवती महिलाओं के भोजन का डाइट चार्ट अलग है एवं वार्डों में भर्ती मरीजों के भोजन का चार्ट अलग है। प्रसूताओं को पौष्टिक भोजन के अलावा मेवे के लड्डू, फल आदि भी उपलब्ध कराए जाते हैं।

 कैसे मेंटेन करते हैं रेट

आप लोग 11 वर्ष पुराने रेट में मरीजों को कैसे भोजन, नाश्ता, चाय, दूध उपलब्ध करा रहे हैं यह समझ से बाहर है। आज दूध का रेट उज्जैन में 60 रुपए प्रति लीटर हो चुका है। ऐसे में 9 रुपए में 250 एमएल दूध कहां से और कैसे खरीद रहे हैं।

भोजनशाला आउटसोर्स को देने की योजना क्या है

सिविल सर्जन डॉ. अजय दिवाकर ने डॉ. हसानी को बताया कि शासन द्वारा सरकारी अस्पताल की भोजनशाला को आउटसोर्स के माध्यम से संचालित किए जाने की योजना बनाई है। इसके लिए सीएमएचओ के आदेश पर टेंडर निकाले जा चुके हैं। चार बार ऑनलाइन टेंडर हुए। इसमें भाग लेने वालों ने समान रेट डाले इस कारण ठेका नहीं हो पाया। डॉ. दिवाकर ने कहा कि कलेक्टर से मंजूरी लेकर पुन: टेंडर निकाला जाएगा।

एमवाय की तरह व्यवस्था भी कर सकते हैं

डॉ. हसानी ने कहा कि इंदौर एमवाय में मरीजों के लिए भोजन की व्यवस्था खजराना मंदिर की भोजन व्यवस्था संभालने वाले ठेकेदार द्वारा की जाती है। उज्जैन में भी महाकालेश्वर मंदिर का अन्नक्षेत्र है। मंदिर के प्रशासक स्वयं कलेक्टर हैं। उनसे चर्चा कर शासकीय अस्पताल में भोजन व्यवस्था की जा सकती है।

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