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लापरवाही: फॉगिंग नहीं होने से मच्छरों के डंक झेल रहे शहरवासी

गर्मी के साथ ही बढ़ा मच्छरों का प्रकोप, दिन में बच पाना मुश्किल, नगर निगम का ध्यान ही नहीं

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन गर्मी बढऩे के साथ शहर में मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ गया है, वहीं नगर निगम द्वारा सभी क्षेत्रों में फॉगिंग नहीं की जा रही है। वीआईपी क्षेत्रों को छोड़कर अधिकतर वार्डों में अब तक फॉगिंग वाहन नहीं पहुंच रहे हैं। शहर में बेहतर तरीके से साफ-सफाई नहीं होने की वजह से मच्छरों का प्रकोप बढ़ा है। हालात यह है कि रात तो रात दिन में भी मच्छरों से बचना मुश्किल हो गया है। आने वाले समय में डेंगू-चिकनगुनिया का प्रकोप भी बढ़ सकता है।

गर्मी का मौसम और इस पर मच्छरों के डंक ने शहरवासियों के दिन का चैन् और रात की नींद छीन ली है। मच्छरों से निपटने के लिए नगर निगम के पास 6 जोन पर पांच फॉगिंग मशीन हैं और इनमें भी दो बंद पड़ी हैं। नतीजतन जिस वार्ड में एक बार फॉगिंग हो गई, दोबारा उसका नंबर महीनों बाद आ रहा है। कई वार्ड तो ऐसे भी हैं, जिनमें तीन-चार महीने से फॉगिंग नहीं हुई है। इन दिनों शहर मच्छरों की समस्या से परेशान है।

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शाम होते ही घरों में मच्छरों का आतंक फैल जाता है। इनसे बचने के लिए शहरवासियों को निजी खर्च पर जतन करना पड़ रहे हैं लेकिन निगम की ओर से उन्हें कोई खास सहारा नहीं मिल रहा। पूरे शहर के लिए निगम के पास चालू स्थिति में महज दो फॉगिंग मशीन हैं, जिनसे एक दिन में तीन-चार वार्डों में ही फॉगिंग हो पाती है। शेष दो मशीन लंबे समय से खराब पड़ी हैं। उन क्षेत्रों में स्थिति और भी अधिक खराब हैं, जहां नालियों की सफाई नहीं हो रही है। इससे बीमारी फैलने की आशंका बनी रहती है।

गलियों तक पहुंच ही नहीं पाती मशीन

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वर्तमान में 6 जोन के बीच तीन फॉगिंग मशीनें दौड़ रही हैं। एक मशीन एक वार्ड में एक-डेढ़ घंटे फॉगिंग करती है। एक वार्ड की औसत जनसंख्या 10 हजार है। इतने समय में मशीन वार्ड अंतर्गत कॉलोनियों के प्रमुख मार्गों पर ही चल पाती है। गलियों तक तो धुआं पहुंच ही नहीं पाता।

व्यवस्था से जुड़े कर्मचारियों का दावा है कि फॉगिंग के लिए पहले से शेड्यूल तैयार कर रखा है। किस दिन किस वार्ड में मशीन चलेगी, इसका चार्ट तैयार है। इन दावों से अलग कई पार्षदों का कहना है कि उन्हें फॉगिंग का शेड्यूल नहीं दिया गया है। उनके वार्ड में मशीन कब आएगी और कब नहीं आएगी इसकी उन्हें जानकारी नही है।

जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. आरएस जाटव ने बताया कि वे शाजापुर जिले के साथ-साथ उज्जैन जिले में जिला मलेरिया अधिकारी का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे हैं। आम दिनों में भी वे महीने में एक या दो बार उज्जैन कार्यालय आ पाते हैं। आचार संहिता लग गई है और उन्हें शाजापुर में निर्वाचन के लिए सेक्टर मजिस्ट्रेट बनाया गया है। अब वे 4 जून के बाद ही उज्जैन आ पाएंगे। इस दौरान विभाग में कोई काम नहीं हो सकेगा। मलेरिया व अन्य अभियान भी इलेक्शन के बाद ही शुरु हो पाएंगे।

घरों में खर्च, बाजार में बढ़ी मांग

मच्छर बढऩे से लोगों का खर्च बढ़ गया है। तीन-चार कमरों के घर वाले औसत परिवार को हर कमरे मॉस्कीटो क्वाइल या अन्य पर 200-400 रुपए अतिरिक्त खर्च करना पड़ रहे हैं। नागरिकों का कहना है कि दिन में भी मच्छरों की परेशानी है। शाम होते ही मच्छर बढ़ जाते हैं। मॉस्कीटो नेट, क्वाइल आदि के लिए औसत हर महीने अतिरिक्त खर्च हो रहे हैं। मेडिकल संचालकों के अनुसार कुछ दिनों में मच्छरों को मारने संबंधित क्रीम-दवा आदि की मांग में लगभग 40 फीसदी बढ़ोतरी हो गई है।

अधिकारी विहीन मलेरिया विभाग

इधर इधर शहर में गर्मी की दस्तक के बाद से मच्छरों की भरमार होने लगी है। हालत यह है कि मार्च महीने के दूसरे सप्ताह में ही शाम ढलते ही मच्छरों के कारण शहरवासियों को परेशानी होने लगी है। दूरदराज की कॉलोनियों में तो अंधेरा होते ही मच्छरों के झुंड सक्रिय हो रहे हैं। शहरी क्षेत्र में भी यही स्थिति बनी हुई है।

जिला मलेरिया विभाग फिलहाल अधिकारी विहीन है। गर्मी शुरु होने से पहले ही शहर में मच्छरों की भरमार होने लगी है। इधर लोकसभा चुनाव के लिए आचार संहिता भी लग गई है। जिले में यह 4 जून तक प्रभावशील रहेगी। ऐसे में इस बार मलेरिया विभाग के डेंगू, मलेरिया और चिकनगुनिया के संदिग्ध मरीजों की जांच का अभियान भी निर्धारित समय के बाद शुरु हो पाएगा। जिला मलेरिया अधिकारी का कहना है कि इन तीन महीनों में विभाग में इस तरह का कोई अभियान नहीं चलेगा, क्योंकि अब वह खुद जून महीने में उज्जैन आएंगे।

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