सप्तसागरों की बदहाली पर एनजीटी सख्त, मुख्य सचिव को दखल देने के निर्देश

उज्जैन। शहर के ऐतिहासिक सप्तसागरों की स्थिति पर नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने नाराजगी जताई है। एनजीटी ने स्पष्ट कहा है कि निर्देशों के पालन में प्रशासन की ओर से प्रतिबद्धता और ईमानदारी की कमी है जिसे हल्के में नहीं लिया जाएगा। एनजीटी की सेंट्रल झोन बेंच ने प्रशांत मौर्य और बाकिर अली रंगवाला की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए शुक्रवार को कहा कि नगर निगम आयुक्त और कलेक्टर ने न तो पूर्व में जारी निर्देशों का सही से पालन किया और न ही प्रगति रिपोर्ट के संबंध में समय पर हलफनामा दाखिल किया। ट्रिब्यूनल ने अब प्रदेश के मुख्य सचिव कोनिर्देश दिए हैं कि वे कलेक्टर और निगम कमिश्नर को निर्देशित कर तालाबों से अतिक्रमण हटवाएं व पानी की गुणवत्ता में सुधार सुनिश्चित करें।
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गोवर्धन सागर- 36 में से 18 बीघा पर कब्जा: याचिका में रुद्रसागर, पुष्कर सागर, क्षीरसागर, गोवर्धन सागर, रत्नाकर सागर, विष्णु सागर और पुरुषोत्तम सागर के धार्मिक व ऐतिहासिक महत्व का हवाला दिया है। राजस्व रिकॉर्ड के अनुसार गोवर्धन सागर खसरा नंबर 1281 पर 36 बीघा जमीन में दर्ज है। वर्तमान में इसमें से 18 बीघा जमीन पर अतिक्रमण है। अगस्त 2024 के आदेश के बाद हुई जांच में तालाबों में सीवेज मिलने व अतिक्रमण की पुष्टि हुई थी लेकिन दो साल बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
अगली सुनवाई 20 फरवरी को
ट्रिब्यूनल ने पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देशों के अनुपालन की निगरानी करने के आदेश दिए हैं। शासन से दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट तलब की गई है। मामले की अगली सुनवाई 20 फरवरी को होगी।









