Sunday, September 24, 2023
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Parenting Tips : अपने बच्चों के साथ कैसे संवारें अपने रिश्ते…

उम्र के इस नाज़ुक मोड़ पर ना आप उन्हें समझ पाते हैं, ना ही वे आपको

जब बच्चे छोटे होते हैं, तो आपके इर्द-गिर्द मंडराते रहते हैं। दिल में आया हर ख़्याल आपसे बांटते हैं। आपका साथ उन्हें अच्छा लगता है, लेकिन वही बच्चे जब किशोरावस्था में क़दम रखते हैं तो सबकुछ बदल जाता है। अब वे आपसे ज़्यादा, अपने दोस्तों के साथ रहना पसंद करते हैं। अब वे आपको कुछ नहीं बताते। आप कुछ समझाने जाएं, तो वे और झल्लाते हैं, चिढ़ते हैं और आपसी दूरियां बढ़ती ही जाती हैं। उम्र के इस नाज़ुक मोड़ पर ना आप उन्हें समझ पाते हैं, ना ही वे आपको। यह ऐसी उम्र है, जहां आप उन्हें सज़ा नहीं दे सकते, डरा-धमका नहीं सकते, चूंकि ऐसा करने पर वे और बिगड़ेंगे।

आप बच्चें के लिए रोल मॉडल, वे आपको देखकर बहुत कुछ सीखते हैं, इसलिए संतुलन बरतें

किशोरों में साइबर क्राइम, वॉइलेंट बिहेवियर और ड्रग अब्यूज़ जैसी समस्याएं तेज़ी से बढ़ रही हैं। इसीलिए यह ज़रूरी हो जाता है कि आप उन्हें समझें। उन पर चीखऩे-चिल्लाने से बचें। यदि आप उनसे आक्रामक शैली में बात करेंगे, तो वे और हिंसक हो सकते हैं। याद रखें कि आप उनके लिए रोल मॉडल हैं। वे आपको देखकर बहुत कुछ सीखते हैं और वही करने लगते हैं। इसलिए ज़रूरी है कि उन्हें समझाते हुए अपने शब्दों और शैली का ध्यान रखें।

डराने-धमकाने या मारपीट का ताउम्र बना रहता है बच्चें पर असर

कई शोध और अध्ययनों में पाया गया है कि जिन बच्चों पर पैरेंट्स हाथ उठाते हैं, डराते-धमकाते हैं, उन पर ताउम्र इसका नकारात्मक असर रहता है। यह उनके व्यक्तित्व के विकास में बाधक बनता है। किसी भी स्थिति में मारपीट नहीं करें। यदि आप बहुत ग़ुस्से में हैं, तब कुछ देर के लिए उनसे दूर हो जाएं, गहरी सांस लें और फिर उनके पास जाएं।

तंज़ कसने या मज़ाक उड़ाने के रवैये में बात नहीं रखें

किशोरावस्था ऐसी उम्र होती है, जहां आप उन्हें बच्चे की तरह ही देखते हैं, लेकिन वे ख़ुद को वयस्क ही मानते हैं। ऐसे में आप मज़ाक उड़ाने के अंदाज़ में उनसे बात करेंगे, तो उनकी झल्लाहट और बढ़ेगी।पैरेंटिंग विज्ञान नहीं, कला है। इसके कोई निश्चित नियम नहीं है, बल्कि हालात को देखते हुए आपको कभी कड़ाई से, तो कभी प्यार से उन्हें समझाना होगा। अपनी नाराजग़ी ज़रूर जताएं, साथ ही यह भी एहसास दिलाते रहें कि आप उन्हें भली-भांति समझते हैं। ? कई मर्तबा ऐसा होता है कि कुछ मामलों में आप उनसे खुलकर अपना ग़ुस्सा या नाराजग़ी नहीं ज़ाहिर कर सकते। आपको लगता है कि आप बच्चों को गु़स्से में कुछ कहेंगे, तो वे आपको और ग़लत समझेंगे। ऐसे में परिवार के किसी सदस्य, दोस्त, स्कूल काउंसलर, स्पोर्ट्स कोच की मदद ली जा सकती है।

बच्चों के सामने कैसे ज़ाहिर करें नाराजग़ी?

किशोरों में ग़ुस्सा, चिड़चिड़ापन, नाराजग़ी और बदतमीज़ी से बात करने की आदत आम है। लेकिन इससे घबराएं नहीं। जिन बातों को लेकर आप उनसे नाराज़ हों, शांति से पहले उनके समूचे पक्ष को सुनें और फिर बताएं कि आप उनसे क्यों नाराज़ हैं। ? साफग़ोई से अपनी बात रखें। उन्हें विस्तार से यह समझाने की कोशिश करें कि आप उन्हें अगर कुछ करने से रोक रहे हैं, तो इसकी वजह क्या है। इससे उन्हें क्या नुक़सान हो सकते हैं? अगर उन्हें ग़ुस्से में कुछ करने से मना करेंगे, तो वे आपकी बात क़तई नहीं मानेंगे।अगर आप यह समझ नहीं पा रहे हैं कि उन पर अपनी नाराजग़ी कैसे ज़ाहिर करें, तो सबसे पहले बातचीत ऐसे विषय से शुरू करें, जिसमें उनकी रुचि हो। जैसे, किसी खेल या हल्के-फुल्के विषय से बात शुरू करें। फिर धीरे-धीरे जब माहौल थोड़ा सहज होने लगे, तब अपनी बात रखें।

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