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सत्ता में भागीदारी, निगम-मंडल में पद पाने की कवायद

भोपाल से दिल्ली दरबार तक नेताओं के फेरे

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अक्षरविश्व न्यूज. उज्जैन:सरकार गठन के मप्र में 7 और देश में एक माह हो चुका है। सरकार ने काम की रफ्तार पकड़ ली है। अब चुनाव मैदान में उतरने से वंचित और चुनाव के दौरान काम करने वालों के बीच सत्ता में भागीदारी, निगम-मंडल में पद पाने की लालसा बढ़ चुकी है। इसके लिए तरह-तरह के जतन किए जा रहे है। नेता भोपाल से लेकर दिल्ली दरबार तक फेरे लगा रहें।

 

पद पाने के लिए अनेक नेता अपने साथ अपनी उपलब्धियों के ब्यौरे के साथ ही पूर्व में मिले आश्वासनों का पुलिंदा लेकर भी चल रहे हैं। उन्हें सत्ता में भागीदारी के लिए जो नेता मददगार साबित होने वाला लगता है, उसे अपनी बायोडाटा वाली फाइल थमा दी जाती है। यह वे नेता हैं, जिन्हें विधानसभा और लोकसभा चुनाव में दावेदारी के बाद भी टिकट नहीं दिया था। यही वजह है कि अब यह नेता चाहते हैं कि उन्हें निगम मंडल में भागीदारी मिल जाए।

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निगम मंडलों के दावेदार संगठन के नेताओं और पदाधिकारियों के साथ वरिष्ठों से मेल-मुलाकात करने में लगे हैं। बता दें कि भाजपा की मध्यप्रदेश कार्यसमिति की बैठक में संगठन नेताओं ने इस बात के संकेत दिए थे कि जिन नेताओं ने चुनाव में अच्छा काम किया है और पार्टी के हर फैसले के साथ रहे हैं।

पार्टी उनका पूरा ख्याल रखेगी। इसके बाद से ही निगम मंडलों में पदों पर नियुक्ति को लेकर हलचल शुरु हो गई थी। इनमें अधिकांश वे नेता शामिल हैं, जो विधानसभा चुनाव के समय किन्हीं कारणों से टिकट से वंचित कर दिए गए थे । इसके बाद भी उन्होंने पार्टी द्वारा तय प्रत्याशी के पक्ष में पूरे मन से काम किया। ऐसे वरिष्ठ नेता अब निगम-मंडलों एवं प्राधिकरणों में अपनी तैनाती चाहते हैं।

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दलबदल वाले नेता भी दौड़ में

लोकसभा चुनाव के पहले कांग्रेस से भाजपा में आए कई नेता भी दौड़ में शामिल हैं। इनमें से कुछ पूर्व विधायक एवं सांसद भी है। जिन्हें भाजपा में शामिल तो कर लिया था, लेकिन लोकसभा चुनाव में कोई जवाबदारी नहीं दी गई थी। वह भी अब अपनी किस्मत बदलने का इंतजार कर रहे है। कई ऐसे कांग्रेसी नेता है जो अपने क्षेत्र में अच्छी पकड़ रखते हैं और लोकसभा चुनाव में भाजपा को उन्होंने लाभ भी दिलाया है।

फिर से पद के लिए नेता सक्रिय

शिवराज सरकार ने विधानसभा चुनाव के कुछ माह पहले ही सभी को साधने के लिए नेताओं की निगम मंडलों में नियुक्तियां की थी। इन नेताओं को काम करने का कुछ माह के लिए ही समय मिल पाया था। ऐसे नेता फिर से पद पाने के लिए सक्रिय बने हुए हैं। इन नेताओं का तर्क है कि उन्हें सालों तक समर्पित भाव से काम करने पर सरकार ने पद तो दिया,लेकिन वे पद पर साल भर भी नहीं रह पाए।

इन निगम मंडल, प्राधिकरणों में होनी हैं नियुक्तियां

प्रदेश में जिन निगम मंडल और विकास प्राधिकरणों में नियुक्ति होना है। उनमें प्रदेश के भोपाल, इंदौर, उज्जैन, देवास, जबलपुर, सिंगरौली, कटनी, अमरकंटक और रतलाम में विकास प्राधिकरण है। प्रदेश सरकार ने अब तक रामकृष्ण कुसमारिया को राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग का अध्यक्ष बनाया है।

इसके अलावा मध्यप्रदेश में तीर्थ स्थान एवं मेला प्राधिकरण, भंडार गृह निगम, जन अभियान परिषद, महर्षि पतंजलि संस्कृत संस्थान, गौपालन एवं पशु संवर्धन बोर्ड, सामान्य वर्ग कल्याण आयोग, पाठ्य पुस्तक निगम, खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, ऊर्जा विकास निगम, संत रविदास हस्तशिल्प एवं हथकरघा विकास निगम, पशुधन एवं कुक्कुट विकास निगम, बीज एवं फार्म विकास निगम, हाउसिंग बोर्ड, पर्यटन विकास निगम, महिला एवं वित्त विकास निगम, पाठ्य पुस्तक निगम, बीज एवं फार्म विकास निगम, पर्यटन विकास निगम, खनिज विकास निगम, नागरिक आपूर्ति निगम, राज्य कर्मचारी कल्याण समिति, जन अभियान परिषद, भू-संपदा विनियामक प्राधिकरण, श्रम कल्याण मंडल, माटी कला बोर्ड, वन विकास निगम, इलेक्ट्रॉनिक्स विकास निगम,योग आयोग, भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण मंडल, शहरी एवं ग्रामीण असंगठित कर्मकार मंडल, राज्य प्रवासी श्रमिक आयोग,युवा आयोग, विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण में नियुक्तियां होनी हैं।

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