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रतलाम रेल मंडल का यात्री सरोकार, चलती ट्रेन में दी जा रही है सुविधा

उपचार और अन्य जरूरत हो, तो रेलवे करेगा मदद

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अक्षरविश्व न्यूज उज्जैन। रेलवे अपने यात्रियों को केवल सुलभ यात्रा ही नहीं, बल्कि अन्य मदद के लिए भी अभिनव कार्य करने जा रहा है। यात्री सरोकार के क्रम में रतलाम रेल मंडल यात्रियों की सुविधा के लिए ट्रेन में ही उन्हें जरूरी सामान के साथ इलाज भी उपलब्ध करवा रहा है। इनकी पहली प्राथमिकता किसी भी यात्री को स्वास्थ सुविधा उपलब्ध करवाना है। इसके बाद डायपर और दूध दूसरी प्राथमिकता में शामिल है। इसके बाद तीसरी प्राथमिकता में ईयरफोन, मोबाइल चार्जर जैसी चीजें दी जाती हैं।

ट्रेन के अंदर यात्रियों को सुविधा देने का काम रेल मदद एप, एक्स (पूर्व में ट्विटर) और टीटीई कॉल जैसे प्लेटफार्म के माध्यम से किया जा रहा है। यद्यपि इसके लिए यात्रियों को उस वस्तु की कीमत का भुगतान करना होता है, जो उसने मंगवाई है। दिलचस्प यह भी है कि पश्चिम रेलवे के सभी रेल मंडलों में रतलाम मंडल को एक्सीलेंट रेटिंग मिली है। यह रेटिंग यात्रियों की संतुष्टि के आधार पर मिली है।

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इस तरह काम करता है सिस्टम

फेसबुक, एक्स, टीटीई काल सहित अन्य किसी भी माध्यम से सूचना मिलते ही ट्रेन की लोकेशन का पता किया जाता है। इसके बाद अगले स्टेशन तक सूचना पहुंचाई जाती है कि कोच विशेष में, अमुक सीट पर, इस पीएनआर पर यात्रा कर रहे यात्री को इस वस्तु की आवश्यकता है। अगले स्टेशन का स्टाफ तुरंत अलर्ट होता है और यात्री द्वारा चाही गई आवश्यक सेवा या वस्तु को जुटाता है। ट्रेन के पहुंचते ही टीम यात्री के पास पहुंचती है और उसे चाही गई सेवा या वस्तु दे दी जाती है।

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पहली प्राथमिकता स्वास्थ्य सेवा
रेलवे द्वारा पहली प्राथमिकता स्वास्थ्य सेवा को, दूसरी प्राथमिकता दूध व डायपर जैसी आवश्यक वस्तुओं को और तीसरी प्राथमिकता यात्रा में आवश्यक अन्य चीजों जैसे मोबाइल चार्जर, ईयरफोन आदि को दी जाती है। यात्री को सेवाओं के बदले भुगतान करना होता है। डॉक्टर की सेवा के लिए 200 रुपये शुल्क तय है, शेष वस्तुओं के बिल पर लिखी राशि का भुगतान करना होता है।

रेल मंडल की सतत निगरानी
रेल मंडल यात्रियों को सफर के दौरान जरूरत की चीजें उपलब्ध करवाने के लिए लगातार निगरानी भी कर रहा है। स्वास्थ्य संबंधी समस्या को लेकर रेलवे सबसे ज्यादा अलर्ट रहता है। गत तीन माह में महिला यात्री और बच्चों से संबंधित चीजें (दूध, सैनिटरी नैपकिन, डायपर इत्यादि) मांगे जाने पर पूर्ति की गई है। दिव्यांगजन की मदद की भी 34 सूचनाएं मिलीं, जिन पर तुरंत सहायता पहुंचाई गई है।

शुल्क भी तय है

ट्रेन में यात्रियों को डॉक्टर की सेवा के लिए 200 रुपये शुल्क तय है। शेष वस्तुओं के बिल पर लिखी राशि का भुगतान करना
होता है।

अपने शिशु के लिए गर्म दूध की आवश्यकता हो और एक फोन पर वह चलती ट्रेन में ही मिल जाए।

किसी दवा की जरूरत हो, तो वह भी ट्रेन में ही उपलब्ध हो जाएगी।

बच्चे का डायपर एक सूचना देने पर ही ट्रेन में मिल जाएंगे।

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